Hormonal Imbalance in Women: पीरियड्स के शुरू होने से एक-दो दिन पहले पेट में दर्द, मरोड़, गैस, मतली या कभी-कभी दस्त जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं, इसके पीछे की वजह शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव हैं. मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, इन लक्षणों को समझना जरूरी है ताकि समय रहते राहत भी मिल सके और किसी गंभीर समस्या को भी पहचाना जा सके.

प्रोस्टाग्लैंडीन बढ़ने से क्या होता है?
पीरियड्स से पहले शरीर में कुछ खास हार्मोन तेजी से बदलते हैं, इनमें सबसे अहम भूमिका एक केमिकल प्रोस्टाग्लैंडिंस निभाता है. यह गर्भाशय को सिकुड़ने में मदद करता है ताकि पीरियड्स के दौरान उसकी परत बाहर निकल सके. जब इसकी मात्रा ज्यादा हो जाती है, तो इसका असर सिर्फ गर्भाशय तक सीमित नहीं रहता बल्कि आंतों पर भी पड़ता है. इसी वजह से कई महिलाओं को पेट में ऐंठन के साथ-साथ पाचन से जुड़ी समस्याएं भी होने लगती हैं.
एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के उतार-चढ़ाव
एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के स्तर में भी उतार-चढ़ाव होता है, इन बदलावों के कारण शरीर में पानी रुकने लगता है, जिससे पेट फूलना, भारीपन और असहजता महसूस होती है. हालांकि देखा गया है कि ज्यादातर मामलों में ये समस्याएं पीरियड्स शुरू होने के बाद धीरे-धीरे कम हो जाती हैं.
हर बार इन लक्षणों को हल्के में लेना सही नहीं है. अगर दर्द बहुत ज्यादा हो, लंबे समय तक बना रहे या रोजमर्रा के काम करने में दिक्कत आने लगे, तो यह किसी गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है.
पीरियड्स में ज्यादा दर्द हो तो क्या करें?
डॉक्टरों का कहना है कि कुछ संकेत ऐसे होते हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. अगर पीरियड्स के दौरान दर्द इतना बढ़ जाए कि दवा लेने के बाद भी राहत न मिले, बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो या बार-बार उल्टी और दस्त की समस्या हो, तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए.

पीरियड्स के असहनीय दर्द से कैसे छुटकारा पाएं?
कुछ आसान आदतों को अपनाकर इन समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है. नियमित व्यायाम और योग करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और मांसपेशियों की जकड़न कम होती है. पेट के निचले हिस्से पर गर्म पानी की सिकाई करने से दर्द और ऐंठन में आराम मिलता है. फाइबर से भरपूर भोजन जैसे फल, सब्जियां और साबुत अनाज पाचन को बेहतर बनाते हैं. इसके साथ ही पर्याप्त नींद लेना भी जरूरी है. जब शरीर को पूरी तरह आराम मिलता है, तो हार्मोन संतुलित रहते हैं और दर्द की तीव्रता कम हो सकती है.
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