- अमेरिकी सीनेट में चार रिपब्लिकन नेताओं ने डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ जाकर ईरान युद्ध मुद्दे पर खिलाफ में वोट किया
- वॉर पावर्स एक्ट के तहत ट्रंप की सेना तैनाती की शक्तियों को सीमित करने वाला प्रस्ताव 50-47 वोट से पास हुआ है
- यह प्रस्ताव राष्ट्रपति की सैन्य कार्रवाई की अधिकतम सीमा 60 दिनों तक सीमित करने की मांग करता है
US Iran War and Donald Trump Politics: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उस समय बड़ा झटका लगा, जब उनकी अपनी ही पार्टी के चार नेताओं ने उनके खिलाफ जाकर वोट कर दिया. ईरान युद्ध को लेकर अमेरिकी सीनेट में ऐसा नजारा दिखा है, जिसने वॉशिंगटन की राजनीति में हलचल मचा दी. ट्रंप लगातार ईरान पर सख्त रुख अपनाए हुए हैं, लेकिन अब उनकी पार्टी के नेता भी जंग को लेकर उनके पर कतरने को तैयार हो गए हैं. वे सवाल उठाने लगे हैं कि क्या राष्ट्रपति अपनी शक्तियों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं. पिछले 81 दिनों से जारी इस युद्ध में हजारों लोगों की मौत, अरबों डॉलर का नुकसान और तेल सप्लाई पर संकट ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है.
अमेरिका में क्या हुआ है?
दरअसल मंगलवार को चार रिपब्लिकन नेताओं ने डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ जाकर विपक्षी डेमोक्रेट्स के साथ वोट किया. इसके बाद अमेरिकी सीनेट ईरान युद्ध को खत्म करने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ गई. यह प्रस्ताव वॉर पावर्स एक्ट के तहत ट्रंप की शक्तियों को सीमित करने से जुड़ा है. यह प्रस्ताव 50-47 वोटों से पास हुआ. वहीं तीन अन्य रिपब्लिकन नेता वोटिंग में शामिल नहीं हुए.
केंटकी के सीनेटर रैंड पॉल, मेन की सीनेटर सुसान कॉलिन्स, अलास्का की सीनेटर लिसा मर्कोव्स्की और लुइसियाना के सीनेटर बिल कैसिडी ने ट्रंप के खिलाफ वोट दिया. हालांकि पेंसिल्वेनिया के डेमोक्रेट सीनेटर जॉन फेटरमैन ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया. इस तरह पार्टी लाइन से हटकर हुई वोटिंग को ट्रंप के लिए बड़ा सार्वजनिक झटका माना जा रहा है. अब तक ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप को उनकी पार्टी और समर्थकों का बड़ा समर्थन मिलता रहा है.
डेमोक्रेट्स और ट्रंप के युद्ध की आलोचना करने वालों का कहना है कि यह समय सीमा 1 मई को खत्म हो चुकी थी. हालांकि व्हाइट हाउस का कहना है कि 8 अप्रैल को युद्धविराम की घोषणा के बाद वॉर पावर्स की समय सीमा रुक गई थी. इसका मतलब है कि ट्रंप के पास ईरान के खिलाफ अकेले फैसला लेकर सेना इस्तेमाल करने के लिए कम से कम 40 दिन और हैं. फिलहाल अमेरिकी नौसेना होर्मुज में ईरानी जहाजों की नाकेबंदी में तैनात है.
क्या ट्रंप की शक्ति खतरे में है?
वॉर पावर्स एक्ट को पूरी तरह लागू करने के लिए डेमोक्रेट्स को मुख्य प्रस्ताव अमेरिकी सीनेट और प्रतिनिधि सभा दोनों में दो-तिहाई बहुमत से पास कराना होगा. लेकिन अभी यह मुश्किल माना जा रहा है, क्योंकि दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी को हल्की बढ़त हासिल है. प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन के पास 217 सीटें हैं जबकि डेमोक्रेट्स के पास 212 सीटें हैं. वहीं सीनेट में रिपब्लिकन के पास 53 सीटें और डेमोक्रेट्स के पास 45 सीटें हैं. दो निर्दलीय सीनेटर आमतौर पर डेमोक्रेट्स का समर्थन करते हैं.
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