Penny Stocks Investment Tips: शेयर बाजार में कदम रखते ही नए निवेशकों की नजर सबसे पहले उन शेयरों पर पड़ती है, जिनकी कीमत बेहद कम यानी जो 1 से 10 रुपये के बीच होती है. इसे देखकर मन में सीधा गणित चलता है कि 5 का शेयर 10 का हुआ, तो पैसा दोगुना हो जाएगा लेकिन पेनी स्टॉक्स का यह लालच जितना आकर्षक दिखता है, उसके पीछे का जोखिम उतना ही गहरा होता है.
कम कीमत का मतलब हमेशा सस्ता शेयर नहीं होता. कई बार कंपनी की माली हालत इतनी खराब होती है कि उसका भाव टूट कर कौड़ियों के भाव आ जाता है. बिना किसी ठोस रिसर्च के केवल अफवाहों या कम दाम के चक्कर में पेनी स्टॉक्स में पैसा लगाना सीधे नुकसान को न्योता देना है. अगर आप भी ऐसे शेयरों में किस्मत आजमाना चाहते हैं, तो दांव लगाने से पहले इन 5 कड़े पैमानों पर कंपनी को परखना बेहद जरूरी है.
सेल्स और नेट प्रॉफिट की हकीकत
किसी भी स्टॉक को खरीदने से पहले उसकी बुनियादी स्थिति यानी Fundamentals देखना सबसे पहला कदम है. अगर कंपनी का बिजनेस ही नहीं चल रहा, तो शेयर का दाम चाहे 1 हो या 50, उसमें निवेश करना पैसे गंवाने जैसा है. लिहाजा, शेयर खरीदने से पहले ये हमेशा देखें कि कंपनी की बिक्री और शुद्ध मुनाफा साल-दर-साल बढ़ रहा है या नहीं. इसके साथ ही सिर्फ कागजी मुनाफे पर ध्यान न दें. यह पक्का करें कि कंपनी अपने मूल बिजनेस से वास्तविक कैश कमा रही है या नहीं. लगातार घाटे में चल रही कंपनियों से तुरंत दूरी बना लें.
मालिकों को खुद की कंपनी पर कितना भरोसा?
कंपनी के प्रमोटर्स यानी मालिक अपनी कंपनी में कितनी हिस्सेदारी रखते हैं, यह उनके विश्वास का सीधा पैमाना है. कम प्रमोटर्स होल्डिंग वाली कंपनी से दूर रहें. यानी जब कंपनी को चलाने वालों को ही उसके भविष्य पर भरोसा नहीं होगा, उसमें बाहर के निवेशकों को कभी दांव नहीं लगाना चाहिए. इसलिए शेयर खरीदने से पहले ये चेक करें कि कंपनी के शेयर होल्डिंग पैटर्न में प्रमोटरों की हिस्सेदारी कम से कम 50% या उससे ज्यादा होनी चाहिए. इसके साथ ही यह जांचना बेहद जरूरी है कि प्रमोटर्स ने अपने शेयर बैंक में गिरवी रखकर कर्ज तो नहीं ले रखा है. अगर प्रमोटर होल्डिंग लगातार घट रही हो, या शेयर गिरवी पड़े हों, तो ऐसे स्टॉक से तुरंत बाहर निकल जाएं.
डेट-टू-इक्विटी रेशियो
पेनी स्टॉक्स की लिस्ट में शामिल ज्यादातर कंपनियां भारी कर्ज (Debt) के दबाव में होती हैं. जब कंपनी की कमाई से ज्यादा उसका ब्याज बनने लगता है, तो उसके दिवालिया होने का खतरा मंडराने लगता है. कंपनी की कुल पूंजी (Equity) के मुकाबले उस पर मौजूद कुल कर्ज का अनुपात जरूर देखें. सुरक्षित निवेश के लिहाज से डेट-टू-इक्विटी रेशियो 1 से कम होना चाहिए. कर्ज-मुक्त कंपनियां सबसे मजबूत मानी जाती हैं.
पंप एंड डंप का खेल और लिक्विडिटी क्रंच से रहें सावधान
- पेनी स्टॉक्स में ट्रेडिंग वॉल्यूम काफी कम होता है, जिसका पूरा फायदा बाजार के बड़े ऑपरेटर्स उठाते हैं. ये ऑपरेटर्स छोटे निवेशकों को फंसाने के लिए एक सुनियोजित जाल बिछाते हैं.
- ऑपरेटर्स सोशल मीडिया या अफवाहों के दम पर शेयर की कीमत को बनावटी रूप से बढ़ाते हैं यानी पंप करते हैं और जब आम निवेशक ऊपरी स्तर पर खरीदारी कर लेते हैं, तो ऑपरेटर्स अपनी भारी होल्डिंग बेचकर मुनाफा समेट लेते हैं और गायब हो जाते हैं यानी शेयर को डंप कर देते हैं.
- इन शेयर्स में लिक्विडिटी की भी भारी कमी होती है. जब शेयर गिरना शुरू होता है, तो लोअर सर्किट लग जाता है और आप चाहकर भी अपना शेयर बेच नहीं पाते हैं, क्योंकि बाजार में कोई खरीदार ही नहीं होता है.
पेनी स्टॉक्स में अनुशासन ही आपकी पूंजी की रक्षा कर सकता है. इनमें निवेश को हमेशा एक हाई-रिस्क बेट की तरह ही देखना चाहिए. लिहाजा, अपने कुल पोर्टफोलियो का 2% से 5% से अधिक हिस्सा कभी भी पेनी स्टॉक्स में न लगाएं. इन स्टॉक्स में सिर्फ उतना ही पैसा लगाएं, जिसके पूरी तरह डूब जाने पर भी आपकी वित्तीय स्थिति पर कोई फर्क न पड़े. पेनी स्टॉक्स में उतरने से पहले अपना इमरजेंसी फंड तैयार रखें और अपनी मुख्य जमापूंजी को निफ्टी 50, लार्ज-कैप शेयरों या डायवर्सिफाइड म्यूचुअल फंड्स में सुरक्षित रखें.
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