विज्ञापन

शेयरों में 10 गुना तक रिटर्न का सीक्रेट आया सामने! ऐसे ढूंढे मल्टीबैगर Stocks

Stock Market से मोटा मुनाफा कमाने का सपना हर निवेशक का होता है. इसलिए 3 से 5 साल में 5 से 10 गुना रिटर्न देने वाले मल्टीबैगर स्टॉक्स खोजना जरूरी हो जाता है. जानिए ROE, PE रेशियो, प्रमोटर होल्डिंग और कैश फ्लो जैसे उन प्रमुख मापदंडों के बारे में, जो किसी भी पेनी या स्मॉलकैप स्टॉक को मल्टीबैगर बनाते हैं.

शेयरों में 10 गुना तक रिटर्न का सीक्रेट आया सामने! ऐसे ढूंढे मल्टीबैगर Stocks
मल्टीबैगर स्टॉक ढूंढने का आसान तरीका
NDTV
  • मल्टीबैगर स्टॉक वे होते हैं जो अपनी मूल कीमत से कई गुना रिटर्न देते हैं.
  • मल्टीबैगर कंपनियों का ROE कम से कम पंद्रह से बीस प्रतिशत और ROCE बीस प्रतिशत से अधिक होना चाहिए.
  • PE रेशियो और PEG रेशियो का विश्लेषण जरूरी है, ताकि अंडर वैल्यूड स्टॉक्स की पहचान की जा सके.

Multibagger Stock Finding Formula: शेयर बाजार (Stock Market) में जब कोई स्टॉक अपनी मूल कीमत से कई गुना जैसे 500 प्रतिशत या 1000 प्रतिशत का रिटर्न देता है, तो उसे मल्टीबैगर स्टॉक (Multibagger Stock) कहा जाता है. ऐसे शेयर (Stocks) रातों रात या शॉर्ट टर्म में नहीं बनते, बल्कि इनके पीछे कंपनी के मजबूत फाइनेंशियल मैट्रिक्स, स्केलेबल बिजनेस मॉडल और प्रमोटर्स की ईमानदारी का हाथ होता है.

शेयर में निवेश से पहले कंपनी के बुनियादी आंकड़ों का विश्लेषण करना भी सीखें, तभी आप अपने भविष्य को सुरक्षित बनाने वाले मल्टीबैगर स्टॉक ढूंढ पाएंगे.

अपनी इन्वेस्टमेंट जर्नी में आप भी अगले मल्टीबैगर शेयर (Multibagger Shares) की तलाश कर रहे हैं, तो सिर्फ टिप्स या अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय कंपनी के बुनियादी आंकड़ों का विश्लेषण (Research) करना भी सीखें, तभी आप अपने भविष्य को सुरक्षित बनाने वाले मल्टीबैगर स्टॉक ढूंढ पाएंगे.  मल्टीबैगर स्टॉक ढूंढने के लिए नीचे दिए गए पैमाने को समझना बेहद जरूरी है. 

ऐसे पहचाने मल्टीबैगर स्टॉक्स

Latest and Breaking News on NDTV

ROE और ROCE जानना है जरूरी

कोई कंपनी अपने शेयरधारकों के पैसे और कुल पूंजी का कितनी चालाकी से इस्तेमाल कर रही है, यह रिटर्न ऑन इक्विटी यानी ROE और रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड यानी ROCE से पता चलता है.  मल्टीबैगर स्टॉक बनने वाली कंपनी का ROE कम से कम 15 प्रतिशत से 20 प्रतिशत या उससे ज्यादा होना चाहिए. लगातार हाई ROE यह दिखाता है कि कंपनी अपने प्रॉफिट को सही जगह रीइन्वेस्ट कर रही है. वहीं, ROCE भी 20% से ऊपर होना बेहतर माना जाता है, क्योंकि यह कर्ज को भी ध्यान में रखता है. रिसर्च करते वक्त सिर्फ एक साल का आंकड़ा देखने के बजाय पिछले 3 से 5 सालों का लगातार बढ़ता या स्थिर ट्रैक रिकॉर्ड भी देखें.

PE Ratio और PEG Ratio

शेयर महंगा है या सस्ता, यह जानने के लिए प्राइस टू अर्निंग (PE) रेशियो और अर्निंग ग्रोथ रेट (PEG) रेशियो का विश्लेषण भी बेहद जरूरी है. शेयर खरीदने से पहले ऐसे स्टॉक्स ढूंढें जो अंडर वैल्यूड हो, यानी जिसका PE उनकी इंडस्ट्री PE के आसपास या उससे कम हो.अगर किसी कंपनी कंपनी का PEG रेशियो 1 से कम है, तो इसका सीधा मतलब है कि कंपनी की अर्निंग ग्रोथ के मुकाबले उसका शेयर अभी आकर्षक कीमत पर मिल रहा है. दरअसल, मजबूत ब्रांड और हाई ग्रोथ वाली कंपनियों का PE हमेशा थोड़ा प्रीमियम रह सकता है, इसलिए हमेशा ग्रोथ के संदर्भ में ही PE का मूल्यांकन जरूर करें.

प्रमोटर होल्डिंग और गिरवी शेयर

कोई भी शेयर खरीदने से पहले यह जानना बेहद जरूरी है कि कंपनी के प्रमोटर्स को अपने ही बिजनेस पर कितना भरोसा है, जो उनकी हिस्सेदारी से पता होता है. कंपनी के फाउंडर्स या प्रमोटर्स की होल्डिंग कम से कम 50% या उससे अधिक होनी चाहिए. यह भी देखें कि क्या म्यूचुअल फंड्स (DIIs) और विदेशी निवेशक (FIIs) उस कंपनी में अपनी शेयर होल्डिंग बढ़ा रहे हैं. अगर प्रमोटर्स ने अपने 5% से ज्यादा शेयर बैंक या वित्तीय संस्थानों के पास गिरवी रखे हैं, तो ऐसे स्टॉक से तुरंत दूरी बना लें.

कर्ज और फ्री कैश फ्लो 

भारी भड़कम कर्ज और खराब कैश मैनेजमेंट किसी भी बेहतरीन बिजनेस को भी डुबो सकता है. इसलिए किसी भी शेयर को खरीदने से पहले यह जरूर चेक करें कि डेट टू इक्विटी रेशियो का अनुपात 0.5 से कम होना चाहिए. कंपनी पूरी तरह से कर्ज मुक्त हो तो वह सबसे सुरक्षित मानी जाती है. कंपनी का नेट प्रॉफिट कागजों पर दिखने के साथ-साथ वास्तविक नकदी में बदलना चाहिए. लगातार बढ़ता फ्री कैश फ्लो असली मजबूती का संकेत है. दरअसल, कंपनी जितनी जल्दी अपने माल और बकाये को नकदी में बदल लेती है, उसका बिजनेस मॉडल उतना ही मजबूत होता है.

यह भी पढ़ें- दिल्ली सरकार युवाओं को बिना गारंटी देती है 3 लाख तक का लोन, जानिए कैसे करें आवेदन और कितनी मिलेगी सब्सिडी

मल्टीबैगर स्टॉक खोजते वक्त इन बातों का भी रखें ख्याल

स्मॉल कैप और माइक्रो कैप पर फोकस करें, क्योंकि रिलायंस या टीसीएस जैसी विशालकाय कंपनियां रातों रात 10 गुना नहीं हो सकतीं. मल्टीबैगर आमतौर पर 500 करोड़ रुपये से 5,000 करोड़ रुपये के मार्केट कैप वाली छोटी कंपनियों में ही मिलते हैं. लिहाजा, उन कंपनियों का चुनाव करें, जो इस वक्त ग्रीन एनर्जी, एआई, तकनीक, इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपोनेंट्स या स्पेशलिटी केमिकल्स जैसे उभरते क्षेत्रों में काम कर रही हैं. इसके अलावा, कंपनी के पास कोई ऐसा पेटेंट, मजबूत ब्रांड वैल्यू या सबसे कम लागत में उत्पादन करने का ऐसा अधिकार होना चाहिए, जिसे प्रतिस्पर्धी आसानी से न चुरा सकें.

यह भी पढ़ें- IPO Listing के पहले ही दिन कमाना चाहते हैं मोटा मुनाफा? तो जानिए निवेश से पहले किन बातों का रखें ख्याल

डिस्क्लेमर: यह खबर किसी स्टॉक में पैसा लगाने की सलाह नहीं, बल्कि एक सामान्य जानकारी है. शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. इसलिए किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति की समीक्षा करें और आवश्यकता पड़ने पर सेबी रजिस्टर्ड वित्तीय सलाहकार की सलाह जरूर लें.

यह भी पढ़ें- एक-दो रुपये के शेयर से करोड़पति बनने का देख रहे हैं सपना, तो जान लें ये 5 बातें, वरना डूब जाएगी गाढ़ी कमाई

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Stock Market India, Multibagger Stocks, Personal Finance, Share Market Tips, Investing For Beginners
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com