ELSS Mutual Funds: आयकर कानून की धारा 80C के तहत टैक्स बचाने के लिए कई विकल्प मौजूद हैं, लेकिन ईएलएसएस (ELSS Equity Linked Savings Scheme) नौकरीपेशा और युवा निवेशकों के बीच सबसे पसंदीदा माध्यम बनकर उभरा है.
दरअसल, यह एक ऐसा टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंड है जो न केवल आपको सालाना 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट देता है, बल्कि आपके पैसे को शेयर बाजार में लगाकर लॉन्ग टर्म में एक बड़ा फंड तैयार करने में भी मदद करता है. सभी टैक्स बचत साधनों जैसे PPF या FD में इसका लॉक इन पीरियड सबसे कम यानी सिर्फ 3 साल का होता है.
ELSS म्यूचुअल फंड क्या है?
ELSS एक ओपन एंडेड इक्विटी म्यूचुअल फंड (Equity Mutual Fund) है. इसका मतलब है कि आपके निवेश किए गए पैसों का कम से कम 80% हिस्सा देश की चुनिंदा और मजबूत कंपनियों के शेयर्स (Equity Market) में लगाया जाता है.
ELSS म्यूचुअल फंड्स के फायदे
- धारा 80C के तहत छूट: पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) का चयन करने वाले निवेशक इसमें 1.5 लाख रुपये तक का निवेश दर्ज करके टैक्स बचा सकते हैं.
- रिटर्न की क्षमता: चूंकि पैसा शेयर बाजार में लगता है, इसलिए सॉन्ग टर्म यानी 5 से 7 वर्ष में इसमें 12% से 15% तक का अनुमानित रिटर्न मिलने की प्रबल संभावना रहती है.
- 3 साल का स्मार्ट लॉक इन: आपका निवेश जमा की तारीख से 3 वर्षों के लिए लॉक रहता है. यह 3 साल की सीमा निवेशकों में एक अनुशासित निवेश आदत भी विकसित करती है.
ELSS और FD दोनों में कौन ज्यादा बेहतर?
यदि आप इस असमंजस में हैं कि बैंक की 5 वर्षीय टैक्स सेविंग FD चुनें या ELSS, तो नीचे दी गई तुलना से अपना सही फैसला ले सकते हैं.
| विशेषता | ELSS म्यूचुअल फंड | टैक्स सेविंग FD |
| लॉक इन अवधि | मात्र 3 साल | 5 साल |
| अनुमानित रिटर्न | 12% से 15% (बाजार के अधीन) | 6% से 7.5% (निश्चित) |
| जोखिम स्तर | मध्यम से उच्च (बाजार आधारित) | शून्य (सुरक्षित सरकारी गारंटी) |
| महंगाई दर पर प्रभाव | महंगाई को पछाड़ने में पूरी तरह सक्षम | रियल रिटर्न काफी कम |
| निवेश का माध्यम | SIP (हर महीने ₹500) या एकमुश्त | सिर्फ एकमुश्त |
ELSS में निवेश करने के 4 सबसे बड़े फायदे
- सबसे तेज लिक्विडिटी: PPF में 15 साल और टैक्स सेविंग एफडी में 5 साल का लॉक इन होता है, जबकि ELSS से आप मात्र 3 साल बाद ही अपने पैसे निकाल सकते हैं.
- महंगाई को मात देने की क्षमता: पारंपरिक फिक्स्ड डिपॉजिट का रिटर्न अक्सर महंगाई दर से नीचे रह जाता है, जबकि ELSS इक्विटी ग्रोथ के दम पर आपके फंड को तेजी से बढ़ाता है.
- कम राशि से SIP की शुरुआत: टैक्स बचाने के लिए आपको साल के अंत में एकमुश्त बड़ी रकम लगाने की जरूरत नहीं है. आप हर महीने की सैलरी से मात्र 500 रुपये की SIP चालू कर सकते हैं.
- प्रोफेशनल मैनेजमेंट: आपके फंड को मार्केट के बेहद अनुभवी फंड मैनेजर्स की ओर से मैनेज किया जाता है, जो बाजार का विश्लेषण करके ही पैसा लगाते हैं.
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3 साल का लॉक इन खत्म होने के बाद यदि आप पैसे निकालते हैं, तो एक वित्तीय वर्ष में 1.25 लाख रुपये तक का मुनाफा पूरी तरह टैक्स फ्री होता है. इससे अधिक मुनाफे पर नियमानुसार 12.5% की दर से LTCG टैक्स लागू होता है.
वित्तीय वर्ष के अंत में यानी मार्च में एक साथ बड़ा अमाउंट इन्वेस्ट करने के बजाय साल की शुरुआत से ही SIP के जरिए से निवेश करें. इससे आपको रुपी कॉस्ट एवरेजिंग (Rupee Cost Averaging) का लाभ मिलेगा और मार्केट के उतार चढ़ाव का असर आपके पोर्टफोलियो पर कम पड़ेगा.
ELSS Funds में ऐसे शुरू करें निवेश
अगर आप भी इस टैक्स-सेविंग फंड में निवेश की शुरुआत करना चाहते हैं, तो ऑनलाइन माध्यम से डायरेक्ट प्लान (Direct Plan) में पैसे लगाने की पूरी प्रक्रिया बेहद आसान है. आप अपनी सुविधा के मुताबिक नीचे बताए किसी भी प्लेटफॉर्म का चुनाव कर सकते हैं.
- म्यूचुअल फंड ऐप्स: Groww, Zerodha Coin, ETMoney या INDmoney जैसे लोकप्रिय फिनटेक प्लेटफॉर्म से डायरेक्ट निवेश कर सकते हैं.
- AMC की आधिकारिक वेबसाइट्स: किसी भी फंड हाउस जैसे SBI, HDFC, ICICI Prudential, Nippon India की योजना में निवेश करना हो तो , उनकी वेबसाइट पर सीधे जाकर Direct Plan चुन सकते हैं.
- रजिस्टर्ड डिस्ट्रीब्यूटर्स व नेट बैंकिंग: CAMS, KFintech जैसी एग्रीगेटर वेबसाइट्स या अपने बैंक के नेट बैंकिंग पोर्टल का इस्तेमाल भी कर सकते हैं.
ये है ऑनलाइन निवेश की प्रक्रिया
सबसे पहले e-KYC वेरिफिकेशन करें, इसके बाद फंड का चुनाव करें, फिर SIP या Lump Sum चुनने के बाद ऑनलाइन पेमेंट करें.
- e-KYC प्रक्रिया पूरी करें: म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए KYC होना अनिवार्य है। इसके लिए पैन कार्ड, पहचान प्रमाण पत्र और डिजिटल वेरिफिकेशन की जरूरत पड़ती है, जिसे ऑनलाइन पूरा किया जा सकता है.
- सही फंड का चुनाव करें: पिछले 3 से 5 साल के परफॉर्मेंस, फंड मैनेजर के ट्रैक रिकॉर्ड और एक्सपेंस रेशियो की तुलना करके बेहतर ELSS फंड का चुनाव करें.
- SIP : हर महीने एक निश्चित राशि जैसे 500 रुपये या 1,000 रुपये या जो आप चाहें उतनी राशि का ऑटो-डेबिट सेट करें,जो आप सेट करेंगे उतना फंड हर महीने अकाउंट के डिडक्ट होकर एसआईपी में चला जाएगा.
- Lump Sum: एक बार में भी बड़ी राशि निवेश कर सकते हैं. ध्यान रखें कि 80C के तहत टैक्स छूट केवल 1.5 लाख तक ही सीमित है.
- पेमेंट करें: UPI, नेट बैंकिंग या डेबिट कार्ड से भुगतान संपन्न करें.
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