Viral Video: करीब 1 साल पहले मुंबई छोड़कर बेंगलुरु शिफ्ट हुए बिहार के एक लड़के ने सोशल मीडिया पर अपना एक्सपीरियंस शेयर करते हुए नई बहस छेड़ दी है. उसका कहना है कि वो बेंगलुरु नौकरी करने के लिए आया था, लेकिन इस शहर ने उसकी जिंदगी बदल दी है. उसका कहना है कि इस शहर ने ही उसे खुद को खुश रखना सिखाया है, जो वो मुंबई में 3 साल रहकर भी नहीं सीख पाया था.
जिस कंपनी ने 14 बार रिजेक्ट किया, उसी ने दी नौकरी
एक्सेंचर में एनालिस्ट का काम करने वाले आशीष राज ने कहा, 'इस कंपनी में नौकरी पाने के लिए मैंने 14 बार अप्लाई किया था, लेकिल सफलता 15वीं बार जाकर मिली. मेरे लिए वो पल एक सपने के सच होने जैसा था. लगातार रिजेक्शन्स के बाद भी उन्होंने मैंने कोशिश जारी रखी और एक दिन सब्र का फल भी मिल गया. 1 साल पहले जब मैं मुंबई छोड़कर बेंगलुरु शिफ्ट हो रहा था तो यह नहीं पता था कि ये सिटी मुझे इतना कुछ सीखा देगी.'
'अपनी कहानी को इस शहर का हिस्सा बनते देखने की ख्वाहिश'
आशीष ने समझाते हुए कहा, 'खुद से रहना, खुद को संभालना और बिना किसी के कहे हर दिन खुद को जीना. कभी दूर से चमकती बिल्डिंग्स को देखकर सोचता था कि कब मेरी भी कहानी इस शहर का हिस्सा बनेगी. और आज मैं इन्हीं बिल्डिंग्स के बीच खड़ा हूं. एक साल में इस शहर ने बहुत कुछ बदला. मेरी लाइफ, मेरी प्रायोरिटी और मुझे भी. लेकिन मेरे सपने अभी भी अधूरे हैं और मैं अब भी उन्हें पूरा करने की कोशिश में लगा हूं. मुझे यकीन मैं एक दिन जरूर सफल होऊंगा.'
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सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
20 सितंबर को इंस्टाग्राम पर अपलोड किए गए 1 मिनट के इस वीडियो को लोग खूब पसंद कर रहे हैं और कमेंट बॉक्स में आशीष की तारीफ करते हुए लोग उसे आगे बढ़ते रहने के लिए मोटिवेट कर रहे हैं. हालांकि कुछ लोग ऐसे भी ही हैं उसने आशीष की कहानी को अपनी स्टोरी से जोड़ते हुए रिएक्शन्स दे रहे हैं.
एक यूजर ने लिखा, 'भाई मैं भी बिहार से हूं. मुझे यहां रहते हुए 3 साल हो गए हैं. बेंगलुरु आकर मैंने भी सीखा कि कैसे अपने आप को खुश रखना है. यह काफी मुश्किल है, लेकिन नामुमकिन नहीं है.'
दूसरे यूजर ने लिखा, 'जिंदगी बहुत आसान है. हम इसे बहुत मुश्किल बनाने की कोशिश करते हैं. हर चीज में चुनौतियां होती हैं. इसे बहुत आसान बनाना हमारी जिम्मेदारी है. अगर हम अच्छी तैयारी करते हैं तो जिंदगी में आगे बढ़ सकते हैं. एक बार जब आप 50 का आंकड़ा पार कर लेते हैं, तो 100 तक पहुंचना आसान हो जाता है.'
तीसरे यूजर ने लिखा, 'आपकी स्टोरी कुछ-कुछ मेरे जैसी है, लेकिन आपने बहुत खूबसूरती से इसे बताया है. इसे देखकर बस यही कहने का मन करता है- एक बिहारी सब पे भारी.'
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