अल्जाइमर डिजीज को अक्सर बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता है, लेकिन न्यूरोलॉजिस्ट अब मानते हैं कि इसकी शुरुआत याददाश्त कमजोर होने से कई साल पहले ही हो सकती है. ये परेशानी महिलाओं में पुरुषों की तुलना में अधिक देखी जाती है. यही वजह है कि हेल्थ एक्सपर्ट महिलाओं की मिडल एज और मेनोपॉज के दौरान ब्रेन हेल्थ का खास ध्यान रखने की सलाह देते हैं.
सीके बिड़ला हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ. केके जिंदल का कहना है कि अल्जाइमर सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं है. महिलाओं के लिए 40 और 50 की उम्र का दौर दिमागी स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि इसी समय शरीर में हार्मोनल बदलाव तेजी से होते हैं.
मेनोपॉज और अल्जाइमर के बीच का कनेक्शन
मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन (Estrogen) हार्मोन का स्तर कम होने लगता है, जिसका असर सिर्फ प्रजनन स्वास्थ्य पर नहीं बल्कि दिमाग पर भी पड़ता है. डॉक्टर के मुताबिक इसी वजह से कई महिलाओं को ब्रेन फॉग, भूलने की समस्या और ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत हो सकती है. हालांकि यह सीधे अल्जाइमर नहीं होता, लेकिन यही उम्र दिमागी स्वास्थ्य और अल्जाइमर के रिस्क कारकों को पहचानने और उन्हें कम करने के लिए सबसे अहम मानी जात
क्या मेनोपॉज का मतलब डिमेंशिया है?
डॉ. जिंदल बताते हैं कि मेनोपॉज के दौरान होने वाली भूलने की समस्या का मतलब यह नहीं है कि महिला को अल्जाइमर या डिमेंशिया हो रहा है. मेनोपॉज से जुड़ी याददाश्त संबंधी परेशानियां आमतौर पर अस्थायी होती हैं, जबकि अल्जाइमर में याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता लगातार गिरती जाती है. फिर भी दोनों स्थितियों के कुछ लक्षण एक जैसे लग सकते हैं, इसलिए इस दौर को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
क्यों अहम है मिडल एज?
डॉक्टर का कहना है कि अल्जाइमर से जुड़े बदलाव दिमाग में लक्षण आने से कई साल पहले शुरू हो सकते हैं. इसलिए 40-50 की उम्र को एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है, जब जोखिम कारकों को पहचानकर उन्हें कम किया जा सकता है.
इस दौरान कई महिलाओं को हॉट फ्लैश, रात में पसीना आना और नींद की कमी जैसी समस्याएं होती हैं. लगातार खराब नींद याददाश्त और एकाग्रता को प्रभावित कर सकती है. इसके अलावा चिंता, तनाव और अवसाद जैसी मानसिक समस्याएं भी इस उम्र में बढ़ सकती हैं, जिनका असर दिमागी स्वास्थ्य पर पड़ता है.
मेनोपॉज के बाद ब्रेन हेल्थ का कैसे रखें ध्यान?
डॉक्टर कहते हैं कि ब्रेन हेल्थ को बेहतर बनाए रखने के लिए महिलाएं कुछ आसान कदम उठा सकती हैं:
- नियमित व्यायाम करें
- पर्याप्त और अच्छी नींद लें
- ब्लड सर्कुलेशन और शुगर को कंट्रोल में रखें
- सामाजिक रूप से एक्टिव रहें
- तनाव और डिप्रेशन का समय पर इलाज कराएं.
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