देश का सबसे साफ शहर, इंदौर हाल के वर्षों की अपनी सबसे गंभीर नागरिक और जनस्वास्थ्य विफलताओं में से एक का सामना कर रहा है. शहर के भागीरथपुरा और आसपास के इलाकों में दूषित पेयजल पीने से अब तक कम से कम 20 लोगों की मौत हो चुकी है और 3,200 से अधिक लोग बीमार पड़ चुके हैं. कई मरीज अभी भी आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं और अस्पतालों में लगातार नए मरीज भर्ती हो रहे हैं, जिससे साफ है कि यह संकट अभी टला नहीं है.
केवल गुरुवार को ही 10 मरीजों को आईसीयू में शिफ्ट किया गया, जबकि अब तक कुल 446 लोग अस्पताल में भर्ती किए जा चुके हैं, जिनमें से 50 का इलाज अभी जारी है. दूषित पानी का डर अभी भी खत्म नहीं हुआ है और लोग पीने के पानी जैसी बुनियादी जरूरत को लेकर भी भय और अनिश्चितता में जी रहे हैं.
इस त्रासदी को और भी गंभीर बनाने वाली बात यह है कि पिछले पांच वर्षों में इंदौर की जल आपूर्ति और स्वच्छता व्यवस्था पर सरकारी तिजोरी से खर्च बढ़ता गया है. इंदौर नगर निगम अपने कुल बजट का लगभग 25 से 30 प्रतिशत हिस्सा पानी और स्वच्छता पर खर्च करता है. यह खर्च 2021-22 में 1,680 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में प्रस्तावित 2,450 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि इसी अवधि में निगम का कुल बजट 5,135 करोड़ रुपये से बढ़कर 8,200 करोड़ रुपये से अधिक हो गया.
इसके अलावा एशियन डेवलपमेंट बैंक, अमृत योजना और स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत भी हजारों करोड़ रुपये जल आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने और 24 घंटे सुरक्षित पानी उपलब्ध कराने के लिए खर्च किए गए हैं. इसके बावजूद दूषित पानी शहर की पाइपलाइनों में घुसा और हजारों घरों तक पहुंचा. इससे प्रशासन, निगरानी व्यवस्था और संस्थागत ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया ने प्रधानमंत्री को सौंपे गए ज्ञापन में इस घटना को “जनस्वास्थ्य आपातकाल” करार दिया है और शहर के सभी नागरिकों के लिए 24×7 सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल सुनिश्चित करने की मांग की है. साथ ही संगठन ने जल स्रोत से लेकर वितरण तक पूरी जल आपूर्ति प्रणाली के समग्र पुनर्गठन की मांग की है. संगठन ने चेतावनी दी है कि केवल तात्कालिक मरम्मत और दिखावटी उपायों से भविष्य में ऐसी त्रासदियों को नहीं रोका जा सकेगा, जब तक कि व्यवस्थागत खामियों को दूर नहीं किया जाता.
यह संकट अब कानूनी मोर्चे पर भी पहुंच गया है. भगीरथपुरा निवासी रामू सिंह ने दूषित पानी से हुई मौतों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग करते हुए याचिका दायर की है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि लोग पिछले दो वर्षों से दूषित पानी पी रहे थे. याचिका में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने और जांच पूरी होने तक सभी जिम्मेदार अधिकारियों को उनके पदों से हटाने की मांग की गई है, ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके.
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