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ईरान में अमेरिका की तरफ से युद्ध अपराध करने के ठोस आधार: UN फैक्ट-फाइंडिंग मिशन

ईरान पर फैक्ट-फाइंडिंग मिशन में स्वतंत्र विशेषज्ञ शामिल हैं और इसकी अध्यक्षता बांग्लादेश की कानूनविद सारा हुसैन कर रही हैं. इसे 2022 में संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष मानवाधिकार संस्था, 'मानवाधिकार परिषद' ने बनाया था.

ईरान में अमेरिका ने एक स्कूल पर हमला कर दिया था, मगर इसे माना नहीं. अब यूएन की एक संस्था ने कहा है कि अमेरिका के इस कार्रवाई को मानने के ठोस आधार हैं. इस हमले में कई बच्चों की मौत हो गई थी.
  • UN फैक्ट-फाइंडिंग मिशन को ईरान में हुए दो मिलिट्री हमलों में अमेरिका के युद्ध अपराध करने के ठोस सबूत मिले
  • मिनाब के एक स्कूल और स्पोर्ट्स फैसिलिटी पर अमेरिकी हमलों में कम से कम 178 आम नागरिक मारे जाने की पुष्टि हुई है
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरानी सुरक्षा बलों ने भी बड़े पैमाने पर हत्याएं कीं और मानवाधिकार उल्लंघन किए हैं

अमेरिका पर संयुक्त राष्ट्र (UN) की ही एक एजेंसी ने गंभीर आरोप लगाए हैं. ईरान पर UN के एक फैक्ट-फाइंडिंग मिशन ने कहा है कि इस बात पर यकीन करने के ठोस आधार हैं कि फरवरी में ईरान में एक स्कूल और स्पोर्ट्स फैसिलिटी पर हुए दो मिलिट्री हमलों के पीछे अमेरिका का हाथ था, और ये हमले वॉर क्राइम (युद्ध अपराध) की श्रेणी में आते हैं. मिशन ने यह भी पाया कि ईरानी अधिकारियों ने सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के खिलाफ अपनी हिंसक कार्रवाई के दौरान मानवता के खिलाफ अपराध किए.

किन मामलों में जांच हुई

ईरान पर स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय फैक्ट-फाइंडिंग मिशन की ये रिपोर्ट जिनेवा में UN मानवाधिकार परिषद को सौंपी जाएगी. इसमें फरवरी में शुरू हुए ईरान युद्ध के दौरान अमेरिका के व्यवहार और दिसंबर के आखिर में शुरू हुए देशव्यापी अशांति पर ईरानी सरकार की प्रतिक्रिया की जांच की गई है.

संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष मानवाधिकार संस्था द्वारा नियुक्त मानवाधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि उन्हें यह मानने के लिए "ठोस आधार" मिले हैं कि अमेरिका ने ईरान में दो हमलों में युद्ध अपराध किए हैं, जिनमें दक्षिणी शहर मिनाब के एक स्कूल पर किया गया हमला भी शामिल है.

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अमेरिका कैसे फंसा 

ईरान पर अंतरराष्ट्रीय फैक्ट-फाइंडिंग मिशन का कहना है कि ये निष्कर्ष दो हवाई हमलों पर केंद्रित हैं, जिनमें महिलाओं और बच्चों सहित कम से कम 178 आम नागरिक मारे गए थे. एसोसिएटेड प्रेस की जांच के अनुसार, फरवरी में ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध की शुरुआत में, कम से कम एक अमेरिकी मिसाइल मिनाब के शजरे तैय्यबेह स्कूल पर गिरी थी. इस घटना का कोई अंतिम ब्योरा नहीं मिला है. ईरानी सरकारी मीडिया ने कहा है कि हमले में 168 लोग मारे गए थे, जिनमें से अधिकांश बच्चे थे. फैक्ट-फाइंडिंग टीम ने एक बयान में कहा, "28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद, मिशन को यह मानने के लिए ठोस आधार मिले कि अमेरिका ने अंधाधुंध हमले करके युद्ध अपराध किया, जिसके परिणामस्वरूप आम नागरिकों की जान गई या वे घायल हुए या नागरिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचा."

ट्रंप प्रशासन ने अभी तक स्कूल पर हुए बम हमले की जिम्मेदारी सीधे तौर पर स्वीकार नहीं की है और न ही पेंटागन की जांच के नतीजे जारी किए हैं. संयुक्त राष्ट्र समर्थित टीम ने बताया कि इसमें 22 आम नागरिक (पुरुष और महिलाएं) मारे गए. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने लामर्ड पर हुए हमले की जिम्मेदारी लेने से इनकार किया है. 
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ईरान ने भी बड़े पैमाने पर की हत्याएं

UN फैक्ट-फाइंडिंग टीम ने यह भी कहा कि ईरान में सरकारी सुरक्षा बलों द्वारा "बहुत बड़े पैमाने पर" हत्याएं की गईं और ईरानी सरकार पर मानवता के खिलाफ अपराध करने का आरोप लगाया. इसमें कहा गया है कि आम नागरिक "अपनी ही सरकार द्वारा किए जा रहे मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन और मानवता के खिलाफ अपराधों, तथा अमेरिका और इजरायल के साथ देश के घातक संघर्ष" के बीच फंसे हुए हैं. ईरान पर फैक्ट-फाइंडिंग मिशन में स्वतंत्र विशेषज्ञ शामिल हैं और इसकी अध्यक्षता बांग्लादेश की कानूनविद सारा हुसैन कर रही हैं. इसे 2022 में संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष मानवाधिकार संस्था, 'मानवाधिकार परिषद' ने बनाया था.

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