आज जब संयुक्त परिवार तेजी से टूट रहे हैं और लोग नौकरी, पढ़ाई या बेहतर जीवन की तलाश में अलग-अलग शहरों में बस रहे हैं, तब भारत के एक गांव में ऐसा परिवार भी है जो अब भी एक साथ रहने की मिसाल बना हुआ है. हम बात कर रहे हैं मिजोरम के बक्तावंग गांव में स्थित Chana के परिवार की, जिसे दुनिया के सबसे बड़े परिवारों में गिना जाता है. इस परिवार के सदस्यों की संख्या 40...50..100...150 नहीं बल्कि 200 है. किसी आम परिवार की तरह यहां सिर्फ माता-पिता और बच्चे नहीं रहते थे. इस परिवार में 39 पत्नियां, 94 बच्चे, 14 बहुएं, 33 पोते-पोतियां और कई अन्य सदस्य शामिल थे. सोचिए, जिस घर में शादी-ब्याह के दौरान 30-40 मेहमानों के आने पर व्यवस्था संभालना मुश्किल हो जाता है, वहां रोजाना सैकड़ों लोग एक साथ रहते, खाते और जीवन बिताते थे. यही बात इस परिवार को दुनिया के बाकी परिवारों से अलग बनाती है. इस रिपोर्ट में पढ़िए इस परिवार की पूरी कहानी

India's largest family: मिजोरम के बक्तावंग गांव में स्थित Chana का परिवार दुनिया के सबसे बड़े परिवारों में गिना जाता है. इस परिवार में 200 के करीब सदस्य एक साथ रहते हैं. परिवार के मुखिया की साल 2021 में मौत हो चुकी है.
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एक धार्मिक समुदाय से शुरू हुई असाधारण कहानी
इस परिवार की कहानी सिर्फ संख्या की कहानी नहीं है. इसकी शुरुआत 1942 में हुई थी, जब Khuangtuaha ने Lalpa Kohhran Thar नाम के धार्मिक समुदाय की स्थापना की. 1997 में पिता की मृत्यु के बाद Ziona Chana इस समुदाय के प्रमुख बने और उन्हें "Hotupa" यानी नेता कहा जाने लगा. उनके नेतृत्व में यह परिवार और समुदाय दोनों तेजी से बढ़े.साल 2021 में Ziona Chana की मौत हो गई लेकिन आज की तारीख तक ये परिवार एकजुट है और पहले जैसी ही व्यवस्था का पालन कर रहा है.
100 कमरों का ऐसा घर, जो किसी हॉस्टल से कम नहीं
बक्तावंग की पहाड़ियों के बीच बना "Chhuan Thar Run" नाम का चार मंजिला मकान पहली नजर में किसी हॉस्टल या छोटे होटल जैसा लगता है. घर में करीब 100 कमरे हैं और बाहर से आने वाले मेहमानों के लिए अलग गेस्ट हाउस भी बनाया गया था. यही मकान आज मिजोरम के सबसे चर्चित पर्यटन स्थलों में शामिल है. यहां पहुंचने वाले पर्यटक अक्सर यह देखकर हैरान रह जाते हैं कि एक परिवार के लिए इतना विशाल ढांचा कैसे बनाया गया और आज भी उसका इस्तेमाल कैसे हो रहा है. दिलचस्प बात यह है कि घर के अंदर भी एक तय व्यवस्था है.रिपोर्ट्स के मुताबिक, बड़ी उम्र की पत्नियां ऊपर के हिस्से में रहती हैं जबकि कुछ युवा पत्नियां निचली मंजिलों पर रहती थीं. घर के भीतर जिम्मेदारियों का ऐसा बंटवारा है कि इतनी बड़ी आबादी के बावजूद व्यवस्था बिखरती नहीं थी.

India's largest family: भारत की सबसे बड़ी फैमली इसी घर में रहती है.
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इस परिवार की रसोई ही सबसे बड़ा अजूबा है
अगर किसी घर में 10 मेहमान आ जाएं तो रसोई का बजट और मेहनत दोनों बढ़ जाते हैं. लेकिन कल्पना कीजिए उस रसोई की, जहां रोजाना दर्जनों नहीं बल्कि सैकड़ों लोगों के लिए खाना तैयार होता हो.
खाना बनाने के लिए बड़े एल्यूमिनियम के बर्तन, बड़े चूल्हे और टीमवर्क का सहारा लिया जाता है. घर की बहुएं खाना बनाती हैं, बेटियां सफाई और कपड़ों का काम संभालती हैं, जबकि पुरुष खेती, पशुपालन, बढ़ईगिरी और छोटे उद्योगों में लगे रहते हैं. दूसरे शब्दों में कहें तो यह परिवार किसी छोटे गांव की तरह आत्मनिर्भर व्यवस्था पर चलता है.
परिवार ही नहीं, खुद का इकोसिस्टम भी बनाया
इस विशाल परिवार की एक और अनोखी बात यह है कि उसने अपने लिए अलग व्यवस्था खड़ी कर ली है. परिवार अपनी जरूरत की फसल खुद उगाता है. पशुपालन करता है. फर्नीचर बनाने और एल्युमिनियम के बर्तन तैयार करने जैसे काम भी परिवार के सदस्य ही करते हैं. Ziona Chana ने अपने बच्चों के लिए स्कूल तक स्थापित किया था. स्कूल में सरकारी पाठ्यक्रम के साथ समुदाय से जुड़े विषय भी पढ़ाए जाते हैं. यही वजह है कि यह परिवार सिर्फ बड़ा नहीं है, बल्कि काफी हद तक आत्मनिर्भर भी है. यही मॉडल लोगों को सबसे ज्यादा आकर्षित करता है.
गिनीज रिकॉर्ड का मौका मिला, लेकिन खुद ही मना कर दिया
एक दिलचस्प बात ये भी है कि इतने बड़े परिवार के कारण दुनिया भर का मीडिया Ziona Chana के पीछे पड़ गया था. साल 2011 में Guinness World Records की ओर से भी सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई. लेकिन बताया जाता है कि परिवार के मुखिया Ziona Chana ने प्रचार पसंद न होने की वजह से रिकॉर्ड में शामिल होने से इनकार कर दिया. इसके बावजूद World Record Academy, The Wall Street Journal और London World Records ने इस परिवार को दुनिया के सबसे बड़े परिवारों में शामिल किया.
2021 में हुई मृत्यु, लेकिन परिवार आज भी चर्चा में
13 जून 2021 को 75 वर्ष की उम्र में Ziona Chana का निधन हो गया. उस समय उन्हें डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं थीं. Ziona Chana भले ही अब इस दुनिया में नहीं हैं. लेकिन बक्तावंग की पहाड़ियों में बना उनका 100 कमरों वाला घर आज भी आबाद है. सैकड़ों लोग अब भी एक साथ रहते हैं, एक साथ खाना खाते हैं और एक ऐसी परंपरा को जिंदा रखे हुए हैं, जो आधुनिक भारत में तेजी से खत्म होती जा रही है.
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