अक्सर हम सुनते हैं कि पेट ठीक रखना है तो खूब सारा फाइबर खाओ. कब्ज दूर करना हो या वजन घटाना, हर कोई सलाद, फल और दलिया खाने की सलाह देने लगता है. पर क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि जैसे ही आपने ये सब ज्यादा खाना शुरु किया, पेट गुब्बारे की तरह फूल गया? खट्टी डकारें, गैस और भारीपन से हालत खराब होने लगी.
फाइबर खुद कोई विलेन नहीं है. असल में गलती हमारे खाने के तरीके, मात्रा और जल्दबाजी में होती है.पेट में अचानक गैस क्यों बनने लगती है?
सीधी सी बात है कि फाइबर हमारे पेट में पूरी तरह हजम नहीं होता. यह सीधा बड़ी आंत तक पहुंचता है. वहां मौजूद जो अच्छे बैक्टीरिया होते हैं, वो इसे तोड़ते हैं यानी फर्मेंट करते हैं. इस प्रोसेस में थोड़ी गैस बनना तो नैचुरल है. लेकिन अगर आप एक ही दिन में बहुत ज्यादा फाइबर खा लेंगे, तो वहां गैस की फैक्टरी लग जाएगी.
खासतौर पर जिनका पेट थोड़ा कमजोर है या जिन्हें आईबीएस (IBS) की दिक्कत रहती है, उनकी परेशानी ज्यादा बड़ जाती है.
एक दिन में कितना फाइबर खाना काफी है?
एक आम इंसान को दिनभर में लगभग 22 से 34 ग्राम फाइबर की जरुरत होती है. आदमी और औरत के हिसाब से यह थोड़ा बहुत ऊपर-नीचे हो सकता है. इसका मतलब यह कतई नहीं है कि जितना मिले उतना खाते जाओ. शरीर को जितना पचे, उतना ही लेना समझदारी है.
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फाइबर बढ़ाते वक्त ये गलतियां न करें
अक्सर लोग वजन घटाने के चक्कर में आज ही से ढेर सारा कच्चा सलाद, चिया सीड्स, ओट्स और फल खाना शुरु कर देते हैं. यहीं सबसे बड़ी चूक होती है.
धीरे-धीरे आदत डालें: फाइबर की मात्रा एक-दो हफ्ते में धीरे-धीरे बढ़ाएं ताकि पेट को संभलने का मौका मिले.
खूब पानी पिएं: फाइबर पेट के अंदर जाकर पानी सोखता है. अगर पानी कम पिया तो पेट साफ होने की जगह जाम हो जाएगा और कब्ज बड़ जाएगी.
फाइबर का फर्क समझें: ओट्स, दाल और सेब जैसी चीजों में घुलनशील (सॉल्युबल) फाइबर होता है जो आसानी से पचता है. वहीं कच्ची सब्जियों और छिलके वाले अनाजों में इनसॉल्युबल फाइबर ज्यादा होता है, जो कई बार संवेदनशील पेट वालों को भारी पड़ता है.
हर बार फाइबर ही दोषी नहीं होता
अगर पेट बार-बार फूल रहा है तो हो सकता है वजह कुछ और हो. जैसे दूध या चाय से दिक्कत (लैक्टोज इंटॉलरेंस), बहुत ज्यादा तली-भुनी चीजें या कोई खास दाल. इसके लिए दो-चार दिन ध्यान दें कि किस चीज को खाने के बाद पेट में गुड़गुड़ शुरू हुई.
डॉक्टर के पास कब जाना जरूरी है?
अगर फाइबर कम करने और पानी बढ़ाने के बाद भी पेट फूलना बंद न हो, लगातार दस्त या तेज दर्द रहे, या फिर पॉटी में खून दिखे, तो घरेलू नुस्खे छोड़कर सीधे डॉक्टर को दिखाएं.
सीधी बात यही है कि फाइबर सेहत के लिए बहुत जरूरी है, पर अति हर चीज की बुरी होती है. अपनी थाली में धीरे-धीरे बदलाव करें और शरीर के सिग्नल को समझें.
लेखक के बारे में :
डॉ. विनीत कुमार गुप्ता गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के क्षेत्र में 19 वर्षों से अधिक अनुभव रखने वाले वरिष्ठ विशेषज्ञ हैं. वे वर्तमान में ShardaCare – Healthcity में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के निदेशक एवं विभागाध्यक्ष हैं. उन्हें पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारियों के निदान और उपचार में विशेष विशेषज्ञता हासिल है. इसके अलावा वे ERCP, एंडोस्कोपिक अल्ट्रासोनोग्राफी, एंडोस्कोपी, कोलोनोस्कोपी और सिंगल बैलून एंटेरोस्कोपी जैसी उन्नत प्रक्रियाओं में भी दक्ष हैं. उनका फोकस सटीक निदान और मरीज-केंद्रित देखभाल पर रहता है.
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