- नितिन नवीन ने आठ महीने की देरी के बाद अपनी टीम में राम माधव को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया है
- राम माधव छह साल बाद भाजपा संगठन में लौटे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका इसमें अहम रही है
- राम माधव ने पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर में भाजपा का विस्तार करने और सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने आज आठ महीने की देरी से अपनी टीम की घोषणा कर दी. एक चौंकाने वाला नाम राम माधव का है. उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है. इस तरह राम माधव ने छह साल बाद भाजपा संगठन में वापसी की है. आरएसएस के प्रचारक के तौर पर काम कर चुके राम माधव की यह भाजपा में दूसरी पारी है. सूत्रों के मुताबिक़ उनको यह नई ज़िम्मेदारी देने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बड़ी भूमिका रही है. 2024 में जब उन्हें आरएसएस से फिर से भाजपा में भेजा गया था, तब आरएसएस ने कहा था कि उन्हें महत्वपूर्ण दायित्व मिलना चाहिए. सूत्रों के अनुसार तब पीएम मोदी ने इसका आश्वासन दिया था.
जानकारों के अनुसार राम माधव की भाजपा में वापसी से आरएसएस की पार्टी संगठन पर पकड़ और मजबूत होगी. आरएसएस के ही प्रचारक सुनील बंसल को राष्ट्रीय महासचिव के पद पर बनाए रखा गया है. बंगाल की प्रचंड विजय में बड़ी भूमिका निभाने वाले बंसल संगठन में पहले की तरह अहम किरदार रहेंगे. यूपी में भाजपा की चार लगातार जीत में बड़ी भूमिका निभाने वाले बंसल ने तेलंगाना, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भाजपा को सफलता दिलाई है. इसी तरह आरएसएस की ओर से नियुक्त बीएल संतोष पार्टी के संगठन महासचिव के पद पर आगे भी काम करते रहेंगे. जबकि आरएसएस के दो अन्य प्रचारक शिव प्रकाश और सौदान सिंह संगठन सह मंत्री बने रहेंगे.
क्यों भाजपा में इतनी अहमियत रखते हैं राम माधव, 2014 से ही प्रभावशाली
इनमें बड़ा नाम राम माधव का है, जो आरएसएस और भाजपा के रिश्तों की नई कहानी बताता है. राम माधव ने अपने करियर की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में की। वे लंबे समय तक संघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता और अखिल भारतीय सह-प्रचार प्रमुख रहे. फिर 2014 के आम चुनावों में भाजपा की जीत के बाद संघ ने उन्हें भाजपा संगठन में काम करने के लिए भेजा। उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया था। पूर्वोत्तर और जम्मू कश्मीर में उन्होंने भाजपा का विस्तार करने और सरकार बनाने में बड़ी भूमिका निभाई थी. असम, त्रिपुरा और नागालैंड जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में भाजपा की सरकारें बनवाने और पार्टी का आधार मजबूत करने में उनका सराहनीय प्रदर्शन रहा.
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जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने में मुख्य रणनीतिकार थे राम माधव
जम्मू-कश्मीर में भाजपा और पीडीपी के गठबंधन वाली सरकार बनवाने के पीछे वे मुख्य रणनीतिकार थे। हालांकि बाद में इससे हो रहे राजनीतिक नुकसान के कारण भाजपा को रिश्ता तोड़ना पड़ा था. तत्कालीन राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने उन्हें विवादों में घसीटने का प्रयास भी किया था. इन सभी विवादों का असर उनके राजनीतिक भविष्य पर पड़ा, जब सितंबर 2020 में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने अपनी नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी और टीम की घोषणा की थी, तब राम माधव को राष्ट्रीय महासचिव पद से मुक्त कर दिया गया था. पद से हटने के बाद वे वापस आरएसएस के कार्यों में सक्रिय हो गए. उन्हें आरएसएस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य बनाया गया.
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राजनीति से कूटनीति तक पकड़ रखते हैं राम माधव
राम माधव अंतर्राष्ट्रीय संबंधों और कूटनीति से भी जुड़े रहे हैं. वे 'इंडिया फाउंडेशन' जैसे थिंक टैंक के प्रमुख स्तंभों में से एक हैं. कूटनीति मामलों से जुड़े आयोजन करते रहे हैं. वैसे तो भाजपा संगठन में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का पद अधिक सक्रियता का अवसर नहीं देता. इस पद पर अमूमन वरिष्ठ नेताओं को स्थान दिया जाता है. लेकिन राम माधव शायद ही निष्क्रिय रहें. यह भी संभव है कि उन्हें पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन आने वाले समय में संगठन से जुड़ी कोई बड़ी ज़िम्मेदारी दें.
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