ज्यादातर लोग सोचते हैं कि कोलन या पेट की दिक्कतें अचानक हो जाती हैं. लेकिन यह सोच सही नहीं है. पेट की दिक्कतें सालों तक नजरअंदाज की गई बायोलॉजी का नतीजा होती हैं. बार-बार एंटीबायोटिक्स लेना, लंबे समय तक पेट में मौजूद एसिड का कम होना, इंफ्लेमेशन, और गट के इकोसिस्टम का कभी पूरी तरह ठीक न होना ये सभी कारण मिलकर धीरे-धीरे पेट की फंक्शनिंग पर बुरा असर डालती हैं.
इन लक्षणों को ना करें इग्नोर-
शुरुआती स्टेज में ये लक्षण अक्सर हल्के दिखते हैं और खतरनाक नहीं लगते. कई लोग इन्हें अनदेखा कर देते हैं. जैसे- एंटीबायोटिक्स लेने के बाद बार-बार लूज मोशन होना, पेट में बार-बार ब्लोटिंग और अर्जेंसी महसूस होना, बिना किसी मेहनत के थकान, और ऐसे लक्षण जो दवाओं से कुछ समय के लिए ठीक हो जाते हैं लेकिन फिर लौट आते हैं. यहां खतरनाक बात यह है कि जब तक स्कैन या टेस्ट कोई रिजल्ट दिखाते हैं, तब तक गट को पहले ही काफी डैमेज पहुंच चुका होता है.
सिर्फ लक्षणों का इलाज करना काफी नहीं-
अक्सर लोग सिर्फ लक्षणों का ट्रीटमेंट करवा लेते हैं, लेकिन पेट की समस्याओं में सिर्फ लक्षणों पर फोकस करके उसका इलाज करवाना अक्सर असफल रहता है. असली कारण को समझना बहुत जरूरी है. पेट की लगातार होने वाली समस्याओं के पीछे अक्सर ये बायोलॉजिकल मैकेनिज्म जिम्मेदार होते हैं- गट में बैक्टीरिया का इंबैलेंस, टॉक्सिन के कारण होने वाली सूजन, पेट की स्पीड में गड़बड़ी और इम्यून सिस्टम का ओवर-एक्टिव होना. अगर कई इलाजों के बाद भी पेट की दिक्कतें बार-बार लौट आती हैं, तो यह इस बात की तरफ इशारा करता है कि आप पेट के मैकेनिज्म को सही तरह से समझ नहीं पा रहे हैं.
कैसे समझें और सुधारें पेट की समस्याओं को-
पेट की हर समस्या खतरनाक नहीं होती, लेकिन लगातार होने वाली समस्याओं को नजरअंदाज करना सही नहीं है. सही बायोलॉजिकल डिकोडिंग करने से न सिर्फ लक्षणों को दूर किया जा सकता है, बल्कि लंबे समय तक अच्छी गट हेल्थ भी हासिल की जा सकती है.
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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