- मुंबई महानगरपालिका चुनाव में 15 जनवरी को कुल 1.83 प्रतिशत मतदाताओं ने नोटा विकल्प चुना.
- कुल 54,76,043 मतदान में से 1,00,327 मतदाताओं ने किसी भी उम्मीदवार को वोट नहीं दिया था.
- पश्चिमी उपनगरों में सबसे अधिक 47,936 मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग कर अपना असंतोष जाहिर किया.
मुंबई महानगरपालिका चुनाव परिणाम आने के बाद अब एक आंकड़े की काफी चर्चा हो रही है. दरअसल, एक लाख से ज्यादा मुंबईकरों ने किसी भी उम्मीदवार पर भरोसा नहीं जताया और सीधे NOTA का बटन दबाया है. 15 जनवरी को हुए बीएमसी चुनाव मतदान में 1.83% वोट सिर्फ NOTA को मिले. यह सिर्फ आम लोगों का असंतोष नहीं, बल्कि शहर की राजनीतिक नब्ज का भी ताजा संकेत है. पश्चिमी उपनगरों में बड़ी संख्या में मतदाताओं ने NOTA का बटन दबाया और यह बता दिया है कि उन्हें राजनीतिक दलों के साथ ही निर्दलीय उम्मीदवारों पर भी भरोसा नहीं है.
बीएमसी चुनाव में मतदाताओं ने बड़ी संख्या में नोटा का इस्तेमाल किया. यह बताता है कि आम लोगों में असंतोष है और वे मौजूदा विकल्पों में से किसी पर भी भरोसा नहीं कर पा रहे हैं. मुंबई में 1 लाख से अधिक मुंबईकरों ने NOTA का विकल्प चुना है.
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मतदान का करीब 1.83 फीसदी नोटा
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 15 जनवरी को हुए मतदान में कुल 54,76,043 वोट पड़े, जिनमें से 1,00,327 लोगों ने किसी भी उम्मीदवार को वोट नहीं दिया और नोटा का बटन दबाया. नोटा का यह प्रतिशत मतदान का करीब 1.83 प्रतिशत है.
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पश्चिम उपनगरों में सबसे ज्यादा 'नोटा'
मुंबई में कुल 52 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जिसमें सबसे अधिक नोटा वोटों की संख्या पश्चिम उपनगरों में देखी गई. दहिसर से लेकर बांद्रा तक के क्षेत्रों में कुल 47,936 मतदाताओं (1.9%) ने नोटा का इस्तेमाल किया, जो बोरीवली और दहिसर जैसे क्षेत्रों में दर्ज अधिक मतदान के ही अनुसार है.
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