- स्टैनजिन त्सांगयांग ने 5 सितंबर 2026 को भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त किया है
- वह लद्दाख के कारगिल जिले से भारतीय सेना में पहली महिला अफसर बनने वाली हैं
- स्टैनजिन का जन्म जंस्कार घाटी के एक छोटे से गांव में हुआ, जहां तापमान शून्य से नीचे रहता है
लद्दाख की दुर्गम और सुदूर जंस्कार घाटी की बेटी स्टैनजिन त्सांगयांग ने इतिहास रच दिया है. उसने 5 सितंबर 2026 को भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त किया हैं. इसी के साथ स्टैनजिन त्सांगयांग ने केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के कारगिल ज़िले से भारतीय सेना में पहली महिला अफसर बनने का गौरव हासिल किया है.
स्टैनजिन त्सांगयांग की सफलता पर पूरा लद्दाख उन पर गर्व कर रहा है. बर्फीली वादियों और शून्य से नीचे पहुंचते तापमान में पली-बढ़ी स्टैनजिन त्सांगयांग की सफलता की कहानी सोशल मीडिया पर भी छाई हुई है. कोई उन्हें लद्दाख की बेटी तो कोई असम की तेज़पुर यूनिवर्सिटी की पूर्व छात्रा बताकर जश्न मना रहा है.

stanzin tsangyang first woman indian army officer Kargil Ladakh Zanskar
𝐅𝐫𝐨𝐦 𝐭𝐡𝐞 𝐌𝐨𝐮𝐧𝐭𝐚𝐢𝐧𝐬 𝐭𝐨 𝐓𝐡𝐞 𝐎𝐥𝐢𝐯𝐞 𝐆𝐫𝐞𝐞𝐧𝐬 : 𝐒𝐭𝐨𝐫𝐲 𝐨𝐟 𝐎𝐟𝐟𝐢𝐜𝐞𝐫 𝐂𝐚𝐝𝐞𝐭 (𝐖𝐨𝐦𝐞𝐧) 𝐒𝐭𝐚𝐧𝐳𝐢𝐧𝐓𝐬𝐚𝐧𝐠𝐲𝐚𝐧𝐠
— Army Training Command, Indian Army (@artrac_ia) September 2, 2026
Born in the breathtaking valley of Zanskar in Ladakh, amidst towering mountains and harsh winters, Officer Cadet… pic.twitter.com/jxNRdMKORe
पढ़ाई के लिए बचपन में ही छोड़ दिया गांव
स्टैनजिन त्सांगयांग अपने परिवार में सबसे छोटी बेटी हैं. उनका बचपन से ही भारतीय सेना में जाने का सपना था. ऐसे में उन्होंने कम उम्र में ही अपना घर और गांव छोड़ दिया ताकि दूर किसी अच्छे स्कूल से पढ़ाई करके इंडियन आर्मी जॉइन करने की राह आसान बना सकें. स्टैनजिन त्सांगयांग ने लेह के लामडोन मॉडल स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की, जहां उन्होंने लगभग चौदह साल अपने परिवार से दूर हॉस्टल में बिताए. उनकी उत्कृष्ट शैक्षणिक क्षमता के कारण उन्हें उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति मिली, जिसके बाद उन्होंने असम के तेज़पुर विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की.

बिना किसी मिलिट्री बैकग्राउंड के स्टैनजिन त्सांगयांग बनीं कारगिल की पहली महिला सैन्य अधिकारी Photo Credit: @BJP4Ladakh
बिना किसी सैन्य पृष्ठभूमि के रचा इतिहास
भारतीय सेना की ओर स्टैनजिन त्सांगयांग का सफर कॉलेज के दिनों में एनसीसी (5 असम बटालियन) से जुड़ने के दौरान शुरू हुआ, जहां उन्होंने पहली बार सेना अधिकारी बनने के विभिन्न रास्तों के बारे में जाना. स्टैनज़िन के परिवार या उनके पूरे समुदाय में दूर-दूर तक सेना का कोई बैकग्राउंड नहीं था. उनके लिए यह रास्ता बिल्कुल नया, अनजान और चुनौतियों से भरा था. ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी चेन्नई के लिए कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज परीक्षा और फिर एसएसबी इलाहाबाद का कठिन इंटरव्यू क्लियर करना आसान नहीं था. कई बार संशय के पल आए, लेकिन ज़ंस्कार के ऊंचे पहाड़ों से मिली सहनशक्ति और माता-पिता के अटूट विश्वास ने उनके कदमों को कभी डगमगाने नहीं दिया.

पहाड़ों का हौसला: जब ज़ंस्कार की स्टैनजिन त्सांगयांग के कंधों पर सजे सितारे, तो पूरे कारगिल की आंखें भर आईं
Photo Credit: Tsering_gaphel
तेजपुर यूनिवर्सिटी ने दी बधाई
स्टैनजिन त्सांगयांग की सफलता पर असम की तेज़पुर यूनिवर्सिटी ने बधाई दी है. यूनिवर्सिटी ने सोशल मीडिया पर लिखा, "हमारी पूर्व छात्रा और 5 असम बटालियन NCC की पूर्व कैडेट स्टैनजिन त्सांगयांग को बहुत-बहुत बधाई. लद्दाख के ज़ंस्कार की रहने वाली स्टैनज़िन अब भारतीय सेना में कमीशन हुई हैं. यह TU के लिए गर्व का क्षण है."
लद्दाख भाजपा बोली- हमारी बेटी ने छू लिया आसमान
स्टैनजिन त्सांगयांग के भारतीय सेना में अफसर बनने पर लद्दाख भाजपा ने भी सोशल मीडिया पर उन्हें शुभकामनाएं दीं. लद्दाख भाजपा ने लिखा, "रुकावटों को तोड़कर इतिहास रचने वाली स्टैनजिन त्सांगयांग को बधाई. असली हिम्मत और लगन से पूरे होने वाले सपने ऐसे ही होते हैं."
Breaking Barriers & Making History: Congratulations to CO(W) Stanzin Tsangyang 🏔️ 🪖 🇮🇳
— BJP Ladakh (@BJP4Ladakh) September 3, 2026
This is what dreams built on pure grit look like! 🔥
Meet Officer Cadet Stanzin Tsangyang from Zanskar. From spending 14 years away from home for school, to earning a Mechanical Engineering… pic.twitter.com/uTzEhlfMrE
लद्दाख भाजपा ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा, "मिलिए ज़ंस्कार की ऑफिसर कैडेट स्टैनजिन त्सांगयांग से. स्कूल के लिए 14 साल घर से दूर रहने से लेकर मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने और NCC में शामिल होने तक, उन्होंने एक ऐसा रास्ता चुना जिस पर बहुत कम लोग चलते हैं, जबकि उनके परिवार में कोई मिलिट्री बैकग्राउंड भी नहीं था. 5 सितंबर 2026 को वह कारगिल ज़िले की पहली महिला आर्मी ऑफिसर बनीं. यह इस बात का सबूत है कि जब लद्दाख की बेटियां आसमान छूने का लक्ष्य रखती हैं, तो सबसे ऊंची चोटियां भी उनके सम्मान में सिर उठाकर खड़ी हो जाती हैं."
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