सूरत से सामने आई तुषार घेलानी की मौत की खबर ने पूरे शहर को गहरे सदमे में डाल दिया. जिस घर में 5 फरवरी को बेटी की शादी की खुशियां मनाई जानी थीं, उसी घर में मातम छा गया. सुसाइड की कोशिश के बाद कई दिनों तक अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझते रहे तुषार घेलानी को डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया था. इसके बाद परिवार ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए अंगदान का फैसला लिया. जायडस अस्पताल की ट्रांसप्लांट टीम भी पहुंच गई थी और लिवर समेत अन्य अंग दान की तैयारी चल रही थी.
लेकिन, तभी अचानक हालात बदल गए. तुषार घेलानी को हार्ट अटैक आ गया और दिल की धड़कन बंद हो गई. इसी वजह से लिवर दान संभव नहीं हो सका और केवल आंखों का ही दान किया जा पाया. इस घटना ने एक अहम सवाल खड़ा कर दिया अगर ब्रेन डेड के बाद अंगदान तय था, तो हार्ट अटैक आने के बाद लिवर क्यों नहीं डोनेट हो सका? क्या हार्ट अटैक के बाद लिवर दान बिल्कुल संभव नहीं होता?
ब्रेन डेड क्या होता है?
ब्रेन डेड का मतलब होता है कि व्यक्ति का दिमाग पूरी तरह काम करना बंद कर चुका है और उसके दोबारा सक्रिय होने की कोई संभावना नहीं रहती. इस स्थिति में व्यक्ति को जिंदा सिर्फ मशीनों के सहारे रखा जाता है. दिल की धड़कन, सांस और ब्लड सर्कुलेशन मशीनों की मदद से कुछ समय तक चलता रहता है. इसी सीमित समय में अंगदान की प्रक्रिया पूरी की जाती है.
हर ब्रेन डेड व्यक्ति का हर अंग क्यों नहीं दान हो पाता?
यह एक बहुत आम गलतफहमी है कि ब्रेन डेड घोषित होते ही सभी अंग दान किए जा सकते हैं. सच्चाई यह है कि हर अंग की अपनी मेडिकल शर्तें होती हैं. लिवर, किडनी, हार्ट जैसे अंगों के लिए जरूरी है कि दिल की धड़कन स्थिर हो, ब्लड सर्कुलेशन सही बना रहे, शरीर में ऑक्सीजन सप्लाई लगातार हो.
तुषार घेलानी के मामले में ब्रेन डेड होने के बाद अचानक हार्ट अटैक आ गया. जैसे ही दिल की धड़कन बंद हुई, शरीर के अंदर ब्लड फ्लो रुक गया. ऐसे में लिवर जैसे अंग कुछ ही मिनटों में डैमेज हो जाते हैं और ट्रांसप्लांट के लायक नहीं रहते.
हार्ट अटैक के बाद लिवर डोनेट क्यों नहीं हो पाता?
लिवर एक ऐसा अंग है जिसे लगातार ऑक्सीजन और ब्लड सप्लाई की जरूरत होती है. जैसे ही हार्ट अटैक आता है और दिल की धड़कन बंद होती है, शरीर में ब्लड फ्लो रुक जाता है.
दिल के रुकते ही लिवर तक ऑक्सीजन पहुंचना बंद हो जाता है, कुछ ही मिनटों में लिवर की कोशिकाएं डैमेज होने लगती हैं, लिवर ट्रांसप्लांट के लायक नहीं रहता. इसीलिए हार्ट अटैक यानी कार्डियक डेथ के बाद लिवर डोनेशन लगभग नामुमकिन हो जाता है. यही कारण था कि तुषार घेलानी के मामले में ब्रेन डेड होने के बावजूद हार्ट अटैक आने के बाद लिवर दान नहीं किया जा सका.

क्या हार्ट अटैक के बाद कभी भी लिवर डोनेट नहीं हो सकता?
मेडिकल भाषा में इसे Donation after Cardiac Death (DCD) कहा जाता है. कुछ देशों में खास परिस्थितियों और बेहद सीमित समय में यह संभव हो सकता है, लेकिन भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर, समय की सीमा, अंग की क्वालिटी इन सभी कारणों से हार्ट अटैक के बाद लिवर डोनेशन आमतौर पर नहीं किया जाता. इसलिए भारत में ज्यादातर लिवर ट्रांसप्लांट ब्रेन डेड लेकिन हार्ट बीटिंग डोनर से ही होते हैं.
आंखों का दान कैसे संभव हुआ?
आंखों (कॉर्निया) का दान दिल रुकने के 4 से 6 घंटे के भीतर भी किया जा सकता है. इसके लिए लंबे समय तक ब्लड सर्कुलेशन जरूरी नहीं होता. इसी वजह से तुषार घेलानी के हार्ट अटैक के बाद भी आंखों का सफलतापूर्वक दान किया जा सका.
अंगदान क्यों एक रेस अगेंस्ट टाइम है?
अंगदान सिर्फ इच्छा से नहीं, बल्कि शरीर की मेडिकल स्थिति और समय पर निर्भर करता है. थोड़ी सी देरी, अचानक हार्ट अटैक, इंफेक्शन या ब्लड प्रेशर गिरना इनमें से कोई भी वजह पूरी प्रक्रिया रोक सकती है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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