- मंदिर निर्माण का संकल्प सत्तर के दशक में गुरु योगीजी महाराज ने लिया था और यह 2026 में पूरा हुआ
- यह मंदिर पांच शिखरों और दस विशाल गुंबदों सहित पारंपरिक भारतीय वास्तुकला और वैदिक शिल्पशास्त्र पर आधारित है
- प्राण प्रतिष्ठा समारोह में विश्व के चालीस से अधिक देशों से संत और भक्त शामिल हुए और वैदिक मंत्रोच्चार हुआ
फ्रांस की राजधानी पेरिस वैसे तो फैशन के लिए विश्व विख्यात है पर आज ये हिंदू मंदिर के लिए खबरों में है. रविवार को फ्रांस के पहले पारंपरिक हिंदू मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव संपन्न हुआ. इसके साथ ही यह मंदिर अब सभी दर्शनार्थियों और श्रद्धालुओं के लिए खुल गया है. इस अवसर पर यूरोप, आस्ट्रेलिया, अमेरिका, अफ्रीका और एशिया से पधारे संतों-भक्तों के साथ ही विश्व के अनेक गणमान्य अतिथियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही.
एफिल टावर पर दिखा अलग दृश्य
प्राण प्रतिष्ठा विधि से पहले पेरिस शहर में एक भव्य नगर यात्रा का आयोजन किया गया, जिसमें संगीत, कला और भक्तिमय प्रस्तुतियों की छटा बिखरी. पारंपरिक वेशभूषा में सजे नृत्य कलाकारों के साथ 14 सुंदर ढंग से सुसज्जित रथों ने भारत की कलात्मक और आध्यात्मिक परंपराओं को साकार किया. सुंदर ढंग से श्रृंगारित मूर्तियों—हिंदू देवी-देवताओं के दिव्यस्वरूपों—को विश्व मानकों और विशेष मार्गों से होकर ले जाया गया. विश्वविख्यात एफिल टावर व एकोल मिलिटेर होते हुए यह नगर यात्रा प्लास द ला कॉनकॉर्ड पहुंचकर पूर्ण हुई. इस आध्यात्मिक नगर यात्रा से फ्रांस में भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म के प्रेम और सौहार्द्र भावना का एक नए अध्याय का आरम्भ हुआ.

मंदिर में 5 शिखर, 10 विशाल गुंबद
पेरिस में एक भव्य मंदिर के निर्माण का संकल्प गुरु योगीजी महाराज ने वर्ष 1970 में किया था. इसके पश्चात विश्ववंदनीय प्रमुख स्वामी महाराज ने अपनी आध्यात्मिक विदेश यात्रा के दौरान यहां अनेकों बार पुष्पवर्षा कर अपने गुरु के संकल्प को एक आकर प्रदान किया और फ्रांस में सत्संग की नींव रखी. वर्ष 2021 में वरिष्ठ संतों की उपस्थिति में मंदिर का भूमि पूजन हुआ और 2022 में शिलान्यास विधि संपन्न हुई. वर्ष 2026 में मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ.यह मंदिर 5000 वर्गमीटर के क्षेत्र में फैला है. इसके ऊपरी तल में पारंपरिक मंदिर और आधार में सांस्कृतिक केंद्र के रूप में एक सुन्दर हवेली का निर्माण किया गया है. इसके निर्माण में भारत, इटली, ग्रीस और वियतनाम जैसे देशों से प्राप्त संगमरमर तथा ग्वालियर के बलुआ पत्थर का उपयोग किया गया है. इसमें 5 शिखर, 10 विशाल गुंबद, 20 नक्काशीदार स्तंभ, 120 गवाक्ष, 49 चरित्र शिल्प प्रतिमाएं और 4 सुसज्जित छतरियां हैं. मंदिर परिसर में सभागृह, कक्षाएं, खेलकक्ष, प्रदर्शनी स्थल एवं कार्यालय जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं.
देखें वीडियो
Watch: France's first traditional Hindu mandir was inaugurated in Paris/Bussy-Saint-Georges on September 6, 2026, with His Holiness Mahant Swami Maharaj consecrating the sacred murtis and offering prayers for mutual love, religious harmony and global peace.
— IANS (@ians_india) September 6, 2026
A historic Nagar… pic.twitter.com/DE5HICf6Os


भारत और फ्रांस का संगम
आज प्रात: वैदिक मंत्रोच्चार के साथ बीएपीएस अक्षरधाम संस्थान के वर्तमान गुरु परम पूज्य महंतस्वामी महाराज के करकमलों द्वारा प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव विधि संपन्न हुई. इस मंदिर का निर्माण प्राचीन भारतीय वास्तुकला और वैदिक शिल्पशास्त्र के आधार पर किया गया है, जिसमें फ्रांसीसी आधुनिक तकनीक का भी सुंदर सम्मिश्रण देखने को मिलता है. बता दें कि 13 दिनों तक चलने वाले इस मंदिर महोत्सव में सम्मिलित होने के लिए भारत, अमेरिका, कनाडा, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, और इंग्लैंड समेत 40 से भी अधिक देशों से लोग पधारे हैं. प्रातः काल वरिष्ठ संतों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ महापूजा विधि का प्रारंभ किया, जिसमें श्री अक्षरपुरुषोत्तम महाराज, श्री घनश्याम महाराज, श्री राधा-कृष्ण भगवान, श्री सीता-राम भगवान संग श्री लक्ष्मण जी एवं श्री हनुमान जी महाराज, श्री पार्वती-शंकर भगवान संग श्री कार्तिकेय जी एवं श्री गणेश जी महाराज, श्री पद्मावती वेंकटेश्वर भगवान, श्री अय्यप्पा स्वामी जी, श्री नीलकंठवर्णी महाराज (भगवान स्वामिनारायण का स्वररूप) और गुरु परंपरा की मूर्तियों की विधिवत प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई. मूर्ति प्रतिष्ठा के बाद परम पूज्य महंतस्वामी महाराज ने कहा कि सभी धर्मों के बीच आपसी प्रेम-सद्भाव बना रहे, वैश्विक शांति और सभी का कल्याण हो इसके लिए मंदिर में प्रथम प्रार्थना की.
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