अमेरिका और ईरान के बीच आज (रविवार) शांति समझौता होने की उम्मीद जताई जा रही है. इस समझौते को लेकर शनिवार रात ही अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान भी दिया था. उन्होंने कहा था कि रविवार को समझौता होते ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर सभी के लिए खुल जाएगा. आपको बता दें कि ईरान-अमेरिका के बीच होने वाले इस समझौते पर दुनिया भर की निगाहें टिकी हैं. इन सब के बीच अब खबर आ रही है कि इस संभावित समझौते के दावे के बीच इजरायल ने बेरूत पर एक बड़ा हमला किया है. इजरायल के इस हमले के बाद ये सवाल खड़ा होने लगा है कि क्या इस हमले का असर क्या कुछ घंटे बाद होने वाले समझौते पर पड़ सकता है?
תקפנו בדאחייה בביירות מטרות טרור של ארגון הטרור חיזבאללה. ישראל לא תסבול ירי לשטחה pic.twitter.com/wVARFCkDQe
— Benjamin Netanyahu - בנימין נתניהו (@netanyahu) June 14, 2026
हमले को इजरायल ने आत्मरक्षा में उठाया गया कदम बताया
हालांकि, इजरायल ने अपने इस हमले अपनी आत्मरक्षा में उठाया गया कदम बताया है. इजरायल की सेना की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि बेरूत पर किए गए इस हमले में हिज्बुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाया गया है. इजरायल ने अपने इस हमले को हिज्बुल्लाह पर अपनी जवाबी कार्रवाई भी बताया है. इजरायल ने कहा कि हमारा ये हमला हिज्बुल्ला की तरफ से रविवार सुबह किए गए हमले का जवाब है. इजरायल के पीएम बेंजमिन नेतन्याहू ने भी इस हमले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि हमने बेरूत में हिज्बुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाया है. इजरायल कभी भी अपने ऊपर हुए हमले को यूं ही नहीं जाने देगा. हम इसका जवाब देते रहेंगे.
ट्रंप ने किया है समझौते का दावा
आपको बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि रविवार (14 जून 2026) को ईरान और अमेरिका के बीच एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर होने जा रहे हैं. ट्रंप के मुताबिक, इस समझौते के लागू होते ही रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हॉर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोल दिया जाएगा. हालांकि, दूसरी तरफ से आ रहे बयान कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं. ईरान ने फिलहाल रविवार को किसी भी तरह के समझौते पर दस्तखत करने से साफ इनकार कर दिया है, जिससे इस डील के समय और इसकी शर्तों को लेकर सस्पेंस गहरा गया है. सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, जहां एक तरफ व्हाइट हाउस इस डील को लेकर बेहद उत्साहित है, वहीं ईरान का रुख अभी भी कड़ा बना हुआ है. दोनों देशों के बयानों में दिख रहा यह अंतर साफ करता है कि पर्दे के पीछे अभी भी कई मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है.
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