- पाकिस्तान पंजाब की मुख्यमंत्री ने भारत से ज्यादा पड़ोसी प्रांतों से अधिक खतरा बताया है
- पाकिस्तान के चार प्रांतों में पंजाब जनसंख्या और सत्ता के लिहाज से सबसे प्रभावशाली प्रांत है
- बलूचिस्तान और पीओके के लोग अपने संसाधनों के दुरुपयोग और विकास के अभाव को लेकर पाकिस्तान सरकार से नाराज हैं
आम तौर पर पाकिस्तान की सुरक्षा बहस में भारत-अफगानिस्तान जैसे बाहरी बॉर्डर की बात होती है. लेकिन मरियम नवाज ने पूरा फोकस पंजाब की अपनी प्रांतीय सीमाओं पर डाल दिया. उन्होंने कहा कि पंजाब को पड़ोसी देशों से ज्यादा खतरा अपने पड़ोसी प्रांतों से है. क्या पाकिस्तान के सबसे ताकतवर प्रांत पंजाब को अब अपने ही देश के अंदर से खतरा महसूस हो रहा है?

पाकिस्तान में कितने राज्य?
पाकिस्तान में कुल 4 प्रांत ही हैं. इसमें सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला प्रांत पंजाब है. पाकिस्तान की सत्ता से लेकर फौज के बड़े पदों पर यहीं के लोग काबिज हैं. इसके बाद सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान हैं. इनमें क्षेत्रफल और संसाधनों के हिसाब से सबसे बड़ा बलूचिस्तान है. मगर यहां के भी सारे संसाधनों का इस्तेमाल पंजाब प्रांत के लिए ही किया जाता है. इसी तरह पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर को पाकिस्तान आजाद कश्मीर बताता है मगर उसके सारे संसाधनों का उपयोग भी पंजाब प्रांत ही करता है. यहीं से पाकिस्तान की लड़ाई शुरू होती है. बलूचिस्तान और पीओके के लोग तो खुद को पाकिस्तानी मानते भी नहीं हैं, मगर वहां बगावत इसी बात को लेकर चल रही है कि उनके सभी संसाधनों का उपयोग पंजाब प्रांत के लोगों के लिए किया जाता है और उनके क्षेत्र का विकास नहीं किया जाता. जैसे पीओके में लगभग 3500 मेगावाट बिजली उत्पादन होता है. यहां पैदा होने वाली बिजली पंजाब भेज दी जाती है, और पीओके अंधेरे में डूबा रहता है. यही नहीं यहां से संगमरमर, ग्रेफाइट, कोयला, जिप्सम, बॉक्साइट और नीलम जैसे कीमती रत्नों को भी ढोकर पंजाब लाया जाता है और इसके बदले पीओके को कुछ नहीं मिलता. यहां के घने जंगलों से लकड़ियां भी मनमाने तरीके से पीओके के बाहर भेज दिया जाता है. पीओके इसी कारण आजकल उबल रहा है और अपने हक की लड़ाई लड़ रहा है.

बलूचिस्तान की कहानी
बलूचिस्तान तो खनिज भंडार का गढ़ है. यहां के लोगों की सबसे बड़ी शिकायत ही ये है कि पाकिस्तान की सरकार नाजायज तरीके से उनके खनिज भंडार को दूसरे देशों को बेच रही है और उससे मिले धन को पंजाब में खर्च किया जा रहा है. बलूचिस्तान के लोगों ने तो खुद को आजाद भी घोषित कर रखा है. मगर इसके बावजूद पाकिस्तान सरकार और फौज बलूचिस्तान की बगावत को कुचलने पर आमादा है. पाकिस्तानी फौज बलूचिस्तान के लोगों को जबरन अगवा कर लेती और फिर उन्हें मार दिया जाता है. इसकी गूंज संयुक्त राष्ट्र में भी कई बार सुनाई दी है. वहीं सिंध में भी पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा बढ़ता जा रहा है. सिंध का सबसे बड़ा गुस्सा इस बात पर है कि सिंधु नदी के पानी के बंटवारे में पाकिस्तान की केंद्र सरकार पंजाब को फायदा पहुंचाती है और सिंध को कम पानी देती है. इसके अलावा सिंध में गैस, कोयला और कराची बंदरगाह से मिलने वाले राजस्व पर स्थानीय हक न मिलने से भी जनता में अंसतोष है. इस असंतोष को थामने के लिए सिंध में भी आवाज उठाने वालों को फौज गायब कर देती है.

खैबर पख्तूनख्वा का दर्द
खैबर पख्तूनख्वा अफगानिस्तान से सटा इलाका है. तालिबान से तनातनी बढ़ने के बाद यहां के पश्तूनों को पाकिस्तानी फौज अपना दुश्मन मानने लगी है. रही सही कसर भारत ने पूरी कर दी थी. भारत ने पीओके में चल आतंकवादी ठिकानों को बर्बाद किया तो पाकिस्तानी फौज ने उन्हें खैबर पख्तूनख्वा के इलाके में शिफ्ट कर दिया. हिज्बुल और लश्कर को यहां आतंकवादी कैंप बनाने की इजाजत दे दी गई. इससे इलाके में आतंकवाद बढ़ने लगा. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने यहां भी कई आतंकवादी ठिकानों पर हमले किए. इससे स्थानीय पश्तून इलाके को छोड़कर जाने पर मजबूर हुए. जो रह गए हैं,वो पाकिस्तानी फौज की इस हरकत से नाराज हैं. वहीं इस इलाके के हाइड्रोइलेक्ट्रिसिटी से मिलने वाले मुनाफे का हिस्सा प्रांत को नहीं मिलने से भी नाराजगी है. यहां तक की इस इलाके को जंगलनुमा ही पाकिस्तान सरकार बनाए रखती है और सारा विकास सिर्फ पंजाब प्रांत में किया जाता है.
कैसे पंजाब इतना हावी हो गया
अब पंजाब और बाकी प्रांतों के बीच इतना अंतर आ गया है कि पंजाब के लोग इन्हें जानवर की तरह समझते हैं. मरियम नवाज का ये बयान इसी मानसिकता को दिखाता है. उन्हें लगता है कि भारत की तरफ का कश्मीर, राजस्थान और पंजाब तो उनके जैसे ही विकसित लोग हैं, मगर उनके देश के सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा के लोग निम्न स्तर के हैं. इन लोगों के पंजाब में आने से अपराध बढ़ जाएंगे. कराची के रहने वाले मोहम्मद अली जिन्ना ने पाकिस्तान बनाते समय सोचा भी नहीं होगा कि वो जिस पाकिस्तान को बनाना चाह रहे हैं उस पर धीरे-धीरे पाकिस्तानी पंजाबी कब्जा कर लेंगे.

Photo Credit: AFP
दरअसल, पाकिस्तान जब देश बना तो उसके हिस्से में जो सेना आई उसमें पंजाबी सैनिकों की संख्या सबसे अधिक थी. शुरूआती दौर में पंजाबी नेता तो कम थे लेकिन फौज और अफसर ज्यादातर पंजाब के थे. साल 1955 में पाकिस्तान सरकार ने पश्चिम पाकिस्तान के सभी प्रांतों को मिलाकर एक प्रशासनिक यूनिट बना दी. इससे पूर्वी पाकिस्तान और अन्य छोटे प्रांतों के मुकाबले पंजाब का राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव बढ़ गया. यही बांग्लादेश बनने का कारण बना. तब पूर्वी पाकिस्तान में ऐसे ही लोग अगवा हो रहे थे. महिलाओं-बच्चियों की इज्जत लूटी जा रही थी. परेशान लोग भागकर भारत आ रहे थे. आखिरकार, 1971 के बाद पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश बन गया तो पंजाब जनसंख्या, क्षेत्रफल और अर्थव्यवस्था के लिहाज से सबसे बड़ा और प्रभावी राज्य बन गया. इसके बाद सेना के साथ-साथ राजनीति पर भी पंजाब की पकड़ मजबूत हो गई. फिर बाकी के तीन प्रांतों को धीरे-धीरे और कमजोर किया गया और अब स्थिति ये है कि उन्हें जानवर और अपराधी की तरह देखा जा रहा है.
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