कल यानी 28 अगस्त, शुक्रवार को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा. ये त्योहार भाई-बहन के प्यार का प्रतीक है. इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसकी लंबी उम्र, खुशहाल जीवन की कामना करती है. बदले में भाई भी अपनी बहन की हमेशा रक्षा करने का वादा करता है. हालांकि, राखी बांधने की भी एक सही विधि होती है, साथ ही भाई की कलाई पर राखी बांधते समय कुछ अन्य बातों को ध्यान रखना भी शुभ माना जाता है. आइए ज्योतिषाचार्य से जानते हैं इनके बारे में-
राखी बांधने की सही विधि क्या है?
ज्योतिषाचार्य डॉक्टर गौरव कुमार दीक्षित बताते हैं, राखी की थाली में रोली, अक्षत यानी चावल, दीपक और मिठाई रखें. सबसे पहले भाई को आराम से बैठाएं. इसके बाद उसके माथे पर रोली से तिलक लगाएं और तिलक के ऊपर अक्षत लगाएं.
इसके बाद भाई की कलाई पर राखी बांधें. राखी बांधने के बाद भाई की आरती करें और फिर उसे मिठाई खिलाएं. इसके बाद भाई अपनी बहन को उपहार दे सकता है और उसकी रक्षा करने का वादा करता है.
राखी बांधते समय भाई का मुंह किस दिशा में हो?ज्योतिषाचार्य के अनुसार, बहन जब भाई को राखी बांधे, तो भाई का मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए. साथ ही राखी बंधवाते समय भाई अपने सिर पर कोई छोटा साफ कपड़ा या रूमाल जरूर रखें.
राखी बांधते समय बोलें ये मंत्रराखी बांधते समय बहन इस मंत्र का जाप कर सकती है-
'येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबलः.
तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि, रक्षे माचल माचलः..'
ज्योतिषाचार्य कहते हैं, इस मंत्र के साथ राखी बांधना शुभ माना जाता है. इस दौरान बहन अपने भाई की अच्छी सेहत, लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना करती है.
बहन दूर हो तो कौन बांध सकता है राखी?कई बार बहन किसी वजह से रक्षाबंधन पर भाई के पास नहीं पहुंच पाती. ऐसे में वह भाई को राखी भेज सकती है. ज्योतिषाचार्य के अनुसार, बहन की गैरमौजूदगी में भाई की बेटी या चचेरी बहन उसकी भेजी हुई राखी बांध सकती है.
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