- मकान मालिक किसी किरायेदार को रातों-रात घर खाली नहीं करा सकता है.
- मकान मालिक रोज-रोज धमकी या दबाव बनाए तो क्या करें.
- रेंट एग्रीमेंट बनवाते समय क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए.
शहरों में किराये के मकान में रहने वाले लोगों को अक्सर मकान मालिक (Landlord) की मनमानी का सामना करना पड़ता है. बिना पूर्व सूचना के अचानक किराया बढ़ा देना, तुरंत घर खाली करने का दबाव बनाना या रोज-रोज मकान खाली करने की धमकी देना यह परेशानी आम हो गई है. हालांकि, भारतीय कानून और विभिन्न राज्यों के रेंट कंट्रोल एक्ट (Rent Control Acts) किरायेदारों को ऐसे परेशानियों से सुरक्षा प्रदान करते हैं. इस बारे में हाई कोर्ट के एडवोकेट वरुण दीक्षित ने जानकारी दी है. उन्होंने बताया है कि किरायेदार के पास कानूनी अधिकार होते हैं, ऐसे में उन्हें धमकी देना और दबाव बनाना मकान मालिक को भारी पड़ सकता है.
किरायेदार के पास क्या-क्या अधिकार हैं?
एडवोकेट वरुण दीक्षित ने बताया कि कोई मकान मालिक किसी किरायेदार को रातों-रात या अचानक घर से बाहर नहीं निकाल सकता. जब तक किरायेदार रेंट एग्रीमेंट की शर्तों का पालन कर रहा है और समय पर किराया दे रहा है, तब तक उसे जबर्दस्ती नहीं निकाला जा सकता.
अक्सर मकान मालिक घर खाली कराने के लिए बिजली, पानी या लिफ्ट की सुविधा बंद कर देते हैं. लेकिन ऐसा करना पूरी तरह गैर-कानूनी है. अगर मकान मालिक ऐसा करता है, तो आप रेंट ट्रिब्यूनल (Rent Tribunal) या स्थानीय पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकते हैं.
वरुण दीक्षित ने बताया कि मकान मालिक अपनी मर्जी से जब चाहे किरायेदार के घर में दाखिल नहीं हो सकता. निरीक्षण या किसी काम से आने के लिए उसे कम से कम 24 घंटे पहले सूचना (Notice) देनी होती है. मकान खाली करते समय मकान मालिक को सिक्योरिटी डिपॉजिट की पूरी रकम वापस करनी होती है. वह केवल मकान को हुए नुकसान की वाजिब राशि ही काट सकता है. लेकिन सामान्य टूट-फूट या पेंटिंग के नाम पर मनमाना पैसा काटना गैर-कानूनी है.
मकान मालिक नहीं बढ़ा सकता है मनमाना किराया
एडवोकेट वरुण दीक्षित ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत मॉडल टेनेंसी एक्ट का मुख्य उद्देश्य मकान मालिक और किरायेदार दोनों के अधिकारों को संतुलित और पारदर्शी बनाना है. इसके तहत मकान मालिक रेंट एग्रीमेंट की अवधि के दौरान मनमाने तरीके से किराया नहीं बढ़ा सकता. एग्रीमेंट समाप्त होने पर किराया बढ़ाने के लिए कम से कम 3 महीने पहले लिखित नोटिस देना अनिवार्य है. वहीं रेसिडेंट प्रॉपर्टी के लिए सिक्योरिटी डिपॉजिट ज्यादा से ज्यादा 2 महीने के किराये के बराबर ही लिया जा सकता है.
हालांकि नियम में यह भी है कि वैध नोटिस के बाद भी किरायेदार मकान खाली नहीं करता, तो मकान मालिक दो महीने तक दोगुना और उसके बाद चार गुना किराया वसूलने का दावा कर सकता है.
मकान खाली करने के लिए कितने महीने की मोहलत देना जरूरी
नियम के मुताबिक, सामान्य परिस्थितियों में रेंट एग्रीमेंट के आधार पर मकान मालिक को घर खाली कराने के लिए किरायेदार को कम से कम 1 महीने से लेकर 3 महीने तक का लिखित नोटिस देना होता है. अगर 11 महीने का एग्रीमेंट चल रहा है तो मकान मालिक केवल वैध कारणों जैसे किराया न देना, संपत्ति को नुकसान पहुंचाना अवैध गतिविधियों पर नोटिस दे सकता है. मौखिक रूप से दी गई धमकी या चेतावनी को कानूनी नोटिस नहीं माना जाता है.
मकान मालिक रोज-रोज धमकी या दबाव बनाए तो क्या करें?
यदि मकान मालिक लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा है या घर खाली करने की धमकी दे रहा है. तो मकान मालिक से व्हाट्सएप मैसेज, ईमेल या लेटर के जरिए ही बात करें ताकि आपके पास बातचीत का सबूत रहे. अगर मकान मालिक ताला तोड़ने, सामान फेंकने, गाली-गलौज करने या बिजली-पानी काटने की धमकी दे, तो नजदीकी पुलिस स्टेशन में ' harassment and wrongful restraint' की शिकायत दर्ज कराएं.
आप अपने शहर की रेंट अथॉरिटी में जाकर 'Stay Order' या राहत के लिए अर्जी दे सकते हैं. जब तक मामला रेंट कोर्ट में लंबित रहेगा, मकान मालिक आपको बेदखल नहीं कर सकता. कई बार मकान मालिक घर खाली कराने के लिए किराया लेने से मना कर देते हैं ताकि वे कह सकें कि किरायेदार किराया नहीं दे रहा. ऐसे में किराया ऑनलाइन बैंक ट्रांसफर करें या रजिस्ट्री या मनीऑर्डर से भेजें और उसकी रसीद संभालकर रखें.
रेंट एग्रीमेंट बनवाते समय क्या सावधानियां बरतें?
रेंट एग्रीमेंट किरायेदार का सबसे बड़ा सुरक्षा कवच होता है. एग्रीमेंट साइन करते समय कई बातें जरूर ध्यान में रखें. अगर 11 महीने का रेंट एग्रीमेंट हो रहा है तो शर्ते साफ-साफ लिखी होनी चाहिए. एग्रीमेंट में साफ लिखें कि दोनों पक्षों (मकान मालिक-किरायेदार) में से कोई भी अगर मकान खाली कराना या छोड़ना चाहता है, तो कम से कम 1 या 2 महीने का लिखित नोटिस देना होगा. एग्रीमेंट में स्पष्ट रूप से लिखें कि किराया कब बढ़ेगा और कितने प्रतिशत बढ़ेगा, अगर अवधि के बीच में किराया बढ़ाने की शर्त है तो उसे खारिज करें. बिजली/पानी का बिल सरकारी मीटर रीडिंग के अनुसार होगा या फिक्स, इसका स्पष्ट रूप से लिखा होना जरूरी है. मकान खाली करने के दिन ही डिपॉजिट वापस करने और कटौतियों के नियम को स्पष्ट रूप से लिखवाएं.
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