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91 हजार की एक शीशी! भारत में लॉन्च हुई अल्जाइमर की नई दवा, क्या सच में लौटाएगी याददाश्त?

Lormalzi Alzheimer Drug India: भारत में अल्जाइमर बीमारी के शुरुआती इलाज के लिए एक नया विकल्प आया है. एक नई दवा लान्च हुई है, जिसे महीने में एक बार दी जाने वाली ऐसी थेरेपी है जो दिमाग में बनने वाले amyloid plaque को निशाना बनाती है.

91 हजार की एक शीशी! भारत में लॉन्च हुई अल्जाइमर की नई दवा, क्या सच में लौटाएगी याददाश्त?
Lormalzi Alzheimer Drug India: भारत में लॉन्च हुई अल्जाइमर की नई दवा, जानिए इसके बारे में सब कुछ. ( AI Image)

Lormalzi Alzheimer Drug India: भारत में अल्जाइमर बीमारी के शुरुआती इलाज के लिए एक नया विकल्प आया है. Eli Lilly and Company (India) ने Lormalzi (donanemab) लॉन्च किया है. यह महीने में एक बार दी जाने वाली ऐसी थेरेपी है जो दिमाग में बनने वाले amyloid plaque को निशाना बनाती है. यह दवा उन मरीजों के लिए मंजूर की गई है जिन्हें अल्जाइमर की वजह से हल्की याददाश्त की दिक्कत (mild cognitive impairment) या शुरुआती डिमेंशिया है.

350 mg की एक vial की कीमत 91,688 रुपये रखी गई है. यह केवल डॉक्टर की पर्ची पर मिलने वाली intravenous therapy है, जिसे CDSCO से मंजूरी मिल चुकी है. Lilly का कहना है कि यह भारत में उपलब्ध पहली और फिलहाल इकलौती ऐसी once-monthly amyloid plaque-targeting therapy है, जिसे खास तौर पर अल्जाइमर के शुरुआती लक्षण वाले मरीजों के लिए बनाया गया है.

यह लॉन्च ऐसे समय में हुआ है जब भारत में डिमेंशिया के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. इसकी बड़ी वजह बढ़ती उम्र की आबादी, बीमारी की देर से पहचान और जागरूकता की कमी है. Lilly के मुताबिक भारत में करीब 88 लाख लोग डिमेंशिया से प्रभावित हैं और इनमें ज्यादातर मरीज अल्जाइमर के हैं. अनुमान है कि 2036 तक यह संख्या लगभग दोगुनी हो सकती है.

Lormalzi (Donanemab) क्या है?

Lormalzi, donanemab का भारतीय ब्रांड नाम है. यह एक monoclonal antibody therapy है जिसे दिमाग में बनने वाले amyloid plaque को निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है. Amyloid plaque को अल्जाइमर बीमारी की एक प्रमुख जैविक पहचान माना जाता है.

अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय यूनियन, जापान और कई अन्य देशों में donanemab को Kisunla नाम से बेचा जाता है.

Eli Lilly के मुताबिक donanemab beta-amyloid के एक बदले हुए रूप N3pG को निशाना बनाता है, जो amyloid plaque में पाया जाता है. यह दवा इन plaques से जुड़कर शरीर की immune system को दिमाग में जमा amyloid को हटाने में मदद करती है.

यह थेरेपी इन मरीजों के लिए मंजूर है:

  • जिनमें अल्जाइमर की वजह से हल्की याददाश्त की समस्या हो.
  • या जो mild dementia स्टेज में हों.
  • और जिनमें amyloid pathology की पुष्टि हो चुकी हो.

Amyloid plaques असामान्य protein जमा होते हैं जो दिमाग की नर्व सेल्स के बीच बनते हैं. माना जाता है कि ये याददाश्त कमजोर होने, सोचने-समझने में दिक्कत और cognitive decline से जुड़े होते हैं.

यह इलाज कैसे काम करता है?

Lormalzi को महीने में एक बार intravenous infusion के जरिए दिया जाता है. सामान्य अल्जाइमर दवाओं के उलट, जो सिर्फ कुछ समय के लिए लक्षण कम करती हैं, donanemab बीमारी की जड़ पर असर डालने के लिए बनाया गया है. यह दिमाग में amyloid plaque को कम करने का काम करता है.

Eli Lilly के प्रवक्ता के मुताबिक भारत में ज्यादातर मरीजों को यह इलाज 18 महीने यानी 76 हफ्तों तक दिया जाएगा. इसकी वजह यह है कि amyloid PET imaging, जिसका इस्तेमाल दूसरे देशों में plaque कम होने की जांच के लिए किया जाता है, भारत में अभी ज्यादा उपलब्ध नहीं है.

इलाज इन स्थितियों में पहले भी रोका जा सकता है:

  • अगर गंभीर सुरक्षा संबंधी समस्या हो.
  • मरीज को दवा के साइड इफेक्ट्स हों.
  • या बीमारी बढ़कर moderate Alzheimer's disease तक पहुंच जाए.

दुनियाभर में शोधकर्ता अब ऐसी amyloid therapies पर काम कर रहे हैं जिनमें इलाज को plaque कम होने के आधार पर सीमित समय तक दिया जाए, न कि हमेशा के लिए.

इलाज शुरू करने से पहले कौन से टेस्ट जरूरी हैं?

  • डॉक्टरों का कहना है कि याददाश्त की समस्या वाले हर मरीज को donanemab नहीं दिया जा सकता.
  • इलाज शुरू करने से पहले यह पुष्टि जरूरी है कि मरीज में:
  • शुरुआती लक्षण वाला अल्जाइमर डिजीज हो और इसके साथ ही amyloid pathology मौजूद हो.
  • Lilly के मुताबिक भारत में पिछले कुछ सालों में Alzheimer's disease की advanced जांच सुविधाएं बढ़ी हैं. इनमें शामिल हैं:
  • cerebrospinal fluid (CSF) आधारित बायोमेकर टेस्टिंग.
  • ब्लड-बेस्ड बायोमेकर टेस्ट जैसे pTau217 और beta-amyloid 1-42.

कंपनी का कहना है कि ये नए Blood Tests Amyloid Pathology पहचानने में 90% से ज्यादा सेंसटिविटी और स्पेसिफिसिटी दे सकते हैं. फिलहाल ये जांचें मुख्य रूप से बड़े शहरों के स्पेशलाइज्ड न्यूरोलॉजिकल इंस्टीट्यूट्स और बड़े अस्पतालों में उपलब्ध हैं.

लॉन्च को लेकर Lilly ने क्या कहा?

Eli Lilly and Company (India) के प्रेसीडेंट और जनरल मैनेजर Winselow Tucker ने कहा कि यह लॉन्च अल्जाइमर डिजीज के इलाज में कंपनी के लंबे समय से चल रहे काम का हिस्सा है.

उन्होंने कहा, “35 सालों से Lilly Alzheimer's disease के इलाज और डायग्नोसिस पर रिसर्च में अग्रणी रही है. अल्जाइमर एक जटिल और लगातार बढ़ने वाली बीमारी है, जो मरीजों, परिवार वालों और हेल्थ केयर सिस्टम पर बड़ा भावनात्मक, मेडिकल और सामाजिक बोझ डालती है.”

उन्होंने कहा कि Lilly सरकारों, हेल्थ केयर सिस्टम्स और एडवोकेसी ऑर्गेनाइजेशन्स के साथ मिलकर डायग्नोसिस और मरीजों तक इलाज पहुंचाने पर काम करेगी.

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Eli Lilly and Company (India) के सीनियर डॉयरेक्टर मेडिकल राहुल कपूर ने कहा कि शुरुआती लक्षण वाले लगभग एक-तिहाई मरीज एक साल के अंदर बीमारी की गंभीर स्टेज में पहुंच सकते हैं.

उन्होंने कहा, “समय पर डायग्नोसिस और सही पेशेंट असेस्मेंट इलाज से जुड़े फैसले लेने में बहुत जरूरी है.”

भारत में अल्जाइमर डिजीज बड़ी चिंता क्यों बन रही है?

भारत में लोगों की उम्र बढ़ने के साथ डिमेंशिया के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. दुनियाभर में डिमेंशिया बुजुर्गों में डिसेबिलिटी और डिपेंडेंसी की बड़ी वजहों में शामिल है.

The Lancet Public Health में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक आने वाले दशकों में भारत में डिमेंशिया के मामले तेजी से बढ़ सकते हैं.

Lilly का अनुमान है कि डिमेंशिया की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था पर हर साल 28,300 करोड़ रुपये से ज्यादा का बोझ पड़ता है. विशेषज्ञों का कहना है कि बीमारी की देर से पहचान सबसे बड़ी समस्या है क्योंकि शुरुआती लक्षणों को अक्सर सामान्य बढ़ती उम्र मान लिया जाता है.

क्या इसके जोखिम या सीमाएं भी हैं?

दूसरी amyloid-targeting Alzheimer's therapies की तरह donanemab के भी कुछ जोखिम हो सकते हैं. इनमें सबसे बड़ी चिंता ARIA (amyloid-related imaging abnormalities) है. इसमें दिमाग में सूजन या bleeding हो सकती है, जिसकी MRI scan से निगरानी करनी पड़ती है.

विशेषज्ञ यह भी कहते हैं:

  • यह दवा बीमारी का पूरी तरह इलाज नहीं है.
  • यह पुराने Alzheimer's disease को उल्टा नहीं कर सकती.
  • इसका फायदा शुरुआती स्टेज के सही मरीजों में ज्यादा दिखता है.

इलाज की ऊंची कीमत भी कई भारतीय परिवारों के लिए परेशानी बन सकती है, हालांकि Lilly ने अल्टरनेटिव एक्सेस प्रोग्रॉम की बात कही है.

Lormalzi का लॉन्च भारत में Alzheimer's ट्रीटमेंट के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है. यह देश में आने वाली शुरुआती  डिजीज- मॉडिफाइंग थेरेपी में से एक है, जो एमिलॉयड प्लाक को निशाना बनाती है.

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इसका सही इस्तेमाल तभी संभव होगा जब समय पर डॉयग्नोज, स्पेशिलाइज्ड टेस्टिंग, MRI मोनिटरिंग और इलाज की अफॉर्डबेलिटी बेहतर हो. भारत में डिमेंशिया के बढ़ते मामलों के बीच यह थेरेपी इलाज का नया रास्ता खोल सकती है, लेकिन जागरूकता और पहुंच अभी भी बड़ी चुनौती रहेंगी.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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