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मिडिल ईस्ट जा रहे अमेरिका के 5 जंगी जहाज, इनमें 4,500 मरीन कमांडो... क्या ईरान में शुरू होगा ग्राउंड ऑपरेशन?

US-Israel and Iran War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटों के अंदर होर्मुज स्ट्रेट खोलने की चेतावनी दी थी. उनकी ये मियाद खत्म हो रही है. इसी बीच अमेरिका की 5 जंगी जहाज ईरान की ओर बढ़ रहे हैं.

मिडिल ईस्ट जा रहे अमेरिका के 5 जंगी जहाज, इनमें 4,500 मरीन कमांडो... क्या ईरान में शुरू होगा ग्राउंड ऑपरेशन?
Donald Trump
IANS
  • अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष तीन सप्ताह से जारी है और युद्ध समाप्त होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं
  • ट्रंप ने पांच दिन का सीजफायर घोषित किया है जिसमें ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर हमले नहीं होंगे
  • अमेरिका ने होर्मुज जलसंधि सुरक्षित करने के लिए पांच युद्धपोतों के साथ लगभग 4,500 मरीन कमांडो तैनात किए हैं
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US-Israel and Iran War: अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग को तीन हफ्ते हो चुके हैं. अब तक जंग थमती नजर नहीं आ रही है. हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को 5 दिन के सीजफायर का ऐलान किया है. उन्होंने बताया कि 5 दिन तक ईरान के पावर प्लांट और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला नहीं होगा. लेकिन इससे पहले ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की मियाद भी थी कि वह होर्मुज स्ट्रेट खाली करे वरना अंजाम भुगतने को तैयार रहे. इस धमकी के 24 घंटे से ज्यादा हो गए हैं. कल सुबह पौने छह बजे के आसपास ये 48 घंटे पूरे हो जाएंगे.

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वाकई अमेरिका अपनी चेतावनी पर अमल करेगा? यह सच है कि उसने बड़े हमले की तैयारी कर रखी है. ईरान की तरफ पांच अमेरिकी युद्धपोत- USS बॉक्सर, USS पोर्टलैंड, USS कॉमस्टॉक, USS न्यू ऑर्लियंस और USS त्रिपोली बढ़ रहे हैं. पश्चिम एशिया में इन पांचों युद्धपोतों का पहुंचना बहुत बड़ी बात है.

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इन 5 जंगी जहाजों में क्या है खास?

ये सब कोई मामूली युद्धपोत नहीं हैं. इन युद्धपोतों में तैनात मरीन कमांडो विशेष तरह के ऑपरेशन करने सें सक्षम हैं. ये कमांडो होर्मुज को सुरक्षित कर सकते हैं. ईरानी कब्जे वाले द्वीपों को अपने कब्जे में ले सकते हैं ताकि होर्मुज के रास्ते जहाजों की आवाजाही हो सके.

USS त्रिपोली एक एम्फीबियस असॉल्ट शिप है. यानी यह जल-थल दोनों जगह कारगर है. इसमें  1,204  क्रू मेंबर हैं. इसमें 1,787 मरीन कमांडो हैं. ये जमीन, आसमान और समंदर में कार्रवाई कर सकते हैं. इसमें हेलीकॉप्टर के साथ, MV‑22 ऑस्प्रे विमान  और  F‑35B स्टील्थ फाइटर जेट तैनात होते है जिनसे इसकी ताकत कई गुना बढ़ जाती है. 

अगर USS बॉक्सर की बात करें तो यह भी एम्फीबियस असॉल्ट शिप है जिसमें 2,200 मरीन कमांडो तैनात होते हैं. साथ में हेलीकॉप्टर के साथ साथ MV‑22 ऑस्प्रे विमान भी तैनात होते हैं. यानी अमेरिका के 4500 मरीन कमांडो ईरान की तरफ जा रहे हैं.

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क्या ग्राउंड ऑपरेशन करेगा अमेरिका?

लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या ये मरीन ईरान की जमीन पर भी उतरेंगे? ये सच है कि अब अमेरिका को यह लग रहा है कि बिना ग्राउंड ऑपरेशन किए वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोल नहीं सकता है. जबकि यह वही रास्ता है जिससे होकर दुनिया का 20 फीसदी तेल और गैस गुजरता है. 28 फरवरी को जब से अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया है तब से यह समुद्री रास्ता बंद है. इस लड़ाई से पहले यहां से रोजाना 130 के करीब तेल टैंकर और कार्गो शिप गुजरते थे. अब बहुत मुश्किल से रोजाना 6 से 7 शिप ही गुजर पाते हैं- वे भी उन देशों के, जिनके ईरान के साथ अच्छे रिश्ते हैं. ईरान ने साफ कर दिया है कि वह दुश्मन देशों के जहाज को इस रास्ते से गुजरने नहीं देगा. लड़ाई शुरू होने बाद अब तक करीब 20 से अधिक जहाजों पर हमले हो चुके हैं.

दरअसल अपनी सारी तैयारी के बावजूद ट्रंप के सामने कार्रवाई को लेकर कई दुविधाएं हैं. पहले उन्होंने कहा कि होर्मुज से अमेरिका के गैस-तेल नहीं जाते, इसलिए इसे खुलवाना दूसरों की जिम्मेदारी है. फिर उन्होंने दूसरे देशों से कहा कि वे अपने युद्धपोत भेजकर इसे खुलवा लें. इस मामले में पहले उनके सहयोगियों ने मना कर दिया. लेकिन शायद अब मजबूरी है कि वे अपने जहाज यहां भेजने की बात कर रहे हैं. ट्रंप ने नाटो को कायर तक बता दिया. अब वे जमीनी कार्रवाई की बात कर रहे हैं और कह रहे हैं कि अमेरिका अकेले ये जिम्मेदारी उठा सकता है. 

लेकिन जिस तरह ट्रंप बयान बदल रहे हैं और ईरान भी जवाबी कार्रवाई को तैयार दिखता है, उसकी वजह से अब कल ही पता चलेगा कि असली कार्रवाई क्या होती है. क्या इस युद्ध का दूसरा दौर शुरू हो सकता है और अमेरिकी सैनिक ईरान की धरती पर उतर सकते हैं?

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