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ब्रिटेन से अलग होने की कगार पर इंग्लैंड का एक छोटा गांव, वजह प्रस्तावित शरणार्थी कैंप

पिडिंगटन की रहने वाली 26 साल की क्रिस्टीना गोवर ने कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि प्रधानमंत्री का ध्यान खींचने के लिए गांव वालों को "इतना बड़ा और बेताब" कदम उठाना पड़ा.

ब्रिटेन से अलग होने की कगार पर इंग्लैंड का एक छोटा गांव, वजह प्रस्तावित शरणार्थी कैंप
पिडिंगटन गांव की पूरे इंग्लैंड में चर्चा है.
  • पिडिंगटन गांव ने प्रस्तावित शरणार्थी कैंप के खिलाफ इंग्लैंड से अलग होने के लिए जनमत संग्रह किया
  • जनमत संग्रह में कुल डाले गए वोटों में से अधिकांश लोगों ने शरणार्थी कैंप के खिलाफ अलगाव के पक्ष में मतदान किया
  • गांव की महिलाओं ने सुरक्षा और आजादी पर संभावित खतरे को लेकर सरकार को पत्र लिखकर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं

पूरे ब्रिटेन में आजकल एक ही गांव की चर्चा है. इस गांव ने एक प्रस्तावित शरणार्थी कैंप के खिलाफ इंग्लैंड के खिलाफ बगावत कर दी है. इस एक गांव के कारण ब्रिटेन में अब शरणार्थी कैंपों पर बहस तेज हो गई है. ऑक्सफ़र्डशायर के एक गांव के लोगों ने UK से अलग होने के लिए एक सांकेतिक जनमत संग्रह में वोट दिया है.

यह विरोध एक पुराने मिलिट्री बेस पर 1,000 से ज्यादा प्रवासियों को बसाये जाने के विरोध में था. बिसेस्टर के पास पिडिंगटन गांव के लोगों ने मंगलवार को होम ऑफिस के उस प्रस्ताव पर वोट दिया, जिसमें पास के MoD बिसेस्टर में 1,256 पुरुष शरण चाहने वालों को बसाने की बात कही गई थी.

यह जनमत संग्रह पैरिश काउंसिल ने आयोजित किया था. कुल 312 वोट डाले गए, जिनमें से 285 लोगों ने अलग होने के पक्ष में, 26 ने विपक्ष में वोट दिया और एक बैलेट पेपर खराब हो गया. कल्चर सेक्रेटरी ने BBC ब्रेकफ़ास्ट को बताया कि सरकार प्रवासियों को बसाने के प्रस्ताव पर दोबारा विचार नहीं करेगी. पिडिंगटन के 350 निवासियों को गांव के हॉल के बाहर रखे एक छोटे से बॉक्स में अपना वोट डालने के लिए बुलाया गया था. नतीजे बताते हुए पैरिश काउंसिल की वाइस चेयर सुज़ाना पार्डेन ने कहा, "हम पिडिंगटन हैं - वह गांव जो दहाड़ता है."

शरणार्थी कैंपों के खिलाफ लोग?

पैरिश काउंसिल के चेयर टिम मैकनेली ने कहा: "यह लोकतंत्र के काम करने का एक उदाहरण है. हम कमजोर स्थिति में इस विलेज हॉल में आए थे. हमारे पास एक हिम्मत भरा विचार था. हमने दुनिया को एक संदेश दिया है."

प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने कहा कि वह गांव वालों की "भावनाओं" को समझते हैं, लेकिन पूरे देश में निष्पक्षता होनी चाहिए. उन्होंने कहा, "एकमात्र उपाय यही है कि शरणार्थियों की संख्या कम की जाए, यानी बॉर्डर पार करने वालों की संख्या कम की जाए. और वे काफी कम भी हुई हैं. वे अब सात साल के निचले स्तर पर हैं. हमने लोगों से वादा किया था कि शरणार्थियों और शरण चाहने वालों को रखने के लिए होटलों का इस्तेमाल बंद करेंगे, और उस वादे को पूरा करना जरूरी है. मुझे लगता है कि ज्यादातर लोग यही कहेंगे कि 'हां, इस पर वाकई अमल होना चाहिए'. इसलिए इसमें मुश्किल फैसले लेने पड़ते हैं. यह पूरे देश में निष्पक्षता की बात है. मैं यह नहीं कह रहा हूं कि देश के किसी एक हिस्से या समुदायों के किसी एक समूह को ही सारा काम करना चाहिए."

गांववालों से बगैर पूछे लिया था निर्णय

शैडो होम सेक्रेटरी क्रिस फिलप ने कहा कि यह वोट सरकार के लिए "चेतावनी" होनी चाहिए. फिलप इस हफ्ते की शुरुआत में गांव गए थे. उन्होंने कहा कि यह "पूरे देश की ओर से एक संदेश" दे रहा है. उन्होंने आगे कहा, "पूरा देश इस बात से परेशान है कि अवैध प्रवासियों को हमारे देश में आने और रहने की इजाज़त दी जा रही है, चाहे वह होटल हों, फ़्लैट हों या मिलिट्री साइट्स." कल्चर सेक्रेटरी लिसा नैंडी ने कहा कि MoD बिसेस्टर प्लान पर दोबारा विचार करना सही नहीं होगा. उन्होंने कहा, "इसका दूसरा विकल्प यह होगा कि उन समुदायों से और ज्यादा बोझ उठाने के लिए कहा जाए जिनकी आबादी पहले ही चार गुना बढ़ चुकी है - और मुझे लगता है कि यह बहुत गलत है."

नैंडी ने कहा कि पिडिंगटन का मामला "असल में" कोई अनोखी बात नहीं है. उन्होंने आगे कहा, "मेरे चुनाव क्षेत्र में भी कुछ ऐसी सड़कें हैं जहां समुदायों के साथ ऐसा ही हुआ है. मैं सच में समझती हूं कि जब ऐसे बदलाव किए जाते हैं जिनका असर आपके समुदाय पर पड़ता है, तो यह बहुत परेशान करने वाला हो सकता है. हमें बहुत बड़ी संख्या में पेंडिंग पड़े असाइलम (शरण) के मामले विरासत में मिले थे; हम दावों पर बहुत तेजी से काम कर रहे हैं और उन लोगों को हटा रहे हैं जिन्हें यहां रहने का अधिकार नहीं है. हमारी कार्रवाई की वजह से, कई सालों में पहली बार इस गर्मी में छोटी नावों से आने वालों की संख्या में कमी आई है."

महिलाएं बहुत ज्यादा नाराज

गांव की महिलाओं ने कहा कि अगर ये योजनाएं आगे बढ़ती हैं, तो हमारी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी. 130 से ज्यादा महिला निवासियों ने अपनी चिंताएं बताने के लिए हर महिला सांसद को पत्र लिखा है. उन्होंने कहा, "एक महिला होने के नाते, आप समझेंगी कि इससे हमें कितना गंभीर खतरा हो सकता है. हमारी सुरक्षा और हमारी आजादी खतरे में पड़ जाएगी. हमें अपनी सड़कों पर चलने में भी सुरक्षित महसूस नहीं होगा." 

स्थानीय नेताओं और चैरिटी संस्थाओं ने कहा है कि वे सरकार के प्रस्तावों को देखकर "हैरान" हैं और यह जगह इस तरह के इस्तेमाल के लिए सही नहीं है. ऑक्सफ़ोर्डशायर की चैरिटी संस्था 'असाइलम वेलकम' की हरि रीड ने कहा, "वे [शरण चाहने वाले] उस तरह की मदद से दूर हो जाएंगे जिसकी उन्हें आम तौर पर जरूरत होती है, और इससे उन सार्वजनिक सेवाओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा जो उनकी मदद के लिए बनी हैं."

पिडिंगटन की रहने वाली 26 साल की क्रिस्टीना गोवर ने कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि प्रधानमंत्री का ध्यान खींचने के लिए गांव वालों को "इतना बड़ा और बेताब" कदम उठाना पड़ा. उन्होंने यह भी कहा कि अगर प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर बातचीत के लिए उनके साथ चाय पीना चाहें, तो उनका स्वागत है. उन्होंने कहा, "ऐसी चीजें टीवी पर या 10 डाउनिंग स्ट्रीट के सामने तो दिखती हैं, लेकिन ऑक्सफ़ोर्डशायर के बीच बसे छोटे से पिडिंगटन गांव में नहीं. यह बात अजीब लग सकती है, लेकिन मुझे लगता है कि यह पूरे यूके के लिए एक मिसाल है. पिडिंगटन के लोगों को इस बात पर गर्व है कि वे इतना अनोखा, हटकर और असरदार काम कर पाए."

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