महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर चल रहे आंदोलन और मनोज जरांगे पाटिल के अनशन के बीच जालना जिला प्रशासन ने मराठा-कुनबी प्रमाणपत्र प्रक्रिया को लेकर बड़ा दावा किया है. प्रशासन के अनुसार अब तक प्राप्त 18,276 आवेदनों में से 99.9 प्रतिशत को मंजूरी देकर लाभार्थियों को प्रमाणपत्र वितरित किए जा चुके हैं. केवल दस्तावेजों की कमी के कारण कुछ आवेदन खारिज हुए हैं. प्रशासन ने गांव-गांव विशेष आवेदन शिविर शुरू किए हैं और लाभार्थियों की सूची ग्राम पंचायतों में प्रदर्शित की जा रही है. साथ ही अधिक लोगों से आवेदन करने की अपील भी की गई है, जबकि सरकार कानूनी प्रक्रिया के तहत मांगों पर काम करने की बात कह रही है.
जरांगे के अनशन के बीच प्रशासन की बड़ी घोषणा
मराठा आरक्षण आंदोलन और मनोज जरांगे पाटिल के अनशन के बीच जालना जिला प्रशासन ने दावा किया है कि मराठा-कुनबी प्रमाणपत्र के लिए आए 99.9% आवेदनों को मंजूरी दे दी गई है. जिला कलेक्टर आशिमा मित्तल ने बताया कि अब तक 18,276 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिन्हें मंजूर कर संबंधित लोगों को प्रमाणपत्र भी वितरित किए जा चुके हैं.

आरक्षण आंदोलन के दौरान मनोज जरांगे
सिर्फ दस्तावेजों की कमी से खारिज हुए आवेदन
प्रशासन के मुताबिक केवल 0.1% आवेदन ही खारिज किए गए हैं और इसकी वजह सिर्फ दस्तावेजों की कमी रही. पिछले साल 2 सितंबर को जारी सरकारी आदेश के बाद मिले 421 आवेदनों में से 377 लोगों को प्रमाणपत्र भी प्रदान किए जा चुके हैं. प्रशासन ने आज से विशेष आवेदन शिविर भी शुरू कर दिए हैं और लाभार्थियों की सूची ग्राम पंचायतों में प्रदर्शित की गई है.
58 लाख रिकॉर्ड, लेकिन कानूनी प्रक्रिया जरूरी
कलेक्टर ने बताया कि लगभग 58 लाख रिकॉर्ड चिह्नित किए गए हैं और अधिक से अधिक लोगों से आवेदन करने की अपील की गई है. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना औपचारिक आवेदन और दस्तावेजी प्रमाण के प्रमाणपत्र जारी नहीं किए जा सकते. जालना जिले में अब तक 35,981 SEBC प्रमाणपत्र भी जारी किए जा चुके हैं, जबकि जाति वैधता के लिए आए 1,664 आवेदनों में से 1,016 का सत्यापन पूरा हो चुका है.
जरांगे से अनशन और मुंबई मार्च खत्म करने की अपील
जिला प्रशासन ने कहा कि मनोज जरांगे पाटिल की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और मेडिकल टीम उनकी देखरेख कर रही है. कलेक्टर ने उनसे अनशन समाप्त करने और प्रस्तावित मुंबई मार्च रद्द करने की अपील की है. उनका कहना है कि 12 सितंबर को एक महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है और सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर काम कर रही है. हालांकि प्रशासन ने यह भी कहा कि सभी फैसले कानूनी और संवैधानिक दायरे में ही लिए जा सकते हैं.
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