- इलाहाबाद HC ने सोशल मीडिया पर जजों के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले आरोपियों को नोटिस जारी किया
- दोनों आरोपी दीपक सिंह और देवेंद्र सिंह प्रयागराज की नैनी जेल में बंद हैं
- कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि वे साइबर सेल की मदद से मुख्य उकसाने वाले व्यक्ति की पहचान करें
सोशल मीडिया पर न्यायपालिका के खिलाफ अपशब्द और आपत्तिजनक पोस्ट करने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्ती की है. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अवमानना आवेदन (क्रिमिनल) पर सुनवाई करते हुए सोशल मीडिया पर जिला अदालतों के न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट करने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए इस मामले ने प्रयागराज की नैनी जेल में बंद दीपक सिंह और देवेंद्र सिंह नामक व्यक्तियों को नोटिस जारी करते हुए दो हफ्ते में जवाब मांगा है.
कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को दिया निर्देश
कोर्ट ने दोनों को जेल अधीक्षक के माध्यम से नोटिस तामील कराये जाने का आदेश दिया है. वहीं कोर्ट ने प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि वो यह सुनिश्चित करेंगे कि जेल में बंद दोनों गैर-आवेदकों को सोशल मीडिया (Facebook) पर अपमानजनक सामग्री पोस्ट करने के लिए किसने उकसाया है उस मुख्य व्यक्ति का पता लगाया जाए. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पुलिस असली अभियुक्त का पता लगाने के लिए उन सभी तरीकों का भी इस्तेमाल कर सकती है जो साइबर क्राइम पुलिस के पास उपलब्ध है.
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हाईकोर्ट अब इस मामले में दो अप्रैल को सुनवाई करेगी. यह आदेश जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस प्रशांत वर्मा प्रथम की डिविजन बेंच ने जिला न्यायालयों के न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट करने वाली स्वतः संज्ञान याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है. दरअसल 24 फरवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की डबल बेंच ने बस्ती की एक जिला अदालत में अधिवक्ता हरि नारायण पांडेय के आचरण के संबंध में अदालतों की अवमानना अधिनियम 1971 की धारा 15 के तहत एक आपराधिक अवमानना मामले में सुनवाई करते हुए सोशल मीडिया पर न्यायपालिका के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग करने वालों को चेतावनी देते हुए कहा था कि ऐसी टिप्पणियां निष्पक्ष आलोचना के दायरे से बाहर है और ऐसा करने पर अवमानना के तहत सख्त कार्रवाई की जा सकती है.
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'पोस्ट पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी'
कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा था कि अगर अदालत ऐसी पोस्ट को अवमानना के क्षेत्राधिकार में संज्ञान में लेती है तो उस पोस्ट पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने अधिवक्ता के खिलाफ मुकदमा समाप्त करते हुए 24 फरवरी को अपने निर्णय में कहा था कि अधिवक्ता काफी लंबे समय से वकालत के पेशे में है और उसने बिना किसी शर्त के माफी मांग ली है जिसे अधीनस्थ अदालत के न्यायाधीश ने स्वीकार कर लिया था.
क्या है मामला?
सोशल मीडिया पर अदालत और जजों के खिलाफ अभद्र टिप्पणी के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर प्रयागराज के कैंट थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था. मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस एक्शन में दिखी और 11 मार्च को जालौन के रहने वाले दो सगे भाइयों दीपक सिंह और देवेंद्र सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. दोनों ने अपने फेसबुक अकाउंट अश्विनी अंबेडकर मूल निवासी पर अदालत और जजों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी जिसके बाद कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने फेसबुक आईडी की जानकारी जुटाकर आरोपियों की पहचान की थी.
अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जिला न्यायालयों के न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट करने के मामले में आपराधिक अवमानना आवेदन पर सुनवाई करते हुए जेल में बंद दोनों आरोपियों को हाईकोर्ट द्वारा 24 फरवरी के आदेश के अनुपालन में जेल में बंद दोनों आरोपियों दीपक सिंह और देवेंद्र सिंह को नोटिस जारी करते हुए दो हफ्ते में जवाब मांगा है. सुनवाई के दौरान कोर्ट में पेश किए गए सोशल मीडिया पर पोस्ट को देखने के बाद प्रथम दृष्टया पाया कि जालौन के रहने वाले संतोष कुमार सिंह के पुत्र दीपक सिंह और देवेंद्र सिंह ने फेसबुक पेज पर लिखी गई अपनी पोस्टों के माध्यम से न्यायालयों को बदनाम किया है.
कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रथम दृष्ट्या दोनों ने कोर्ट की गरिमा को कम किया है. उनका यह कृत्य यदि सही पाया जाता है तो न्यायालय अवमानना अधिनियम की धारा 12 के तहत निश्चित रूप से दंडनीय है. कोर्ट ने जेल में बंद गैर-आवेदकों यानी दीपक सिंह और देवेंद्र सिंह को नोटिस जारी किया. सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि वर्तमान में दोनों आरोपी प्रयागराज की नैनी जेल में हैं जिस पर कोर्ट ने जेल अधीक्षक के माध्यम से दोनों को जेल में नोटिस तामील कराये जाने का आदेश दिया. कोर्ट ने नोटिस पर दोनों को दो हफ्ते में जवाब देने को कहा है. कोर्ट ने आदेश दिया कि नोटिस के साथ जिन जरूरी दस्तावेजों को संलग्न किया जाना है उन्हें भी गैर-आवेदकों यानी दीपक सिंह और देवेंद्र सिंह को उपलब्ध कराया जाए.
हाईकोर्ट ने यह भी सुनिश्चित किया है कि यदि आरोपी अपना वकील करने में असमर्थ रहते है तो हाईकोर्ट कानूनी सेवा समिति उन्हें वकील उपलब्ध कराएगी ताकि दोनों अपना जवाब दाखिल कर सकें.
इसके अलावा कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर, प्रयागराज को साइबर सेल की मदद से उस मुख्य व्यक्ति का पता लगाने का निर्देश दिया गया है जिसने इन आरोपियों को ऐसी अपमानजनक सामग्री पोस्ट करने के लिए उकसाया था. कोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई दो अप्रैल को करेगी. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि दो गैर-आवेदको अर्थात् दीपक सिंह और देवेंद्र सिंह की ID का उपयोग किया गया है. अतः उन्हें निश्चित रूप से अपना जवाब प्रस्तुत करना होगा. साथ ही अपना जवाब प्रस्तुत करते समय दोनों स्पष्ट रूप से यह भी बताएं कि यदि पोस्ट उन्होंने स्वयं नहीं लिखे थे तो उन्हें अपनी ID पर आपत्तिजनक पोस्ट डालने के लिए किसने उकसाया था.
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