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रूस में पुतिन की पार्टी का रिकॉर्ड कब्जा, 450 में से 355 सीटें जीतीं; चुनाव के बीच मॉस्को पर 1600 ड्रोन हमला

प्रारंभिक परिणामों के मुताबिक यूनाइटेड रशिया को ड्यूमा की 450 सीटों में से 355 सीटें मिलने का अनुमान है. 301 सीटों का आंकड़ा संवैधानिक बहुमत के लिए पर्याप्त होता है.

रूस में पुतिन की पार्टी का रिकॉर्ड कब्जा,  450 में से 355 सीटें जीतीं; चुनाव के बीच मॉस्को पर 1600 ड्रोन हमला
यूनाइटेड रशिया 2000 के दशक की शुरुआत से रूस की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभाती रही है और पुतिन लंबे समय से देश की सत्ता के केंद्र में हैं.
  • रूस में पुतिन की पार्टी यूनाइटेड रशिया ने संसदीय चुनाव में 450 में से 355 सीटें जीतकर नया रिकॉर्ड बनाया है
  • यह चुनाव 2022 यूक्रेन युद्ध शुरु होने के बाद पहला संसदीय चुनाव था जिसमें विपक्षी दलों की सीमित भागीदारी रही
  • चुनाव के अंतिम दिन मॉस्को पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले हुए जिनमें कई लोगों की मौत और संपत्ति को नुकसान पहुंचा

रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की समर्थक सत्तारूढ़ पार्टी यूनाइटेड रशिया ने संसदीय चुनाव में रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए 450 सदस्यीय स्टेट ड्यूमा में 355 सीटों पर जीत दर्ज की है. यह आंकड़ा 95 प्रतिशत से अधिक मतों की गिनती के बाद सामने आया प्रारंभिक सीट-वितरण है. इसके साथ ही पार्टी ने 2016 में बनाए अपने 343 सीटों के पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है.

तीन दिन तक चले इस चुनाव को रूस में 2022 में यूक्रेन पर सैन्य अभियान शुरू होने के बाद पहला संसदीय चुनाव माना जा रहा है. चुनाव के दौरान पुतिन और यूक्रेन युद्ध की आलोचना करने वाली प्रमुख राजनीतिक ताकतों की गैरमौजूदगी भी चर्चा में रही. रूस की केंद्रीय चुनाव आयोग की प्रमुख एला पामफिलोवा के मुताबिक, मतदान प्रतिशत 59 फीसदी से अधिक रहा. अंतिम आधिकारिक नतीजे बाद में घोषित किए जाने हैं.

450 में 355 सीटें, 2016 का रिकॉर्ड टूटा

प्रारंभिक परिणामों के मुताबिक, यूनाइटेड रशिया को ड्यूमा की 450 सीटों में से 355 सीटें मिलने का अनुमान है. 301 सीटों का आंकड़ा संवैधानिक बहुमत के लिए पर्याप्त होता है, इसलिए 355 सीटों के साथ पार्टी के पास संविधान में बदलाव से जुड़े मामलों में भी व्यापक संसदीय समर्थन रहेगा. हालांकि सीटों का यह वितरण अभी अंतिम परिणाम नहीं है.

2016 के संसदीय चुनाव में यूनाइटेड रशिया ने 343 सीटें जीती थीं. 2021 में पार्टी के पास 324 सीटें थीं. ताजा प्रारंभिक आंकड़ा इन दोनों आंकड़ों से अधिक है. पार्टी-वार सीटों के मौजूदा प्रारंभिक वितरण में कम्युनिस्ट पार्टी को 40, एलडीपीआर को 25 और न्यू पीपल पार्टी को 20 सीटें मिली हैं.

95.18 प्रतिशत प्रोटोकॉल की प्रक्रिया पूरी होने पर पार्टी-लिस्ट वोट में यूनाइटेड रशिया को 57.83 प्रतिशत वोट मिले थे. कम्युनिस्ट पार्टी 13.81 प्रतिशत, एलडीपीआर 8.98 प्रतिशत और न्यू पीपल पार्टी 7.96 प्रतिशत पर थी.

पुतिन के लिए क्यों अहम है यह चुनाव?

यूनाइटेड रशिया 2000 के दशक की शुरुआत से रूस की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभाती रही है और पुतिन लंबे समय से देश की सत्ता के केंद्र में हैं. मौजूदा चुनाव यूक्रेन युद्ध के बीच हुआ है और इसे रूस की घरेलू राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है. हालांकि चुनावी नतीजों को रूस के राजनीतिक माहौल के संदर्भ में देखना जरूरी है. 

चुनाव से पहले पुतिन और यूक्रेन में जारी युद्ध की आलोचना करने वाले राजनीतिक दलों के लिए चुनावी मैदान सीमित रहा. यूरोन्यूज ने भी रिपोर्ट किया कि पुतिन की आलोचना करने वाली पार्टियां चुनाव में शामिल नहीं थीं.

चुनाव के आखिरी दिन मॉस्को पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला

रूस में मतदान के अंतिम दिन मॉस्को और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले भी हुए. मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन के मुताबिक, रूस ने शनिवार से 1,600 से अधिक ड्रोन को मार गिराने या रोकने का दावा किया, जिनमें करीब 450 मॉस्को की दिशा में थे. 

हमले में मॉस्को क्षेत्र में लोगों की मौत हुई और एक तेल रिफाइनरी को भी नुकसान पहुंचा. अलग-अलग समय पर जारी रिपोर्टों में मृतकों की संख्या बदली है; बाद की समाचार एजेंसी रॉयटर्स रिपोर्ट में यह संख्या तीन बताई गई.

एक ड्रोन के अपार्टमेंट इमारत से टकराने की भी सूचना सामने आई. अधिकारियों के मुताबिक, एक इमारत से करीब 400 लोगों को बाहर निकाला गया. मॉस्को की तेल रिफाइनरी के एक हिस्से को भी नुकसान पहुंचा. सोब्यानिन ने हमले को चुनाव में व्यवधान डालने की कोशिश बताया, जबकि यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन के लंबी दूरी के हमलों का मॉस्को क्षेत्र में महत्वपूर्ण असर पड़ा.

रूस के रक्षा मंत्रालय ने इसके जवाब में कीव में सैन्य ठिकानों पर हमले तेज करने की बात कही. इस तरह चुनाव के आखिरी दिन रूस और यूक्रेन के बीच जारी सैन्य टकराव का असर भी साफ दिखाई दिया.

चुनावी सिस्टम पर साइबर हमलों का दावा

चुनाव के दौरान रूस के केंद्रीय चुनाव आयोग ने साइबर हमलों का भी दावा किया. एला पामफिलोवा के अनुसार, चुनावी प्रक्रिया से जुड़े बुनियादी ढांचे पर 1,000 से अधिक DDoS हमलों की लहरें दर्ज की गईं. उन्होंने कहा कि 120 से अधिक हमले दूरस्थ इलेक्ट्रॉनिक मतदान प्रणाली को निशाना बनाकर किए गए.

पामफिलोवा ने इन हमलों को अत्यधिक पेशेवर और समन्वित समूहों से जुड़ा बताया तथा कहा कि इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े उपकरणों का इस्तेमाल किया गया. हालांकि उन्होंने किसी विशेष पक्ष या देश को इन हमलों का जिम्मेदार नहीं ठहराया. यह अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि अधिकारियों के दावे और स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य एक ही बात नहीं होते.

रूसी अधिकारियों ने देश के सुदूर पूर्व में संचार लाइनों को काटे जाने की घटनाओं का भी उल्लेख किया और इन्हें चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली संभावित तोड़फोड़ से जोड़ा.

अंतिम नतीजे अभी बाकी

फिलहाल 355 सीटों का आंकड़ा प्रारंभिक है. रूस के केंद्रीय चुनाव आयोग के अनुसार 95 प्रतिशत से अधिक मतों की गिनती पूरी हो चुकी थी और अंतिम परिणाम बाद में घोषित किए जाने थे. इसलिए अंतिम सीट-वितरण में कुछ बदलाव संभव है.

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि यूनाइटेड रशिया ने 450 सदस्यीय स्टेट ड्यूमा में रिकॉर्ड संख्या में सीटें हासिल की हैं और 2016 के अपने 343 सीटों के आंकड़े को पार कर लिया है. दूसरी ओर, चुनाव के दौरान विपक्ष की सीमित मौजूदगी, साइबर हमलों के रूसी अधिकारियों के दावे और मतदान के अंतिम दिन मॉस्को पर हुए बड़े ड्रोन हमले ने इस चुनाव को रूस-यूक्रेन युद्ध के व्यापक संदर्भ से जोड़ दिया है.

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