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This Article is From Nov 10, 2025

बरेली हिंसा के दो आरोपियों को हाई कोर्ट से भी राहत नहीं, याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा...

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बरेली हिंसा के दौरान जुलूस निकालने और आपत्तिजनक नारा लगाने के दो आरोपियों को गिरफ्तारी से राहत देने से इनकार कर दिया है. अदालत ने कहा कि इस मामले में और विवेचना की जरूरत है.

बरेली हिंसा के दो आरोपियों को हाई कोर्ट से भी राहत नहीं, याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा...
प्रयागराज:

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बरेली हिंसा के दो आरोपियों को गिरफ्तारी से राहत देने से इनकार कर दिया है. इन दोनों आरोपियों पर बरेली हिंसा में जुलूस निकालने के दौरान आपत्तिजनक नारा लगाने का आरोप है. कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर हैं.इसमें विवेचना की जरूरत है.एफआईआर रद्द करने का कोई आधार नहीं है. यह कहकर अदालत ने दोनों आरोपियों की याचिका खारिज कर दी.बरेली हिंसा में कई आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचे हैं. इसके लिए अलग-अलग याचिकाएं इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल हुई हैं. जस्टिस अजय भनोट और जस्टिस गरिमा प्रसाद की डबल बेंच में हुई सुनवाई.

किन आरोपियों की याचिका हुई खारिज 

गौहर खान और शाकिब जमाल खान के इन दोनों आरोपियों के खिलाफ बरेली के कैंट थाने में एफआईआर दर्ज है.इन दोनो के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 115(2), 132, 190, 191(2), 223, 351(3) में एफआईआर दर्ज कराई गई है.   

दोनों आरोपियों ने गिरफ्तारी से राहत देने और दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए याचिका लगाई थी,  जमानत और ए जमानत के लिए इन आरोपियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण ली थी. लेकिन अदालत ने हिंसा के दो आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है. दोनों आरोपियों ने जमानत के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी.सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों आरोपियों को राहत देने से इनकार कर दिया. 

आरोपियों की दलील क्या है

दोनों आरोपियों ने अपनी याचिका में राज्य सरकार, बरेली एसएसपी, कैंट पुलिस स्टेशन के एसएचओ और रोहित तोमर को प्रतिवादी बनाया था.आरोपियों की तरफ से अधिवक्ता अखिलेश कुमार द्विवेदी ने कोर्ट में दलील दी कि याची घटना में शामिल नहीं थे. उनका कहना था कि दोनों को बाद में झूठा फंसाया गया है.वहीं सरकारी वकील एजीए पारितोष कुमार मालवीय ने दलील दी कि याचियों पर गंभीर आरोप हैं.उनका कहना था कि याचियों ने न सिर्फ पुलिस पर हमला किया बल्कि शांति भंग करने और सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने का प्रयास भी किया.

आपको बता दें कि 26 सितंबर को आईएमसी के मौलाना तौकीर रजा के आह्वान पर बरेली के इस्लामिया कॉलेज ग्राउंड पर प्रदर्शन करने के लिए जुलूस निकाला गया था.हिंसा मामले में तौकीर रजा और उनके कई सहयोगी भी गिरफ्तार हुए हैं. हिंसा में शामिल फरार कई आरोपियों पर पुलिस ने 15 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया है. 
जुलूस में शामिल लोगों ने टसर तन से जुदाट जैसे आपत्तिजनक नारे लगाए थे.इस दौरान पुलिस ने उनको रोका तो भीड़ हमलावर हो गई और पुलिसकर्मियों से मारपीट की गई.

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