विज्ञापन

जंग के मैदान में 'योद्धा' ही सबसे जरूरी, जमीन पर जीत का कोई विकल्प नहीं: NDTV समिट में आर्मी चीफ

NDTV Defence Summit LIVE: आर्मी चीफ धीरज सेठ ने कहा कि जमीन पर जंग जीतना सबसे महत्वपूर्ण है और इसकी सफलता का कोई विकल्प नहीं है. तकनीक युद्ध की अवधि कम करती है लेकिन जमीन पर नियंत्रण निर्णायक होता है.

जंग के मैदान में 'योद्धा' ही सबसे जरूरी, जमीन पर जीत का कोई विकल्प नहीं: NDTV समिट में आर्मी चीफ
"युद्ध में लैंड विक्ट्री ही असली जीत", आर्मी चीफ धीरज सेठ का NDTV पर बड़ा बयान
  • आर्मी चीफ धीरज सेठ ने कहा कि जमीन पर जंग जीतना ही असली विजय और युद्ध की सफलता का प्रमुख मानक.
  • उन्होंने बताया कि तकनीक युद्ध की अवधि कम करती है लेकिन जमीन पर सैनिकों का महत्व हमेशा बना रहता है.
  • धीरज सेठ ने 1971 के युद्ध में पाकिस्तानी सैनिकों के सरेंडर को जीत और नैरेटिव का प्रतीक बताया
नई दिल्‍ली:

NDTV Defence Summit LIVE: जमीन पर जंग जीतने का कोई विकल्प नहीं है और यही असल मायनों में विजय है. आर्मी चीफ धीरज सेठ ने एनडीटीवी डिफेंस समिट में यह अहम टिप्पणी की है. उन्होंने कहा कि आज तकनीक के चलते युद्धों की अवधि कम हो गई है. लेकिन जमीन पर जंग ही सबसे अहम है. उस पर मिली जीत निर्विवाद होती है. उन्होंने कहा कि टेक वारफेयर के दौर में भी यह महत्वपूर्ण है. जमीन पर उतरने वाले सैनिकों का महत्व हमेशा बना रहेगा. उन्होंने कहा कि नैरेटिव वारफेयर जैसी चीजों ने अपना दायरा बढ़ा लिया है. फिर भी मेरी यह राय है कि एक सच्चाई कभी नहीं बदलेगी. वह यह कि जमीन पर नियंत्रण हमेशा महत्वपूर्ण रहेगा और सफलता का सबसे जरूरी फैक्टर होगा. 

आर्मी चीफ ने 1971 युद्ध को किया याद 

धीरज सेठ ने कहा कि युद्धों में जीत को हमेशा किसी क्षेत्र पर नियंत्रण से मापा जाता था और ऐसे ही इसका आकलन होता रहेगा. जनरल धीरज सेठ ने कहा कि युद्ध में आपकी क्षमता कितनी है, यह हमेशा योद्धा पर निर्भर करेगा. यहां योद्धा का अर्थ सैनिक से था. उन्होंने कहा कि जमीन पर कौन जीता है, नैरेटिव भी इससे ही तय होता है. उन्होंने 16 दिसंबर, 1971 की उस तस्वीर का भी जिक्र किया, जिसमें पाकिस्तानी सैनिक सरेंडर करते हैं. वह कहते हैं कि यह हमारी जीत ही थी, जिसकी तस्वीर आई और आज तक नैरेटिव का हिस्सा है.

टेक्नोलॉजी का होना तो बस शुरुआत भर... 

आर्मी स्टाफ के प्रमुख धीरज सेठ ने कहा कि आज के समय में टेक्नोलॉजी सिर्फ कुछ ही लोगों तक सीमित नहीं रह गई है. उन्होंने कहा, "जो टेक्नोलॉजी हमारे पास है, वह हमारे दुश्मन के पास भी हो सकती है. टेक्नोलॉजी का होना तो बस शुरुआत भर है. असली फायदा इस बात में है कि हम कितनी तेजी से नई चीजें बना सकते हैं, हालात के हिसाब से ढल सकते हैं और दुश्मन की चालों का मुकाबला करने के तरीके खोज सकते हैं." आर्मी चीफ धीरज सेठ ने कहा कि जो तकनीक हमारे पास है, वह हमारे प्रतिद्वंद्वी के पास भी हो सकती है. तकनीक की उपलब्धता होना तो बस एक शुरुआत है. युद्ध में असली बढ़त तीन चीजों से होती है. पहला यह कि हम कैसे नई चीजों की ओर बढ़ते हैं, उन्हें अमल में लाते हैं और फिर दुश्मन के पास जो रणनीति है, कैसे उसकी काट करते हैं.

युद्ध के तरीके बदल रहे हैं, आज युद्ध सिर्फ जमीन पर नहीं लड़ा जाता

एनडीटीवी डिफेंस समिट में सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने भविष्य के युद्ध, तकनीक, आत्मनिर्भरता और सैन्य रणनीति को लेकर महत्वपूर्ण बातें कहीं. उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और बदलती सैन्य रणनीति के कारण युद्ध अब 'वॉर्स विद पॉज' यानी ठहराव वाले युद्ध का रूप ले रहे हैं. तकनीक लड़ाई के एक चरण को छोटा कर सकती है, लेकिन इससे पूरी जंग की अवधि जरूरी नहीं कि कम हो. जनरल धीरज सेठ के मुताबिक, लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों में युद्ध के बीच आने वाला ठहराव भी सैन्य रणनीति का हिस्सा बनता जा रहा है. यह ठहराव संघर्ष के खत्म होने या किसी एक पक्ष के प्रभुत्व का संकेत नहीं, बल्कि उसकी तीव्रता और स्वरूप में बदलाव को दर्शाता है.

लंबे युद्ध में आत्मनिर्भरता निर्णायक

सेना प्रमुख ने कहा कि जब कोई संकट लंबे समय तक चलता है, तब आत्मनिर्भरता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है. उनका कहना था कि आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल घरेलू स्तर पर हथियार बनाना नहीं है, बल्कि ऐसी क्षमता विकसित करना है जिससे देश लंबे संघर्ष के दौरान दूसरे देशों की आपूर्ति पर निर्भर हुए बिना अपनी जरूरतें पूरी कर सके.
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता का लक्ष्य होना चाहिए- भारत में डिजाइन, भारत में विकास, भारत में निर्माण, भारत में रखरखाव और भारत में अपग्रेडेशन, साथ ही इन क्षमताओं को दुनिया के लिए उपलब्ध कराना. उनके अनुसार, जब भारत वैश्विक बाजार के लिए रक्षा उत्पाद बनाएगा, तो इससे शांतिकाल में विकसित निर्यात क्षमता युद्ध के समय अतिरिक्त उत्पादन क्षमता में बदल सकती है.

पुराने हथियारों को मिलेगी नई तकनीकी क्षमता

सेना प्रमुख ने भविष्य के युद्ध को लेकर कहा कि आने वाले समय में युद्ध का मतलब केवल पुराने हथियारों को हटाकर नए हथियार लाना नहीं होगा. इसके बजाय पुराने हथियारों और सैन्य प्रणालियों को नई तकनीक से अपग्रेड और आधुनिक किया जाएगा. यानी मौजूदा हथियारों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेंसर, नेटवर्किंग और अन्य आधुनिक तकनीकों से जोड़कर उनकी क्षमता बढ़ाई जा सकती है.

युद्ध की सफलता का पैमाना रहेगा जमीन पर नियंत्रण

जनरल धीरज सेठ ने कहा कि युद्ध के स्वरूप में बड़े बदलाव के बावजूद एक बुनियादी वास्तविकता नहीं बदलेगी- जमीन पर नियंत्रण. उनके अनुसार, क्षेत्रीय जीत को युद्ध की सफलता का ठोस पैमाना माना जाता रहेगा और किसी क्षेत्र पर कब्जा, उसे सुरक्षित रखना तथा उसकी रक्षा करना आखिरकार सैन्य बलों की जिम्मेदारी होगी. उन्होंने संकेत दिया कि भारत की आत्मनिर्भरता केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि वैश्विक रक्षा उत्पादन और निर्यात क्षमता विकसित करने से भी जुड़ी होनी चाहिए.

ये भी पढ़ें:- स्‍क्रू से लेकर मिसाइल तक भारत सब बना रहा... NDTV डिफेंस समिट में राजनाथ सिंह

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Army Chief, Dheeraj Seth, NDTV Defence Summit 2026
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com