मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल मनोज जरांगे पाटिल के प्रस्तावित 'मुंबई मार्च' को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है. इस याचिका में अदालत से मांग की गई है कि उन्हें मुंबई के आजाद मैदान में आंदोलन करने की अनुमति न दी जाए. साथ ही मुंबई में उनके प्रवेश पर भी रोक लगाने की मांग उठाई गई है. मुख्य न्यायमूर्ति महेशचंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि प्रस्तावित आंदोलन से शहर की यातायात व्यवस्था और आम जनजीवन प्रभावित हो सकता है.
वीडियो क्लिप का दिया गया हवाला
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि मनोज जरांगे पाटिल ने एक वीडियो क्लिप में स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि उन्हें अनुमति नहीं भी मिली तब भी वे मुंबई में प्रवेश कर अपना आंदोलन जारी रखेंगे. वकील ने कोर्ट को यह भी बताया कि जरांगे फिलहाल जालना में हैं जो मुंबई से करीब 500 किलोमीटर दूर है और उन्होंने हाल ही में अपना 12 दिन लंबा उपवास समाप्त किया है.
पिछले आंदोलन का भी किया गया जिक्र
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने पिछले वर्ष के आंदोलन का हवाला भी दिया. वकील ने बताया कि उस समय आंदोलनकारियों ने कई प्रमुख रास्तों और इलाकों को अवरुद्ध कर दिया था. उन्होंने हाईकोर्ट के एक पुराने आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थिति ऐसी बन गई थी कि जस्टिस रवींद्र घुगे को भी हाईकोर्ट पहुंचने के लिए फुटपाथ पर पैदल चलना पड़ा था.
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