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अनिल अंबानी बैंक फ्रॉड केस में सुप्रीम कोर्ट की फटकार- एजेंसियों की लेटलतीफी नामंजूर

कोर्ट ने अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) और उसकी कंपनियों से जुड़े कथित बैंकिंग धोखाधड़ी मामले की जांच में सीबीआई और ईडी द्वारा दिखाई गई ‘‘अनिच्छा’’ पर सोमवार को नाराजगी व्यक्त की और उन्हें इस मामले में ‘‘निष्पक्ष, तटस्थ, पारदर्शी और समयबद्ध’’ जांच करने का निर्देश दिया.

अनिल अंबानी बैंक फ्रॉड केस में सुप्रीम कोर्ट की फटकार- एजेंसियों की लेटलतीफी नामंजूर
  • सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी के बैंक फ्रॉड मामले में सीबीआई और ईडी की जांच में देरी को लेकर गंभीर नाराजगी जताई
  • अदालत ने जांच एजेंसियों को आपस में समन्वय बनाकर निष्पक्ष और समयबद्ध जांच पूरी करने का निर्देश दिया
  • ED के लिए सभी वित्तीय संस्थानों को सहयोग देना अनिवार्य किया और असहयोग की स्थिति में कोर्ट को सूचित करने को कहा
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सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी की रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) से जुड़े बैंक फ्रॉड मामले में जांच को लेकर केंद्रीय जांच एजेंसियों पर सख्त रुख अपना लिया है. अदालत ने इस मामले में सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच को “अनिच्छुक” बताते हुए नाराजगी जाहिर की और दोनों एजेंसियों को आपस में समन्वय बनाकर समयबद्ध तरीके से जांच पूरी करने का निर्देश दिया. CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि अदालत यह तय नहीं कर सकती कि किसे गिरफ्तार किया जाए, लेकिन जांच एजेंसियों की ओर से दिखाई जा रही ढिलाई स्वीकार्य नहीं है. कोर्ट ने कहा कि जांच ऐसी होनी चाहिए जो न सिर्फ अदालत बल्कि आम जनता में भी भरोसा पैदा करे.

जांच एजेंसियों को ‘साथ मिलकर काम' करने का निर्देश

अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि जांच एजेंसियों को आपस में “जॉइन हैंड्स” करना होगा. साथ ही पीठ ने कहा कि जांच निष्पक्ष, स्वतंत्र और बिना किसी पूर्वाग्रह के होनी चाहिए. अदालत ने सभी संबंधित वित्तीय संस्थानों को ईडी के साथ पूरा सहयोग करने का भी निर्देश दिया और असहयोग की स्थिति में एजेंसी को कोर्ट को सूचित करने की छूट दी.

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सरकार की ओर से SIT और कार्रवाई की जानकारी

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि ईडी अधिकारियों की एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई है और अब तक चार गिरफ्तारियां हो चुकी हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि बिना आधार के गिरफ्तारी नहीं की जा सकती. साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि अब तक करीब 15,000 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं और सच्चाई सामने लाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी.

याचिकाकर्ता की आपत्ति, बड़ी गिरफ्तारियों का मुद्दा

इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दलील दी कि अब तक सिर्फ निचले स्तर के अधिकारियों की ही गिरफ्तारी हुई है. उन्होंने कहा कि सेबी की रिपोर्ट में फंड की हेराफेरी की योजना की बात सामने आने के बावजूद सीबीआई की ओर से कोई बड़ी गिरफ्तारी नहीं की गई है.

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चार हफ्ते बाद अगली सुनवाई

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को वित्तीय संस्थानों से जानकारी जुटाने की प्रक्रिया जारी रखने का निर्देश दिया. अदालत ने जरूरत पड़ने पर प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा और मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद तय की. कोर्ट ने जोर दिया कि जांच तेज और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि जवाबदेही और सार्वजनिक विश्वास सुनिश्चित किया जा सके.

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