- उत्तर प्रदेश में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है.
- याचिका में कहा गया है कि चार हफ्ते में एसआईआर कराना प्रशासनिक रूप से असंभव है और इससे बड़ी गलतियों का खतरा है.
- याचिका में पुनरीक्षण प्रक्रिया की समय सीमा को तीन महीने तक बढ़ाने का आग्रह किया गया है.
उत्तर प्रदेश में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (एसआईआर) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. भारतीय किसान यूनियन आज़ाद ट्रस्ट की और से SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है. याचिका में कहा गया है कि यूपी में 4 हफ्ते में SIR कराना प्रशासनिक रूप से असंभव है. 15.35 करोड़ मतदाताओं के लिए इतनी तंगी में प्रक्रिया चलाने से बड़े पैमाने पर गलती होने का खतरा है. याचिका में सप्ताह की समयसीमा को व्यावहारिक तौर पर असंभव बताया गया है.
SIR प्रक्रिया को 3 महीने तक बढ़ाने का आग्रह
याचिका में कहा गया है कि इतनी जल्दबाज़ी ग्रामीण इलाक़ों में सही सत्यापन को असंभव बना देगी. याचिका में सुप्रीम कोर्ट से पूरी SIR प्रक्रिया को 3 महीने तक बढ़ाने का आग्रह किया गया है. कहा गया है कि सही, सटीक और निष्पक्ष वोटर-लिस्ट सुनिश्चित करना संवैधानिक ज़रूरत है.
बता दें देशभर के 12 राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) चल रहा है. उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने एसआईआर कार्यक्रम को बताया था कि इस अभियान का मूल उद्देश्य राज्यभर की मतदाता सूची को सही और त्रुटिरहित बनाना है. विशेष गहन पुनरीक्षण का पहला चरण 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक चल रहा है. इस चरण में बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) घर-घर जाकर मतदाताओं को गणना फॉर्म उपलब्ध करा रहे हैं.
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