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घर के बुजुर्ग बार-बार एक ही सवाल क्यों पूछते हैं? जानिये इसके पीछे की असली वजह

क्या आपके घर में बुजुर्ग एक ही सवाल बार-बार पूछते हैं? डॉ. नितिन कुमार राय वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट से जानिए कब हो सकता है अल्जाइमर का संकेत-

घर के बुजुर्ग बार-बार एक ही सवाल क्यों पूछते हैं? जानिये इसके पीछे की असली वजह
अल्जाइमर के मरीज बार-बार एक ही सवाल क्यों दोहराते हैं? जानिए दिमाग में असल में क्या चल रहा होता है.
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घर में अगर कोई बुजुर्ग अल्जाइमर या डिमेशिया से जूझ रहा है, तो उनकी देखभाल करने वालों के लिए एक आदत को झेलना बहुत भारी पड़ जाता है. वो आदत है मिनट-मिनट में एक ही सवाल बार-बार दोहराना. जैसे "हम कब निकल रहे हैं?", "क्या राहुल का फोन आया था?" या "खाना कितने बजे मिलेगा?". आप पूरी बात समझाकर जवाब देते हैं, पर दो मिनट बाद फिर वही सवाल सामने आ जाता है.

पहली नजर में ऐसा लगता है कि सामने वाला जिद्दी बन रहा है, जानबूझकर परेशान कर रहा है या बात पर धियान नहीं दे रहा है. लेकिन हकीकत कुछ और ही होती है. दरअसल उनका दिमाग नई बातों को याद के तौर पर महफूज रख ही नहीं पा रहा होता है.

दिमाग के अंदर क्या गड़बड़ होती है?

अल्जाइमर बीमारी सबसे पहले दिमाग के उन हिस्सों पर चोट करती है जिन्हें हिप्पोकैम्पस और एंटोरिनल कॉर्टेक्स कहते हैं. इन्हीं हिस्सों का काम होता है नई बातों को यादों में बदलना. जब ये हिस्से बीमार पड़ने लगते हैं, तो इंसान बात को उस वक्त तो समझ लेता है, पर दिमाग उसे हमेशा के लिए सेव नहीं कर पाता.

सीधा सा हिसाब है, जैसे किसी कंप्यूटर में सेव का बटन काम न कर रहा हो.

जवाब मिलने के बाद भी दोबारा वही सवाल क्यों?

एक सीधी बात से समझिए. बेटी ने मां से कहा कि "मम्मी, शाम को 4 बजे डॉक्टर के पास जाना है." मां ने उस वक्त 'हां' भी बोल दिया. लेकिन कुछ देर बाद उनका दिमाग उस बात को पूरी तरह साफ कर देता है. माँ के दिमाग में वो बात रही ही नहीं, इसलिए जब वो दोबारा पूछती हैं, तो उनके लिए वो सवाल एकदम नया होता है. वो तीसरी या चौथी बार नहीं, बल्कि अपने हिसाब से पहली बार ही पूछ रही होती हैं.

इसलिए जब हम झुंझलाकर कहते हैं कि "अभी तो बताया था आपको!", तो इसका कोई फायदा नहीं होता. वो जानबूझकर नहीं भूल रहे, बल्कि उनका दिमाग नई बात को पकड़ ही नहीं पा रहा है.

सिर्फ याददाश्त की कमजोरी नहीं, डर भी है वजह

हर बार सवाल पूछने की वजह सिर्फ भूलना ही नहीं होता. कई बार इसके पीछे अंदरूनी घबराहट, बैचेनी और खुद को सुरक्षित महसूस कराने की चाहत होती है.

अगर कोई बुजुर्ग बार-बार पूछ रहा है कि "बहू कब आएगी?", तो इसका मतलब सिर्फ घड़ी का टाइम पूछना नहीं है. उनके मन में यह डर हो सकता है कि कहीं वो अकेले तो नहीं छूट गए, सब ठीक तो है न. जैसे-जैसे सोचने समझने की ताकत घटती है, छोटी-छोटी बातें और रूटीन में बदलाव भी उनको डरा देता है.

ऐसे में गुस्सा करने या बार-बार याद दिलाने की जगह कुछ आसान तरीके अपनाए जा सकते हैं:

  1. उनके सवाल पर चिढ़ने के बजाय शांत आवाज में जवाब दें.
  2. कमरे में बड़ी दीवार घड़ी और बड़ा कैलेंडर लगाएं जहाँ उनकी नजर पड़ती रहे.
  3. दिनभर का एक तय रूटीन बना कर रखें ताकि मन में भटकाव न हो.
  4. छोटी-मोटी जरूरी बातें किसी सफेद बोर्ड या डायरी पर साफ-साफ लिख दें.

भारत में यह मसला इतना बड़ा क्यों बनता जा रहा है?

हमारे देश में बुजुर्गों की तादाद लगातार बढ़ रही है, इसलिए यह परेशानी भी घरों में तेजी से पैर पसार रही है. साल 2023 की एक बड़ी सरकारी स्टडी के मुताबिक, भारत में 60 साल से ऊपर के करीब 7.4 प्रतिशत बुजुर्ग डिमेंशिया की चपेट में थे. इसका मतलब हुआ लगभग 88 लाख लोग इस उलझन भरी बीमारी के साथ जी रहे हैं.

लेकिन यहां एक बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. हर बार बात भूलने या सवाल दोहराने का मतलब अल्जाइमर ही नहीं होता. कई बार दवाओं के असर, अधूरी नींद, भारी डिप्रेशन, शरीर में कोई इन्फेक्शन या दिमाग में खून का दौरा ठीक से न होने की वजह से भी याददाश्त कमजोर पड़ने लगती है.

काम की बात

अल्जाइमर से जूझ रहे अपनों की देखभाल में सबसे पहली शर्त है सब्र. मरीज सवाल इसलिए नहीं दोहरा रहा कि वो जवाब भूल गया है, बल्कि वो इसलिए पूछ रहा है क्योंकि उसका दिमाग यह याद ही नहीं रख पा रहा कि उसने यह बात आपसे पहले भी पूछी थी. जिस दिन हम इस फर्क को समझ लेंगे, उस दिन गुस्सा अपने आप कम हो जाएगा और हम उनकी सही देखभाल कर पाएंगे.

लेखक के बारे में 

डॉ. नितिन कुमार राय वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट हैं और वर्तमान में कैलाश हॉस्पिटल, नोएडा में कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट के रूप में कार्यरत हैं. उन्होंने MD और DM की डिग्री प्राप्त की है तथा न्यूरोलॉजी के क्षेत्र में व्यापक अनुभव रखते हैं. इससे पहले वह फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, नई दिल्ली और यथार्थ हॉस्पिटल्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. न्यूरोलॉजिकल विकारों पर उनके कई शोध पत्र राष्ट्रीय सम्मेलनों में प्रस्तुत किए जा चुके हैं.

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