How Dasheri Got Its Name: मैं बचपन से गर्मियों का इंतजार सिर्फ दशहरी के लिए करता आया हूं. मेरे लिए ये सिर्फ आम नहीं, यादों का डिब्बा है. गर्मी का मौसम आते ही बाजारों में आम की खुशबू फैल जाती है और हर किसी के मन में एक ही ख्याल आता है. आम खाए क्या? आम को फलों का राजा कहा जाता है, लेकिन जब बात दशहरी आम की होती है तो इसका नाम सबसे ऊपर आता है. इसकी मिठास, खुशबू और मुलायम गूदा इसे बाकी आमों से अलग बनाता है. दशहरी का पहला टुकड़ा मुंह में जाते ही जो मिठास घुलती है, वो कहीं और नहीं मिलती. न ज्यादा रेशे, न पानी-पानी. बस मक्खन जैसी मुलायम गुठली और शहद सा मीठा गूदा. इसकी खुशबू इतनी तेज होती है कि किचन से हॉल तक फैल जाए.
उत्तर भारत में खासतौर पर लोग दशहरी आम का बेसब्री से इंतजार करते हैं. लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि दशहरी आम इतना खास क्यों है और इसका नाम दशहरी कैसे पड़ा? आइए जानते हैं इस स्वादिष्ट आम के पीछे छिपी दिलचस्प कहानी.
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क्यों पड़ा आम का नाम दशहरी?
दशहरी आम की जड़ें उत्तर प्रदेश के लखनऊ के पास एक गांव दशहरी से जुड़ी हैं. माना जाता है कि लगभग 200 साल पहले इसी गांव में इस खास आम की पहली बार खेती की गई थी. इसी गांव के नाम पर इसका नाम दशहरी पड़ा. खैर, नाम चाहे जो हो मेरे लिए तो ये गर्मियों का असली किंग है.

स्वाद जो दिल जीत ले
दशहरी आम की सबसे बड़ी खासियत इसका मीठा और रसीला स्वाद है. इसका गूदा इतना मुलायम होता है कि मुंह में जाते ही घुल जाता है. इसमें रेशे बहुत कम होते हैं, जिससे इसे खाना और भी आसान और मजेदार हो जाता है. इसकी खुशबू भी बेहद आकर्षक होती है, जो दूर से ही पहचान में आ जाती है.
गर्मी में ठंडक का एहसास
दशहरी आम न सिर्फ स्वाद में बेहतरीन है, बल्कि शरीर को ठंडक भी देता है. इसमें विटामिन ए, सी और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो शरीर को एनर्जी देते हैं और इम्यूनिटी बढ़ाते हैं. गर्मी के मौसम में यह आपको तरोताजा रखने में मदद करता है.
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दशहरी आम की बनावट - कैसे पहचानें असली दशहरी?
1. आकार और शेप
लंबा-अंडाकार: दशहरी गोल नहीं होता. ये हल्का लंबा और एक तरफ से थोड़ा टेढ़ा होता है. नीचे का हिस्सा तोते की चोंच जैसा मुड़ा हुआ निकलता है. यही इसका सिग्नेचर लुक है.
2. साइज और वजन
मीडियम साइज: 200-300 ग्राम का होता है. न बहुत बड़ा लंगड़ा जैसा, न बहुत छोटा चौसा जैसा. हाथ में फिट आ जाए बस.
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3. छिलका
पतला और हल्का हरा-पीला: कच्चे में हरा, पकने पर हल्का पीला हो जाता है. पूरा पीला नहीं होता जैसे अल्फांसो. छिलका इतना पतला कि उंगली से छील सकते हो. छोटे-छोटे सफेद डॉट्स होते हैं छिलके पर.

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4. गूदा
बिना रेशे का, मक्खन जैसा: ये सबसे बड़ी पहचान है. दशहरी में रेशे बिल्कुल नहीं होते. चाकू चलाओ तो मक्खन की तरह कटता है. रंग गहरा केसरिया-पीला होता है. गुठली पतली और लंबी होती है.
5. खुशबू और स्वाद
तेज मीठी खुशबू: सूंघते ही पता चल जाता है. स्वाद में शहद जैसी मिठास, हल्की सी खटास बिल्कुल नहीं. खाते टाइम मुंह में घुल जाए.
नकली दशहरी से बचने की ट्रिक:
अगर आम एकदम गोल है, छिलका मोटा है, या अंदर रेशे निकल रहे हैं - तो वो दशहरी नहीं है. बहुत दुकानदार तोतापुरी को दशहरी बोलकर बेच देते हैं.
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क्यों है बाजार में इतनी डिमांड?
दशहरी आम की मांग हर साल बहुत ज्यादा रहती है. इसका कारण है इसका यूनिक स्वाद और क्वालिटी. यह आम जल्दी खराब नहीं होता और आसानी से ट्रांसपोर्ट किया जा सकता है. यही वजह है कि यह देश ही नहीं, विदेशों में भी खूब पसंद किया जाता है.
दशहरी आम सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि स्वाद और परंपरा का खूबसूरत मेल है. इसका नाम, इतिहास और बेहतरीन स्वाद इसे खास बनाते हैं. अगर आपने अभी तक दशहरी आम का स्वाद नहीं चखा है, तो इस गर्मी जरूर ट्राई करें.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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