40 की उम्र पार करते ही हमारे शरीर का मिजाज धीरे-धीरे बदलने लगता है. अक्सर लोग इस उम्र में आकर यह सोचने लगते हैं कि अब तो बुढ़ापे की शुरुआत हो रही है, लेकिन सच तो यह है कि अगर खान-पान पर थोड़ा ध्यान दिया जाए तो आप 60 की उम्र में भी 30 जैसा फुर्तीला महसूस कर सकते हैं. 40 साल के बाद हमारी मांसपेशियों की ताकत घटने लगती है, हड्डियां पहले जैसी मजबूत नहीं रहतीं और मेटाबॉलिज्म यानी खाना पचाने की रफ्तार भी सुस्त पड़ जाती है. ऐसे में अगर हम अपनी डाइट में सही पोषण शामिल नहीं करेंगे, तो आगे चलकर उठने-बैठने तक में परेशानी होने लगेगी.
इस उम्र में शरीर को मुख्य रूप से तीन चीजों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है - प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन डी. ये तीनों मिलकर न सिर्फ हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत रखते हैं, बल्कि दिल की सेहत और शरीर के मेटाबॉलिज्म को भी दुरुस्त बनाए रखते हैं.
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40 के बाद शरीर में क्या बदलाव आते हैं?
जैसे ही कोई व्यक्ति 40 का आंकड़ा पार करता है, शरीर के अंदर कई हार्मोन्स का स्तर ऊपर-नीचे होने लगता है. महिलाओं में मेनोपॉज के करीब पहुंचने पर एस्ट्रोजन हार्मोन कम होने लगता है, जिससे हड्डियां तेजी से खोखली होने लगती हैं. पुरुषों में भी टेस्टोस्टेरोन का लेवल गिरता है, जिससे शरीर में चर्बी बढ़ने लगती है और मसल्स कम होने लगते हैं. इसके अलावा रोजमर्रा की भागदौड़ में फिजिकल एक्टिविटी कम हो जाती है और गलत खान-पान की वजह से शरीर कमजोर पड़ने लगता है.
अगर समय रहते हमने अपनी थाली में जरूरी बदलाव नहीं किए, तो इसका सीधा असर हमारे जीने के तरीके और रोजमर्रा के कामों पर पड़ता है. लेकिन अच्छी बात यह है कि सही खान-पान और हल्की-फुल्की कसरत के जरिए इस असर को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है.
| Vitamin D - कैल्शियम को शरीर में अवशोषित करने के लिए |
| Protein - मांसपेशियों और मेटाबॉलिज्म के लिए |
| Calcium - हड्डियों और दांतों के लिए |
| Vitamin D - कैल्शियम को शरीर में अवशोषित करने के लिए |
मांसपेशियों और मेटाबॉलिज्म के लिए प्रोटीन क्यों जरूरी है?
उम्र बढ़ने के साथ शरीर में प्राकृतिक रूप से मसल्स लॉस होने लगता है, जिसे मेडिकल भाषा में सार्कोपेनिया कहते हैं. 40 के बाद हर दशक में लगभग 3 से 8 फीसदी तक मांसपेशियां कम होने लगती हैं. जब मसल्स घटते हैं, तो शरीर का मेटाबॉलिज्म भी धीमा हो जाता है, जिसका नतीजा यह होता है कि हम थोड़ा सा भी खाते हैं तो वह फैट बनकर पेट और कमर के आसपास जमा होने लगता है.
प्रोटीन मांसपेशियों को दोबारा बनाने और उनकी मरम्मत करने का काम करता है. अगर आप हल्की वॉक या योग भी करते हैं, तो उसके बाद शरीर की रिकवरी के लिए प्रोटीन बेहद जरूरी है.
डाइट में प्रोटीन शामिल करने के बेहतरीन स्त्रोत:
- अंडे का सफेद भाग, जो आसानी से पच जाता है.
- चिकन और मछली, जिनमें लीन प्रोटीन भरपूर मात्रा में होता है.
- शाकाहारी लोगों के लिए दूध, दही और पनीर बेहतरीन विकल्प हैं.
- रोज के खाने में दालें, राजमा, छोले और सोयाबीन शामिल करें.
- मुट्ठी भर बादाम, अखरोट और चिया सीड्स जैसे मेवे.
डाइटिशियन फौजिया अंसारी सलाह देती हैं कि हर किसी के शरीर की जरूरत अलग होती है, इसलिए किसी एक्सपर्ट से मिलकर यह तय करना चाहिए कि रोजाना कितना ग्राम प्रोटीन लेना सही रहेगा.
हड्डियों और दांतों का असली सहारा है कैल्शियम
कैल्शियम का नाम आते ही सबसे पहले हड्डियों और दांतों का खयाल आता है. यह बात सच भी है, क्योंकि हमारे शरीर का 99 फीसदी कैल्शियम हड्डियों और दांतों में ही जमा होता है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि दिल की धड़कन को सामान्य रखने, नसों के सही काम करने और मांसपेशियों के सिकुड़ने-फैलने के लिए भी खून में कैल्शियम का सही स्तर होना जरूरी है.
अगर हम खाने के जरिए पर्याप्त कैल्शियम नहीं लेंगे, तो शरीर अपनी जरूरत पूरी करने के लिए हड्डियों से कैल्शियम खींचना शुरू कर देता है. इसी वजह से 40 के बाद लोगों को घुटनों में कट-कट की आवाज, कमर दर्द और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियां घेर लेती हैं.
कैल्शियम की कमी पूरी करने वाली चीजें:
- रोज एक से दो गिलास ताजा दूध या एक कटोरी घर का जमा दही.
- रागी का आटा, जिसमें गेहूं के मुकाबले कई गुना ज्यादा कैल्शियम होता है.
- सफेद और काले तिल, जिन्हें सलाद या लड्डू बनाकर खाया जा सकता है.
- टोफू और सोया मिल्क.
- हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी और ब्रोकली.
एक बात का हमेशा ध्यान रखें कि बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से कैल्शियम की गोलियां खरीदकर खाना नुकसानदेह हो सकता है, क्योंकि ज्यादा कैल्शियम से पथरी की समस्या हो सकती है.
विटामिन डी के बिना सब बेकार है
आप चाहे जितना मर्जी दूध पी लें या कैल्शियम से भरपूर चीजें खा लें, लेकिन अगर आपके शरीर में विटामिन डी की कमी है, तो शरीर उस कैल्शियम को सोख ही नहीं पाएगा. विटामिन डी एक चाबी की तरह काम करता है, जो आंतों के ताले खोलकर कैल्शियम को खून तक पहुंचाता है.
आजकल की जीवनशैली ऐसी हो गई है कि लोग ज्यादातर समय फ्लैटों, दफ्तरों और बंद कमरों में एसी के नीचे बिताते हैं. सूरज की रोशनी न मिलने से 80 फीसदी से ज्यादा भारतीयों में विटामिन डी की भारी कमी पाई जा रही है. इससे न सिर्फ हड्डियां कमजोर होती हैं, बल्कि इम्यूनिटी भी गिर जाती है और हर वक्त बदन दर्द बना रहता है.
विटामिन डी कैसे हासिल करें:
- सुबह की गुनगुनी धूप में 15 से 20 मिनट बैठना सबसे असरदार तरीका है.
- अंडे की जर्दी यानी पीला वाला हिस्सा खाएं.
- हफ्ते में एक-दो बार सैल्मन या टूना जैसी फैटी फिश लें.
- बाजार में मिलने वाले फोर्टिफाइड दूध और अनाज का इस्तेमाल करें.
अगर जांच में विटामिन डी बहुत कम निकलता है, तो डॉक्टर से पूछकर ही इसके सैशे या कैप्सूल का कोर्स करना चाहिए.
दवाइयों से ज्यादा अपनी थाली पर भरोसा रखें
डाइटिशियन फौजिया अंसारी का कहना है कि 40 साल की उम्र के बाद लोगों का पूरा ध्यान तरह-तरह के सप्लीमेंट्स और महंगी गोलियां खाने पर चला जाता है. लोग सोचते हैं कि एक गोली खा ली तो सारा पोषण मिल गया, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है. गोलियां सिर्फ उस समय के लिए होती हैं जब शरीर में बहुत ज्यादा कमी हो जाए.
लंबी उम्र तक तंदुरुस्त रहने का सबसे सरल नियम यही है कि अपनी रोज की डाइट को संतुलित बनाएं. ताजे फल, हरी सब्जियां, दालें और घर का बना ताजा खाना ही शरीर को असली पोषण देता है. इसके साथ ही दिनभर में खूब पानी पिएं, तनाव से दूर रहें और रोजाना कम से कम आधे घंटे की सैर जरूर करें.
जब खान-पान सही होगा, तो 40 के बाद भी आपका दिल मजबूत रहेगा, हड्डियां मजबूत रहेंगी और आप हर दिन ऊर्जा से भरे रहेंगे.
लेखक के बारे में :
फौज़िया अंसारी एक अनुभवी क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट, डायटीशियन और प्रमाणित डायबिटीज एजुकेटर हैं. उन्होंने फूड साइंस एंड न्यूट्रिशन में स्नातक की डिग्री और डाइटेटिक्स में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा हासिल किया है. वर्तमान में वह अपोलो स्पेक्ट्रा स्पेशियलिटी हॉस्पिटल से जुड़ी हैं और इससे पहले कोहिनूर हॉस्पिटल में दो वर्षों तक कार्य कर चुकी हैं.
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