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यूपी पंचायत चुनाव में देरी क्यों, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब, OBC कमीशन, चुनाव शेड्यूल पर सवाल

UP Panchayat Election Date: उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में उठा है. चुनाव में देरी को लेकर अदालत ने सवाल उठाए हैं. ओबीसी कमीशन को लेकर सवाल पूछा है.

यूपी पंचायत चुनाव में देरी क्यों, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब, OBC कमीशन, चुनाव शेड्यूल पर सवाल
UP Panchayat Election: उत्तर प्रदेश त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव
लखनऊ:

UP Panchayat Election News in Hindi: उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में देरी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार को कड़ी फटकार लगाई है. सरकार की ओर से हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा गया कि उसने पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर दिया है. इस पर अदालत ने पूछा कि जब सरकार को पता था कि 26 मई को पंचायतों का कार्यकाल खत्म हो रहा है तो फिर इतनी देरी क्यों की गई. अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग से चुनाव का शेड्यूल भी बताने को कहा. ओबीसी कमीशन ने पिछड़ा वर्ग संबंधित रिपोर्ट 10 जुलाई तक देने को कहा गया है. जबकि सरकार ने ओबीसी आयोग को रिपोर्ट पेश करने के लिए छह महीने का वक्त दिया है. 

उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव में हर बार पिछड़ा वर्ग आयोग हर जिले में पिछड़े वर्ग के आर्थिक सामाजिक पिछड़ेपन की शिकार जातियों का सर्वे करता है. उनके आंकड़े इकट्ठा करता है. इसमें कई महीनों का वक्त लगता है. ओबीसी कमीशन को उत्तर प्रदेश में 75 जिलों का अलग-अलग सर्वे करना है. फिर वो रिपोर्ट के आधार पर पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण पर रिपोर्ट देगा. फिर आरक्षण पर विपक्षी दलों से आपत्तियां मांगी जाएंगी और उनका निस्तारण होगा.

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इसके बाद ही चुनाव की तारीखों की घोषणा हो सकती है. ओबीसी कमीशन नवंबर तक रिपोर्ट देगा, ऐसे में उसके लिए दिसंबर-जनवरी के पहले चुनाव कराना मुश्किल है. लेकिन फरवरी-मार्च में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के कारण उस वक्त पंचायत चुनाव कराना संभव नहीं लग रहा है.  

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उत्तर प्रदेश सरकार ने पहले ही प्रशासक के तौर पर मौजूदा ग्राम प्रधानों को ही कार्यभार संभालने की जिम्मेदारी दे दी है.उत्तर प्रदेश सरकार के प्रधानों को लेकर किए गए फैसला का मामला हाई कोर्ट में उठा है, तो पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर समाजवादी पार्टी को घर रहे हैं. राजभर ने कहा, सपा प्रमुख अखिलेश यादव कितना भी तीन तिकड़म कर लें. प्रधान ही प्रशासक की जिम्मेदारी संभालेंगे. वो अपने सपाई वर्करों को समझा दें कि विधानसभा तो क्या पंचायत चुनाव भी नहीं जीत पाएंगे.

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