- मुंबई पुलिस ने CJP के आंदोलन को बिना हिंसा और लाठीचार्ज के सफलतापूर्वक शांतिपूर्ण ढंग से नियंत्रित किया.
- 10 युवा आंदोलनकारी शिवाजी पार्क में CJP के मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे सहित मांगों को लेकर एकत्रित हुए.
- पुलिस ने आंदोलन को अनुमति नहीं दी थी. लेकिन आंदोलन के लिए अस्थायी मंच बनाकर प्रदर्शन स्थल पर सहयोग दिया.
'सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे...' हिंदी की इस कहावत को शुक्रवार की शाम मुंबई पुलिस ने अमलीजामा पहनाया. बिना लाठी चलाए, बिना किसी को एक थप्पड़ मारे और बिना किसी हिंसक झडप के मुंबई पुलिस ने क्रॉक्रोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन को निपटा दिया. प्रदर्शनकारी भी खुश होकर घर लौटे और शहर में शांति बरकरार रहने से पुलिस ने भी चैन की सांस ली.
दरअसल, CJP के आंदोलन के लिए मुंबई पुलिस ने वहीं रणनीति अपनाई, जो उसने पिछले साल मराठा आंदोलन के दौरान अपनाई थी. दोनों ही बार यह रणनीति कारगर साबित हुई. CJP ने शिवाजी पार्क में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और अन्य मांगों को लेकर आंदोलन का ऐलान किया था. यह आंदोलन शाम चार बजे शुरू होना था. चूंकि मुंबई पुलिस ने कुछ अदालती आदेशों का हवाला देते हुए आंदोलन की अनुमति नहीं दी थी, इसलिए मैदान के बाहर सड़क पर ट्रक खड़ा कर एक अस्थायी मंच बनाया गया और वहीं आंदोलन करने का फैसला लिया गया.

10 हजार युवा आंदोलनकारी हुए प्रदर्शन में शामिल
लोगों के जुटने का समय शाम चार बजे तय था, लेकिन दोपहर दो बजे से ही युवा आंदोलनकारियों की भीड़ वहां पहुंचनी शुरू हो गई थी. शाम छह बजे तक मंच के तीनों ओर करीब 10 हजार युवा आंदोलनकारी जमा हो चुके थे. इस भीड़ में ज्यादातर अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र थे. बड़ी संख्या में महिलाएं भी आंदोलन में शामिल नजर आईं.
मंच से CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके समेत संगठन के कई नेताओं ने भाषण दिए, जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त सहित कई सत्ताधारी नेताओं पर निशाना साधा गया. फिल्म और समाजसेवा जगत की कई जानी-मानी हस्तियां भी वहां मौजूद थीं. शिवाजी पार्क के चारों ओर पुलिस की भारी तैनाती देखने को मिली. पुलिसकर्मी वर्दी में भी थे और सादे कपड़ों में भी आंदोलनकारियों के बीच मौजूद थे. मुंबई पुलिस की स्पेशल ब्रांच के अलावा केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के अधिकारी भी भीड़ में रहकर गतिविधियों पर नजर रखे हुए थे.

पुलिस ने आंदोलनकारियों को कैसे किया कंट्रोल?
कुछ आंदोलनकारियों और मीडियाकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की की छिटपुट घटनाओं को छोड़ दें तो कोई बड़ी वारदात नहीं हुई. शाम सात बजे से भीड़ वहां से हटने लगी और रात आठ बजे तक पूरी सड़क खाली हो गई, मानो वहां कुछ हुआ ही न हो. इसके कुछ समय बाद सड़क पर वाहनों की आवाजाही भी सामान्य हो गई. मुंबई पुलिस ने इस आंदोलन को बेहद संवेदनशील तरीके से संभाला. एक छोटी सी गलती भी हालात को विस्फोटक बना सकती थी. खासकर जंतर-मंतर आंदोलन के बाद दिल्ली पुलिस को जिस तरह की आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था, वैसी स्थिति मुंबई पुलिस किसी भी कीमत पर नहीं चाहती थी. मुंबई के पुलिस आयुक्त देवेन भारती और संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) मनोज शर्मा पर यह जिम्मेदारी थी कि शहर में किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो. दोनों अधिकारी वर्षों से मुंबई में अलग-अलग पदों पर काम कर चुके हैं और शहर की परिस्थितियों को अच्छी तरह समझते हैं.
मुंबई पुलिस का ये फॉर्मूला हो गया हिट
CJP आंदोलन के दौरान मुंबई पुलिस ने वही फॉर्मूला अपनाया, जो उसने पिछले वर्ष मराठा आंदोलन के समय अपनाया था. पिछले साल अगस्त के अंतिम सप्ताह में मराठवाड़ा से हजारों मराठा समुदाय के लोग अपने नेता मनोज जरांगे पाटिल के नेतृत्व में मुंबई पहुंचे थे. पुलिस ने किसी को शहर में प्रवेश करने से नहीं रोका, बल्कि उनकी आवाजाही को सुगम बनाया. आंदोलनकारियों ने आजाद मैदान और उसके आसपास के दक्षिण मुंबई इलाके में डेरा डाल लिया था.

न तो लाठीचार्ज किया गया और न ही बल प्रयोग
आंदोलन के दौरान कई बार हंगामा हुआ और पुलिस को उकसाने की कोशिश भी की गई, लेकिन पुलिस ने संयम बनाए रखा. किसी भी आंदोलनकारी पर न तो लाठीचार्ज किया गया और न ही बल प्रयोग किया गया. बाद में अदालती हस्तक्षेप के बाद तीन दिन में आंदोलन शांतिपूर्वक समाप्त हो गया. इतने बड़े और संवेदनशील आंदोलन को संयम के साथ संभालने के लिए मुंबई पुलिस की काफी सराहना हुई थी. CJP के आंदोलन के दौरान भी पुलिस ने कहीं बल प्रयोग नहीं किया. भले ही कागजों पर पुलिस ने आंदोलन की अनुमति नहीं दी थी. लेकिन शिवाजी पार्क के बाहर प्रदर्शन करने में सहयोग किया. पार्क के आसपास की सड़कों पर कुछ घंटों के लिए वाहनों की आवाजाही रोक दी गई ताकि युवा शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर सकें.
हालांकि, बाद में पुलिस को अभिजीत दीपके समेत कई आंदोलनकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने पड़े. एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, ऐसा इसलिए किया गया ताकि भविष्य में कोई अन्य संगठन इस घटना का हवाला देकर कानून तोड़ने की कोशिश न करे. बहरहाल, आंदोलन के बाद अभिजीत दीपके ने सहयोग के लिए मुंबई पुलिस का धन्यवाद किया और दिल्ली पुलिस को मुंबई पुलिस से सीख लेने की नसीहत दी. आंदोलन समाप्त होने के बाद कई कार्यकर्ता वर्दीधारी पुलिसकर्मियों से "लव यू मुंबई पुलिस" कहते हुए नजर आए.
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