- CRPF जवान संजय तिवारी को आतंकवादी उस्मान लाहौरी से मुठभेड़ में तीन गोलियां लगने के बावजूद उसे मार गिराया.
- 2 नवंबर 2024 को हुई मुठभेड़ में संजय तिवारी ने आतंकी के छिपे मकान को घेरकर उसे सरेंडर करने को कहा था
- गोलीबारी के दौरान तीन गोलियां लगने के बाद भी संजय ने गन फाइट जारी रखी और आतंकी को ढेर कर दिया
आतंकियों से शेर की तरह लड़े. सामने मौत खड़ी थी, फिर भी पीछे नहीं हटे. तीन गोलियां लगने के बावजूद आमने-सामने की गन फाइट में आतंकी को मार गिराया. ये हैं मध्य प्रदेश के रीवा के बहादुर बेटे व सीआरपीएफ जवान संजय तिवारी, जिन्हें 8 जून 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों शौर्य चक्र मिला है.
शौर्य चक्र पुरस्कार 2026
रक्षा अलंकरण समारोह में वीरता के लिए दिया जाने वाला भारत का तीसरा सबसे बड़ा सम्मान शौर्य चक्र प्राप्त करने के बाद 10 जून को संजय तिवारी पहली बार रीवा पहुंचे. यहां उनका भव्य स्वागत किया गया और उन्होंने लोगों के साथ आतंकी को मार गिराने का वह किस्सा साझा किया, जिसे सुनकर लोगों के रोंगटे खड़े हो गए.

रीवा में CRPF जवान संजय तिवारी का रेलवे स्टेशन से लेकर घर तक जोरदार स्वागत हुआ. Photo Credit: Javed ansari
उस्मान लाहौरी का एनकाउंटर
एनडीटीवी से विशेष बातचीत में संजय तिवारी ने बताया कि “बात 2 नवंबर 2024 की है. रात को लगभग 2:45 बजे का समय रहा होगा. भारतीय सेना को सूचना मिली थी कि उस्मान लाहौरी उर्फ छोटा वालिद, लश्कर-ए-तैयबा का सक्रिय सदस्य है. लाहौरी एक मकान में छिपा हुआ था. हमारी टीम ने मकान को घेर लिया. उस्मान लाहौरी को सरेंडर करने के लिए कहा गया, लेकिन उसने गोलीबारी शुरू कर दी. हमने भी जवाबी फायर किया.”
संजय तिवारी को कहां-कहां लगी गोली?
संजय तिवारी ने आगे बताया कि “थोड़ी देर में सामने से गोली चलना बंद हो गई. हमें लगा कि आतंकवादी ढेर हो गया है. उसकी तलाश में हम कमरे के अंदर घुसे, लेकिन वह जीवित था. उसने फायरिंग शुरू कर दी. मुझे तीन गोलियां लगीं. गर्दन के पास, पेट के नीचे और बाईं जांघ पर. इसके बावजूद मैंने आमने-सामने की गन फाइट में जमकर फायरिंग की और आतंकी उस्मान लाहौरी को ढेर कर दिया. उस्मान लाहौरी जैसे आतंकी को मारने पर मुझे शौर्य चक्र मिला है.”

सामने मौत, शरीर में 3 गोलियां… फिर भी संजय तिवारी ने लिख डाली जीत की कहानी.
ड्यूटी ज्वाइन करने श्रीनगर रवाना
रेलवे स्टेशन पर उनका फूल-मालाओं और ‘भारत माता की जय' के नारों के साथ स्वागत किया गया. संजय तिवारी का रीवा में स्वागत किसी नायक की तरह हुआ. उनके घर पर उनसे मिलने वालों का तांता लगा रहा. संजय 10-12 घंटे के लिए ही रीवा पहुंचे थे, क्योंकि उन्हें वापस अपनी ड्यूटी ज्वाइन करने श्रीनगर जाना था.
बता दें कि रीवा के रहने वाले संजय तिवारी 2011 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे. अपने लगभग 15-16 साल के करियर में वह करीब 5 साल कश्मीर के श्रीनगर में तैनात रहे. इस दौरान उन्होंने कई आतंकवादी घटनाएं देखीं. उस्मान लाहौरी का एनकाउंटर उनकी जिंदगी की उन घटनाओं में से एक है, जिसे वह कभी नहीं भूल सकते.
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