- कूरियर कंपनी DTDC पर अमेरिका भेजे गए साड़ियों के पार्सल के गायब होने पर कंज्यूमर कोर्ट ने जुर्माना लगाया है.
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत पार्सल खो जाना सेवा में कमी माना जाता है और मुआवजा दिया जाता है.
- कूरियर शिकायत के लिए लिखित आवेदन, ट्रैकिंग नंबर और सामान का बिल संभाल कर रखना जरूरी होता है.
Courier Parcel Lost Compensation Rules: ऑनलाइन खरीदारी और कूरियर से सामान भेजने के इस दौर में पार्सल का गायब होना या देरी से पहुंचना आम बात हो गई है. हालांकि, ये सेवा में कमी का गंभीर मामला है. ऐसे ही एक मामले में कंज्यूमर कोर्ट की ओर से कूरियर कंपनी DTDC पर अमेरिका भेजे गए साड़ियों के पार्सल के गायब होने पर 78,000 का जुर्माना लगाया गया है. यह घटना यह साबित करती है कि उपभोक्ता अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें, तो उन्हें पूरा न्याय मिलता है.
दरअसल, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (Consumer Protection Act) के तहत अगर कूरियर कंपनी आपका पार्सल खो देती है, तो इसे सेवा में कमी (Deficiency of Service) माना जाता है. ऐसे में ग्राहक को न सिर्फ सामान की कीमत, बल्कि मानसिक प्रताड़ना का हर्जाना पाने का भी पूरा कानूनी अधिकार है. पार्सल खोने पर मुआवजा पाने के लिए नीचे बताई गई तीन प्रक्रियाओं को फॉलो करना होगा.

कूरियर कंपनी में लिखित शिकायत दर्ज कराएं
- ईमेल या पोर्टल पर शिकायत: सबसे पहले कूरियर कंपनी के कस्टमर केयर ईमेल या वेबसाइट पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं.
- रसीद और टिकटिंग: कूरियर बुक करते समय मिली रसीद, ट्रैकिंग नंबर और कंप्लेंट टिकट आईडी संभाल कर रखें.
- सामान का बिल : कूरियर में भेजे गए सामान का असली बिल या इनवॉइस तैयार रखें, ताकि कोर्ट या अथॉरिटी के सामने सामान की वास्तविक कीमत साबित की जा सके.
नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन की लें मदद
अगर कूरियर कंपनी आपकी शिकायत पर ध्यान नहीं देती या रिफंड देने से मना करती है, तो सरकार की नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन पर शिकायत करें. इसके लिए आप सहसे पहले 1915 या 1800-11-4000 पर कॉल करके शिकायत दर्ज करा सकते हैं. इसके अलावा, 8800001915 नंबर पर मैसेज भेजकर भी मदद ली जा सकती है. इससे भी मदद नहीं मिलती है तो NCH के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपना अकाउंट बनाएं और कूरियर स्लिप व बिल अपलोड करें. यहां दर्ज शिकायतों का समाधान अक्सर 30 दिनों के भीतर मध्यस्थता से हो जाता है.
कंज्यूमर कोर्ट में केस दर्ज करें
अगर हेल्पलाइन से भी मसला हल न हो, तो आप उपभोक्ता अदालत का रुख कर सकते हैं.
- लीगल नोटिस: कोर्ट जाने से पहले कूरियर कंपनी को अंतिम चेतावनी के रूप में लीगल नोटिस भेजें.
- ऑनलाइन ई-दाखिल: आप e-Daakhil Portal के माध्यम से घर बैठे ऑनलाइन कंज्यूमर कोर्ट में केस दर्ज कर सकते हैं.
- समय सीमा: घटना या पार्सल गायब होने की तारीख से 2 साल के भीतर अपने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है.
कंज्यूमर कोर्ट से कितना मिल सकता है मुआवजा?
- सामान की पूरी कीमत: इनवॉइस या बिल के आधार पर खोए हुए सामान की पूरी कीमत अदा की जाती है.
- कूरियर शुल्क की वापसी: पार्सल भेजने में खर्च की गई पूरी बुकिंग फीस को वापस कर दिया जाता है.
- मानसिक प्रताड़ना : कंपनी की ढिलाई और उपभोक्ता को हुई मानसिक परेशानी के लिए अलग से मुआवजा मिलता है.
- अदालती खर्च : कानूनी लड़ाई में हुआ वकील और फाइलिंग का पूरा खर्च भी देने का प्रावधान है.
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अगर आपने भारतीय डाक की India Post Speed Post सेवा का उपयोग किया है और सामान का अलग से बीमा (Insurance) नहीं कराया है, तो उनके विभागीय नियमों के अनुसार मुआवजा कूरियर शुल्क का दोगुना या अधिकतम 1,000 इनमें से जो भी कम हो, वह मिलता है. हालांकि, प्राइवेट कूरियर कंपनियों पर कंज्यूमर कोर्ट वास्तविक नुकसान के आधार पर भारी जुर्माना लगाता है.
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