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ग्रेच्युटी को लेकर SC का बड़ा फैसला, कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के लिए नियोक्ता जिम्मेदार नहीं, जानें नियम

सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी ग्रेच्युटी को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. जिसमें कहा गया है कि कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए नियोक्ता जिम्मेदार नहीं है.

ग्रेच्युटी को लेकर SC का बड़ा फैसला, कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के लिए नियोक्ता जिम्मेदार नहीं, जानें नियम
क्या है ग्रेच्युटी का नियम
NDTV इंडिया ग्राफिक्‍स

भारत में ग्रेच्युटी का भुगतान पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट 1972 के तहत किया जाता है. यह कंपनी यानी नियोक्ता की ओर से कर्मचारियों को उसकी लंबी सेवाओं के बदले मिलने वाला एक वित्तीय लाभ होता है. हालांकि ग्रेच्युटी के भुगतान के लिए नियोक्ता सभी तरह के कर्मचारियों के लिए जिम्मेदार नहीं है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी ग्रेच्युटी को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. जिसमें कहा गया है कि कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए नियोक्ता जिम्मेदार नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि मुख्य नियोक्ता (Principal Employer) और कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों के बीच कोई सीधा नियोक्ता-कर्मचारी संबंध नहीं है, तो मुख्य नियोक्ता को उन कर्मचारियों की ग्रेच्युटी के भुगतान के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.

बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए सुनाया फैसला

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने कहा कि ठेकेदार (Contractor) के जरिए रखे गए श्रमिकों के लिए मुख्य कंपनी तभी जिम्मेदार होगी जब उनके बीच सीधा संबंध हो. सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को खारिज करते हुए दिया, जिसमें ONGC को ठेकेदार के मजदूरों को ग्रेच्युटी देने का निर्देश दिया गया था.

कोर्ट ने कहा कि पेमेंट ऑफ ग्रैच्युटी एक्ट के तहत कंट्रोलिंग अथॉरिटी केवल राशि की गणना (Compute) कर सकती है, यह तय करने का अधिकार उसके पास नहीं है कि असली मालिक या नियोक्ता कौन है.

वहीं कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन कर्मचारियों को पहले ही आदेश के तहत ग्रेच्युटी की राशि मिल चुकी है, उनसे पैसों की रिकवरी नहीं की जाएगी.

क्या है ग्रेच्युटी का नियम

ग्रेच्युटी का नियम उन सभी कंपनियों, फैक्ट्रियों, दुकानों या संस्थानों पर लागू होता है जहां पिछले 12 महीनों में किसी भी एक दिन 10 या उससे अधिक कर्मचारियों ने काम किया हो. हालांकि यह भी शर्त होती है कि कर्मचारी एक ही कंपनी में कम से कम 5 साल की लगातार नौकरी पूरी की हो. नियम में यह भी कहा गया है कि अगर 5वें साल में कर्मचारी ने 240 दिन काम कर लिया है तो उसे ग्रेच्युटी के लिए योग्य माना जाएगा.

नए लेबर कोड के अनुसार, फिक्स्ड-टर्म कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारी अब महज 1 साल की सेवा के बाद भी आनुपातिक आधार पर ग्रेच्युटी के हकदार हैं.

कब रोकी जा सकती है ग्रेच्युटी?

यदि कोई कर्मचारी को कंपनी की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, चोरी, धोखाधड़ी या कार्यस्थल पर दंगा या गंभीर दुराचार (Serious Misconduct) के कारण नौकरी से बर्खास्त (Terminate) किया गया है, तो नियोक्ता को उसकी ग्रेच्युटी पूरी या आंशिक रूप से रोकने का अधिकार होता है.

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