ईरान और अमेरिका के बीच फिर से 60 दिनों के सीजफायर होने की पूरी संभावना है. रिपोर्ट्स में दावा है कि फिर से सीजफायर का ऐलान किसी भी वक्त हो सकता है. दावा ये भी है कि अभी पूरी तरह से युद्धविराम में समय लग सकता है. हालांकि, इस बार के सीजफायर में ईरानी तेल की बिक्री और होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर सहमति बन सकती है. ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर 60 दिनों के अंदर सहमति बनाने पर चर्चा होगी. एक्सियोस ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि 60 सीजफायर के दौरान, महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य बिना किसी शुल्क के खुल जाएगा और ईरान जलमार्ग में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटा देगा. इससे जहाजों का आवागमन सुरक्षित हो जाएगा.

अमेरिका क्या करेगा इसके बदले
इसके बदले में अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकाबंदी हटाएगा और ईरानी तेल की बिक्री की अनुमति देने के लिए कुछ प्रतिबंधों में ढील देगा. इसके अलावा, एक्सियोस के अनुसार, अमेरिका से 60 दिनों की अवधि के दौरान ईरानी की फ्रीज संपत्तियों पर लगे प्रतिबंधों को हटाने और उन्हें मुक्त करने की भी उम्मीद की जाएगी.एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, समझौते में ईरान से यह प्रतिबद्धता मांगी गई है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, यूरेनियम संवर्धन रोकेगा और अपने पास मौजूद अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को हटाएगा.
मार्को रूबियो के बयान से अटकलें तेज
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत की चार दिवसीय यात्रा के दौरान कहा कि रविवार को ईरान के साथ समझौते की घोषणा संभव है. रुबियो ने नई दिल्ली में पत्रकारों से कहा, "मुझे लगता है कि अगले कुछ घंटों में दुनिया को कुछ अच्छी खबर मिल सकती है." उनका यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के कुछ घंटों बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि मध्य पूर्व युद्ध को समाप्त करने के प्रस्ताव पर काफी हद तक बातचीत पूरी हो चुकी है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समझौता अभी भी "अंतिम रूप दिए जाने के अधीन" है, जबकि न्यूयॉर्क टाइम्स ने रिपोर्ट किया कि दोनों पक्ष ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े जटिल मुद्दों पर प्रारंभिक समझौते के बाद ही चर्चा करेंगे.
रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा प्रस्ताव में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि तेहरान परमाणु हथियार बनाने के लिए आवश्यक ईंधन के अपने भंडार को कैसे छोड़ेगा? ये एक ऐसा मुद्दा है, जिसपर दोनों देशों के गहरे मतभेद हैं.

परमाणु कार्यक्रम ही बचा अब मुद्दा
ईरानी अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया है कि दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं और परमाणु कार्यक्रम पर विवाद प्रारंभिक बातचीत का हिस्सा नहीं होगा. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने पहले वाशिंगटन के साथ "मेल-मिलाप की दिशा में रुझान" का जिक्र किया था, लेकिन साथ ही कहा था कि "इसका यह मतलब नहीं है कि हम और संयुक्त राज्य अमेरिका महत्वपूर्ण मुद्दों पर किसी समझौते पर पहुंच जाएंगे". उन्होंने सरकारी टेलीविजन पर कहा, "हमारा इरादा पहले एक समझौता ज्ञापन, एक तरह का ढांचागत समझौता तैयार करना था."
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि वह "बहुत जल्द" वार्ता के एक और दौर की मेजबानी करने की उम्मीद कर रहे हैं.

Photo Credit: Shehbaz Sharif/X
तो इसलिए चल रही धमकी-धमकी
दोनों पक्ष एक-दूसरे को लगातार धमकी दे रहे हैं कि अगर तनाव बढ़ता है तो वे कार्रवाई करेंगे. ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर वाशिंगटन ने दुश्मनी फिर से शुरू की तो उसे कड़ी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में नए हमलों की संभावना जताई गई थी. गालिबाफ ने कहा, "युद्धविराम की अवधि के दौरान हमारी सशस्त्र सेनाओं ने खुद को इस तरह से पुनर्गठित किया है कि अगर ट्रंप एक और मूर्खतापूर्ण कार्य करते हैं और युद्ध को फिर से शुरू करते हैं, तो यह निश्चित रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए युद्ध के पहले दिन की तुलना में कहीं अधिक विनाशकारी और कड़वा होगा." वहीं ट्रंप तो हर दूसरे दिन धमकी देते ही हैं. दरअसल, अमेरिका की कोशिश ये है कि ईरान परमाणु कार्यक्रम छोड़ दे तो ईरान चाहता है कि ऐसा होने से पहले अमेरिका उस पर लगे सभी प्रतिबंध हटा दे. अब 60 दिनों के सीजफायर के जरिए बीच का रास्ता खोल दिया गया है. जिससे दोनों पक्ष स्थाई समझौते से पहले अपने-अपने वादे पूरे कर सकें.
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