MP Rajya Sabha Election: मध्य प्रदेश की राज्यसभा चुनावी लड़ाई अब नामांकन पत्रों और कानूनी दलीलों से निकलकर सड़क, प्रतीक और सियासी संदेशों की जंग में बदल गई है. कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के एक दिन बाद बुधवार को यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता भोपाल स्थित मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय पहुंचे. लेकिन इस बार उनके हाथों में सिर्फ झंडे और तख्तियां नहीं थीं. वे अपने साथ आरएसएस की ड्रेस भी लेकर आए थे. जब कार्यकर्ता सीईओ दफ्तर पहुंचे तो गेट बंद मिला. कुछ देर नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं ने वही आरएसएस की ड्रेस निर्वाचन कार्यालय के गेट पर टांग दी और वहां से चले गए.
In a symbolic protest @INCIndia @INCMP workers hung an @RSSorg uniform at the #Election #Commission premises, alleging ideological influence over constitutional institutions @GargiRawat pic.twitter.com/azdoOBaPlR
— Anurag Dwary (@Anurag_Dwary) June 10, 2026
इन यूथ कांग्रेस के नेताओं का आरोप सीधा और तीखा था. पार्टी का कहना है कि संवैधानिक संस्थाएं अब निष्पक्ष रूप से काम नहीं कर रहीं, बल्कि वैचारिक और राजनीतिक दबाव में फैसले ले रही हैं. कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन इसलिए खारिज कराया गया ताकि भाजपा मध्य प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटें बिना मुकाबले जीत सके.
रातभर चला हाई-वोल्टेज सियासी ड्रामा
इससे पहले मंगलवार रात सीईओ कार्यालय के बाहर हाई-वोल्टेज सियासी ड्रामा देखने को मिला. रात करीब 10:30 बजे नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं, विधायकों और कार्यकर्ताओं के साथ मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय पहुंचे और गेट के बाहर धरने पर बैठ गए. कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सड़क पर लेटकर विरोध किया. देर रात तक कार्यालय के बाहर नारेबाजी और प्रदर्शन चलता रहा. कांग्रेस ने बुधवार को 11 बजे निर्वाचन आयोग कार्यालय जाकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराने का ऐलान किया था. हालांकि अंतिम समय में पार्टी का तय कार्यक्रम रद्द हो गया और निर्धारित समय पर प्रतिनिधिमंडल नहीं पहुंचा. लेकिन यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता कार्यालय पहुंच गए और उन्होंने विरोध को एक नए और आक्रामक प्रतीक में बदल दिया.
रोशनपुरा चौराहे पर कांग्रेस का सामूहिक उपवास
कांग्रेस इस पूरे मामले को सिर्फ नामांकन रद्द होने की तकनीकी कार्रवाई नहीं बता रही. पार्टी इसे संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता, लोकतांत्रिक मर्यादा और राजनीतिक संतुलन से जुड़ा बड़ा मुद्दा बना रही है.
इस प्रदर्शन में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, राज्यसभा सांसद अशोक सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कई कांग्रेस विधायक शामिल हुए.
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जीतू पटवारी ने जनता के नाम लिखा खुला पत्र
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मध्य प्रदेश की जनता के नाम खुला पत्र भी लिखा. इसमें उन्होंने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने को संवैधानिक संस्थाओं पर जनता के भरोसे पर हमला बताया. पटवारी ने आरोप लगाया कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाएं लगातार दबाव में लाई जा रही हैं और नागरिकों से संविधान तथा लोकतंत्र की रक्षा के लिए सतर्क रहने की अपील की.दूसरी ओर भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार किया है. भाजपा नेता डॉ. हितेश बाजपेयी ने कहा कि कांग्रेस अपनी ही गलतियों को छिपाने के लिए स्तरहीन राजनीति कर रही है. उन्होंने कांग्रेस संगठन को बिखरा हुआ बताते हुए कहा कि पार्टी बौद्धिक दिवालियापन की स्थिति में है. भाजपा इसे कांग्रेस की गलती पर खड़ा किया गया सियासी नाटक बता रही है. कांग्रेस इसे लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की लड़ाई कह रही है. लेकिन इतना तय है कि मध्य प्रदेश का यह राज्यसभा चुनाव अब सिर्फ वोटों का गणित नहीं रहा.
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