राजस्थान सरकार ने बाल विवाह के रोकथाम के लिए बड़ा फैसला लिया है. बाल अधिकारिता विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, अब सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपल, ग्राम विकास अधिकारी और पटवारी अपने-अपने क्षेत्र में बाल विवाह रोकने के लिए सीधे कार्रवाई कर सकेंगे. उन्हें पुलिस अधिकारी जैसी पॉवर मिल गई है.
किन्हें मिली जिम्मेदारी?
राजस्थान राज-पत्र में प्रकाशित अधिसूचना के मुताबिक, राज्य सरकार ने तीन स्तर के अधिकारियों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी यानी CMPO नियुक्त किया है.
- शिक्षा विभाग में यह जिम्मेदारी सभी सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य और प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक को दी गई है. इनका क्षेत्राधिकार उस ग्राम पंचायत या शहरी वार्ड तक होगा, जहां उनका स्कूल स्थित है.
- पंचायती राज विभाग के तहत सभी ग्राम विकास अधिकारी यानी VDO को भी यह जिम्मेदारी दी है. इनका क्षेत्राधिकार पूरी ग्राम पंचायत होगी.
- राजस्व विभाग जो इसमें जोड़ते हुए सभी पटवारियों को बाल विवाह रोकने की जिम्मेदारी दी है. इनका क्षेत्राधिकार उनका पटवार मंडल होगा.
पुलिस जैसी पॉवर दी, जांच की शक्तियां भी
अधिसूचना में यह भी साफ किया है कि इन सभी अधिकारियों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के अध्याय V, VII, XII और XIII के तहत पुलिस अधिकारी द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली संज्ञेय अपराध की जांच करने की शक्तियां दी गई हैं.

क्यों जरूरी था ये कदम?
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 की धारा 16 के तहत राज्य सरकार को ये शक्तियां प्राप्त हैं. ग्रामीण और शहरी स्तर पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय स्तर के अधिकारियों को ही CMPO बनाया गया है. बाल विवाह की सूचना मिलने पर ये अधिकारी तत्काल जांच कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर सकेंगे.
आमतौर पर यह भी माना जाता है कि स्थानीय स्तर पर तैनात होने के चलते प्रिंसिपल, ग्राम विकास अधिकारी और पटवारी के पास लोकल सूचनाएं सबसे पहले और पुख्ता तरीके से पहुंचती हैं. ऐसे में बाल विवाह की सूचनाएं इनके पास पहुंचती हैं, और अथॉरिटी होगी तो यह प्रभावी कार्रवाई कर सकेंगे.
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