महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब और तेज होता नजर आ रहा है. मनोज जरांगे पाटिल के अनशन के 11वें दिन लातूर जिले से एक दुखद घटना सामने आई है. शिरूर अनंतपाल तालुका के सुमठाणा गांव के रहने वाले सुनील बिरादर नामक युवक ने कथित तौर पर मराठा आरक्षण की मांग को लेकर कुएं में कूदकर आत्महत्या कर ली.
घटना के बाद उसका एक सुसाइड नोट भी सामने आया है. नोट में उसने लिखा है कि वह मराठा समाज को आरक्षण दिलाने की मांग के समर्थन में यह कदम उठा रहा है. युवक की मौत की खबर फैलते ही इलाके में आक्रोश फैल गया.
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शव रखकर शुरू किया 'रास्ता रोको' आंदोलन
आत्महत्या की घटना के बाद मराठा समाज के लोगों ने युवक के शव को येरोलमोड़ लाकर सड़क पर रख दिया और 'रास्ता रोको' आंदोलन शुरू कर दिया. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा तब तक आंदोलन जारी रहेगा. इस विरोध प्रदर्शन के कारण क्षेत्र में यातायात बुरी तरह प्रभावित हो गया. घटनास्थल पर बड़ी संख्या में लोग जुट गए और प्रशासन को स्थिति संभालने के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने पड़े.
जालना में भी हाईवे जाम, आंदोलन हुआ उग्र
मराठा आरक्षण को लेकर असंतोष केवल लातूर तक सीमित नहीं रहा. जालना जिले में भी आंदोलनकारियों ने धुले-सोलापुर हाईवे को जाम कर दिया. इससे राज्य के कई हिस्सों में लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई. आंदोलन के उग्र होने से सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है.
मनोज जरांगे ने युवाओं से जीवन न खत्म करने की अपील की
लातूर की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए मनोज जरांगे पाटिल ने कहा, "मेरी सभी बच्चों से विनती है कि अपना जीवन समाप्त न करें. अपने माता-पिता के बारे में सोचें."
उन्होंने आगे कहा, "सभी से आग्रह है कि हम मिलकर लड़ेंगे. इन लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है. फडणवीस और शिंदे से हम इसका बदला लेंगे." जरांगे ने लोगों से शांति बनाए रखने की भी अपील की. उन्होंने कहा, "मेरी अपील है कि कोई भी 'रास्ता रोको' न करे और न ही टायर जलाए."
सरकार पर साधा निशाना
मनोज जरांगे ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, "उन्हें आरक्षण देना ही नहीं था, सिर्फ दिखावा किया." उन्होंने यह भी कहा कि मराठा समाज को न्याय नहीं मिला तो आंदोलन और तेज होगा.
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