Delhi Traffic Challan New Rule 167: दिल्ली की सभी जिला अदालतों जैसे तीस हजारी, पटियाला हाउस, रोहिणी, द्वारका, साकेत के बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति ने 21 सितंबर को कार्य बहिष्कार का फैसला लिया है. इन वकीलों का कहना है कि मोटर वाहन नियम 167 में किया गया संशोधन केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं है, बल्कि यह देश के नागरिकों के न्यायिक अधिकार पर सीधा असर डालता है. इसके विरोध में वकील सुबह 11:30 बजे अदालत परिसरों के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन भी करेंगे.
वकीलों का मुख्य विरोध चालान के निपटारे का अधिकार न्यायिक मजिस्ट्रेट से छीनकर SDM, तहसीलदार और प्रशासनिक अधिकारियों को देने और कोर्ट जाने के लिए 50 प्रतिशत प्री-डिपॉजिट की शर्त पर है. जिसे वकीलों के कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ ऑल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट्स बार एसोसिएशंस ऑफ दिल्ली ने आम जनता के न्यायिक अधिकारों के खिलाफ बताते हुए एक दिवसीय हड़ताल बुलाई है.
चालान के नए नियम 167 में क्या है ?
पहले अगर कोई नागरिक अपने चालान को गलत मानकर कोर्ट में चुनौती देना चाहता था, तो उसकी सुनवाई स्वतंत्र न्यायिक मजिस्ट्रेट की ओर से की जाती थी, लेकिन नए नियम के तहत यह अधिकार प्रशासनिक अधिकारियों जैसे सब डिवीजनल मजिस्ट्रेट(SDM), कार्यकारी मजिस्ट्रेट, तहसीलदार, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग और परिवहन अधिकारियों को सौंप दिया गया है. वकीलों का मानना है कि इससे न्यायपालिका और कार्यपालिका के अलग करने का सिद्धांत प्रभावित होगा.
45 दिनों के भीतर जवाब देना होगा जरूरी
नए नियम 167(5) के मुताबिक चालान कटने के बाद वाहन चालक को 45 दिनों के भीतर या तो निर्धारित राशि का भुगतान करना होगा, या ऑनलाइन पोर्टल के जरिए से अपनी आपत्ति दर्ज करानी होगी. अगर 45 दिनों के भीतर चालान को चुनौती नहीं दी जाती है, तो नियम 167(6) के तहत यह मान लिया जाएगा कि चालक ने चालान की गलती स्वीकार कर ली है.
कोर्ट अपील के लिए 50 प्रतिशत प्री-डिपॉजिट जरूरी
अगर नामित प्रशासनिक अधिकारी किसी आपत्ति को खारिज कर देता है और वादी इस फैसले के खिलाफ सक्षम अदालत का रुख करना चाहते हैं, तो नियम 167(9) के तहत कुल चालान राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा पहले जमा करना होगा. वकीलों का कहना है कि यह शर्त गरीब और मध्यमवर्गीय नागरिकों के लिए न्याय पाना कठिन बना देगी.
नया चालान नियम बनाम पुराना नियम
| मापदंड | पुराना नियम | संशोधित नियम 167 |
| सुनवाई अधिकारी | न्यायिक मजिस्ट्रेट | SDM, तहसीलदार, कार्यकारी मजिस्ट्रेट, RTO |
| अपील हेतु पूर्व-शर्त | सामान्य अदालती प्रक्रिया | चालान राशि का 50 प्रतिशत प्री डिपॉजिट जरूरी |
| आपत्ति दर्ज करने का समय | समन मिलने के बाद कोर्ट पेशी | 45 दिनों के भीतर पोर्टल पर चैलेंज करना जरूरी |
| जवाब न देने का परिणाम | कोर्ट द्वारा समन जारी किया जाना | 45 दिन बाद स्वतः स्वीकार्य |
दिल्ली सरकार और वकीलों के बीच बातचीत बेनतीजा
वकीलों के समन्वय समिति के सचिव जनरल नरवीर डाबास के मुताबिक बार एसोसिएशन ने 27 अगस्त और 7 सितंबर को दिल्ली सरकार, मुख्यमंत्री और कानून मंत्री को इस संबंध में ज्ञापन सौंपा था. इस दौरान बैठकों में वकीलों को आश्वासन दिया गया था कि केंद्र सरकार से परामर्श किए बिना प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति लागू नहीं की जाएगी. हालांकि, हालिया मीडिया रिपोर्टों से पता चला कि अलग-अलग विभागों के अधिकारियों को चालान निपटारे के लिए प्राधिकारी अधिसूचित कर दिया गया है, जिसके बाद वकीलों ने 19 सितंबर की बैठक में कार्य बहिष्कार करने का अंतिम निर्णय लिया.
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