- लोकसभा, राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने की संभावना बढ़ रही है
- 106वें संविधान संशोधन कानून में बदलाव के तहत परिसीमन के आधार को 2011 की जनगणना आंकड़ों पर रखा जाएगा
- वर्तमान जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन में देरी के कारण 2029 चुनाव तक आरक्षण लागू करना संभव नहीं होगा
लोकसभा और राज्य की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फ़ीसदी आरक्षण का प्रावधान 2029 के लोकसभा चुनाव से ही लागू होने की संभावना बढ़ गई है. इस बारे में मोदी सरकार ने नई पहल शुरू की है. सूत्रों की मानें तो 106वें संविधान संशोधन क़ानून में बदलाव की तैयारी हो रही है. इस संबंध में एक बिल संसद के इसी सत्र में आने की संभावना है.
क़ानून में बदलाव की जरूरत क्यों ?
2023 में संसद ने 106वें संविधान संशोधन कानून के ज़रिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया था. इस कानून को नारी शक्ति वंदन अधिनियम का नाम दिया गया था. इसमें प्रावधान किया गया था कि क़ानून लागू होने के बाद जो पहली जनगणना होगी , उसी के आंकड़े के आधार पर परिसीमन कर महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित की जाएगी. फ़िलहाल जनगणना की प्रक्रिया चल रही है जिसके अगले साल मार्च में पूरा होने की संभावना है. उसके बाद जनगणना के आंकड़े जारी किए जाएंगे, जिसके आधार पर फिर परिसीमन किया जाएगा. आम तौर पर परिसीमन का काम पूरा होने में दो से तीन साल का समय लग सकता है. ज़ाहिर है ऐसे में 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित नहीं की जा सकेंगी. इसलिए अब सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम में बदलाव करने का प्रस्ताव रखा है.
कानून में बदलाव से क्या होगा?
नारी शक्ति वंदन अधिनियम एक संविधान संशोधन क़ानून है, इसलिए एक बार फिर सरकार संविधान संशोधन बिल लेकर आएगी. सूत्रों के मुताबिक़ बिल में सरकार इस बात का प्रस्ताव रखेगी कि अभी चल रही जनगणना प्रक्रिया से मिलने वाले आंकड़ों की बजाए परिसीमन का आधार 2011 की जनसंख्या के आंकड़ों को रखा जाए. इसका परिणाम ये होगा कि परिसीमन का काम जल्द से जल्द शुरू किया जा सकेगा.
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जून में परिसीमन आयोग का गठन
सूत्रों का अनुमान है कि अगर इसी सत्र में क़ानून को मंजूरी मिल जाती है तो जून में ही परिसीमन आयोग का गठन किया जा सकेगा. ऐसे में आयोग 2029 लोकसभा चुनाव से काफ़ी पहले ही अपनी रिपोर्ट दे सकेगा जिसके आधार पर अगला लोकसभा चुनाव सम्पन्न कराया जा सकेगा.
आम सहमति बनाने की कोशिश
इस मुद्दे पर सरकार ने आम सहमति बनाने की कोशिशें तेज़ कर दी हैं. सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह ने इसकी कमान संभालते हुए विपक्ष में शामिल कई क्षेत्रीय दलों के नेताओं से बात की. इनमें एनसीपी शरद पवार , शिवसेना उद्धव , वाईएसआर कांग्रेस , एआईएमआईएम और बीजेडी जैसी पार्टियां शामिल हैं. इसके अलावा सोमवार देर शाम अमित शाह ने एनडीए सहयोगियों से भी बैठक कर उनको जानकारी दी. मंगलवार को अपनी रणनीति बनाने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इंडिया गठबंधन के नेताओं की बैठक बुलाई है. कांग्रेस सांसद माणिकम टैगोर ने बताया कि इस मुद्दे पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू तीन बार खरगे से बात कर चुके हैं.
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