विज्ञापन

यूक्रेन में अहम मिसाइलों की कमी; MiG-29 से 1970 के दशक के हथियार कर रहा इस्तेमाल, कैसे लड़ेगा युद्ध?

यूक्रेन अब मिसाइलों का इस्तेमाल सोच-समझकर कर रहा है क्योंकि इनका स्टॉक सीमित है. यह कमी इसलिए भी गंभीर है क्योंकि AIM-9 और AIM-120 मिसाइलों का इस्तेमाल यूक्रेन के NASAMS एयर-डिफेंस सिस्टम में भी किया जाता है.

आज ही ट्रंप के दूत यूक्रेन में जेलेंस्की से युद्ध समाप्त करने को लेकर मिलने पहुंचे हैं.
  • यूक्रेन में रूसी ड्रोन और मिसाइलों को मार गिराने के लिए पुरानी R-60 मिसाइलों का पुनः उपयोग किया जा रहा है
  • रूस यूक्रेन में तेज गति वाले गेरान ड्रोन और बैंडेरोल मिसाइलों की संख्या लगातार बढ़ा रहा है
  • यूक्रेन के MiG-29 और F-16 फाइटर जेट्स में मिसाइलों की कमी के कारण सीमित स्टॉक का सावधानीपूर्वक उपयोग हो रहा है

यूक्रेन के पास रूसी ड्रोन और मिसाइलों को मार गिराने के लिए इस्तेमाल होने वाली कुछ अहम मिसाइलों की कमी हो रही है. यूक्रेनी फाइटर जेट अब 1970 के दशक में बनी एक पुरानी मिसाइल का इस्तेमाल कर रहे हैं. इस मिसाइल का नाम R-60 है. जब 2022 में रूस ने यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमला किया था, तब इसे पुराना मान लिया गया था. लेकिन 'यूरो मैदान प्रेस' के अनुसार, अब यूक्रेनी MiG-29 फाइटर जेट इसका फिर से इस्तेमाल कर रहे हैं.

रूस के ड्रोन के लिए भेज रहा लड़ाकू विमान

पुरानी मिसाइलों का इस्तेमाल करने का यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब रूस यूक्रेन में तेजी से चलने वाले और ज्यादा ड्रोन और मिसाइलें भेज रहा है. इनमें गेरान-3, गेरान-4 और गेरान-5 ड्रोन के साथ-साथ बैंडेरोल मिसाइलें भी शामिल हैं. इनमें से कुछ हथियार 700 किमी/घंटा तक की रफ़्तार से चल सकते हैं. इस वजह से जमीन से काम करने वाले एयर डिफेंस सिस्टम और धीमी गति वाले इंटरसेप्टर ड्रोन से इन्हें रोकना मुश्किल हो जाता है.

इसलिए यूक्रेन इन्हें रोकने और नष्ट करने के लिए फाइटर जेट का इस्तेमाल कर रहा है. इसके बेड़े में पश्चिमी देशों में बने F-16 और सोवियत दौर के पुराने MiG-29 शामिल हैं. MiG-29 कई तरह की मिसाइलें ले जा सकता है. इनमें R-60, R-73 और R-27 शामिल हैं. रूस के तेज रफ़्तार ड्रोन पर हमला करने के लिए R-73 मिसाइल को ज्यादा पसंद किया जाता रहा है.

जब 2022 में युद्ध शुरू हुआ, तो यूक्रेन के पास इन मिसाइलों का बड़ा स्टॉक था. माना जाता है कि उसे अपने सहयोगियों से और भी मिसाइलें मिली थीं. लेकिन इनकी सप्लाई सीमित है. मिसाइलों के कुछ हिस्से यूक्रेन में बने थे, जबकि उन्हें रूस में असेंबल किया गया था.

F-16 फाइटर जेट्स के लिए भी मिसाइलों की कमी

यूक्रेन ने R-73 मिसाइलों का इस्तेमाल ऐसे कामों के लिए भी किया है जिनके लिए उन्हें मूल रूप से नहीं बनाया गया था. जब यूक्रेन के सोवियत-युग के ओसा (Osa) सिस्टम के लिए मिसाइलें कम पड़ने लगीं, तो इन्हें कुछ जमीन-आधारित एयर डिफेंस सिस्टम में लगाया गया. कुछ का इस्तेमाल रोबोटिक नावों पर भी किया गया है.

कमी के कारण अब यूक्रेन को पुरानी R-60 मिसाइलों को वापस लाना पड़ रहा है.

पिछले महीने, दुर्घटनाग्रस्त हुए यूक्रेनी MiG-29 के मलबे में एक R-60 मिसाइल देखी गई थी. इस हफ्ते एक वीडियो भी सामने आया जिसमें एक MiG-29 बहुत कम ऊंचाई पर उड़ते हुए R-60 से रूसी बैंडेरोल (Banderol) मिसाइल को मार गिराता हुआ दिख रहा है.

यूक्रेन के F-16 फाइटर जेट्स के लिए भी मिसाइलों की कमी हो रही है, और कुछ पायलट सिर्फ़ जेट में लगी इन-बिल्ट गन के साथ ही मिशन पर जा रहे हैं. यूरो मैदान प्रेस के अनुसार, F-16 आम तौर पर रूसी ड्रोन और क्रूज़ मिसाइलों को मार गिराने के लिए AIM-120 AMRAAM और AIM-9 साइडवाइंडर मिसाइलों का इस्तेमाल करता है.

लेकिन यूक्रेन अब इन मिसाइलों का इस्तेमाल सोच-समझकर कर रहा है क्योंकि इनका स्टॉक सीमित है. यह कमी इसलिए भी गंभीर है क्योंकि AIM-9 और AIM-120 मिसाइलों का इस्तेमाल यूक्रेन के NASAMS एयर-डिफेंस सिस्टम में भी किया जाता है. साथ ही, रूस यूक्रेन में भेजे जाने वाले तेज रफ़्तार ड्रोन की संख्या बढ़ा रहा है. खबरों के मुताबिक, रूस ने जुलाई में लगभग 1,500 जेट-पावर्ड गेरान ड्रोन और अगस्त में करीब 2,500 ड्रोन लॉन्च किए. इन तेज रफ़्तार ड्रोन को मार गिराना भी मुश्किल होता है.

खबरों के अनुसार, जुलाई में इनके इंटरसेप्शन की दर गिरकर लगभग 50% हो गई थी. तब से इसमें सुधार होकर यह 60% से 70% के बीच हो सकती है. यह दर अभी भी उस लगभग 90% इंटरसेप्शन दर से काफी कम है जो यूक्रेन ने धीमी गति वाले गेरान-1 और गेरान-2 ड्रोन के खिलाफ हासिल की थी. RAND के एनालिस्ट माइकल बोहनेर्ट ने कहा, "कोई भी नहीं चाहता कि इंटरसेप्शन की दर 60 या 70 के आसपास हो."

यह भी पढ़ें-

ईरान प्रॉक्सी का इस्तेमाल करके इजरायल पर '7 अक्टूबर' जैसे बड़े हमले की योजना बना रहा है: रिपोर्ट

VIDEO: फ्रांस में बना पहला हिंदू मंदिर; 40 देशों के लोग पहुंचे, 1970 का था संकल्प, देखें तस्वीरें

पाकिस्तान में ‘बॉर्डर' अब देश के बाहर नहीं, अंदर? जिन्ना ने तो ये सपने में नहीं सोचा होगा

अमेरिका के किसी भी हमले का जवाब सख्त और दर्दनाक होगा : ईरानी संसद के स्पीकर गालिबाफ

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Russia Ukraine War, MIG 29, Ukraine Weapons
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com