- नेवी चीफ ने किया भारत के 5,000 साल पुराने समुद्री इतिहास का जिक्र, बोले- भारत सिर्फ जमीनी देश नहीं
- भारत का लगभग 90% व्यापार समुद्री मार्गों से होता है, जो देश की आर्थिक समृद्धि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- समुद्री मार्गों पर रसोई गैस, ईंधन, इंटरनेट केबल जैसे आवश्यक संसाधन निर्भर हैं
NDTV Defence Summit 2026: नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने भारत की समुद्री शक्ति और समुद्र पर बढ़ती रणनीतिक निर्भरता को लेकर कहा कि भारत को सिर्फ एक महाद्वीपीय भूभाग और समुद्र तट वाले देश के रूप में देखना अधूरा नजरिया है. नौसेना प्रमुख ने एनडीटीवी डिफेंस समिट 2026 में कहा कि भारत एक समुद्री राष्ट्र है, जिसका समुद्र से संबंध आर्थिक, सभ्यतागत, भू-राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक चारों स्तरों पर गहरा है. समुद्र में अगर कोई गड़बड़ी होती है, तो इसका असर सिर्फ किसी देश पर नहीं, बल्कि हर घर पर पड़ता है.
एनडीटीवी डिफेंस समिट में बोलते हुए एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि भारत की करीब 5,000 साल पुरानी समुद्री विरासत रही है, जो प्राचीन लोथल के बंदरगाह और डॉकयार्ड से लेकर आज के आधुनिक वैश्विक व्यापार नेटवर्क तक फैली हुई है. उन्होंने कहा कि समुद्र भारत की समृद्धि के लिए केवल भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण द्वार हैं. नौसेना प्रमुख के मुताबिक भारत के 60 प्रतिशत से अधिक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का स्रोत तटीय राज्यों से आता है, जबकि करीब 18 प्रतिशत आबादी समुद्र तट से 50 किलोमीटर के दायरे में रहती है. उन्होंने बताया कि भारत के व्यापार का लगभग 90 प्रतिशत मात्रा के हिसाब से और 70 प्रतिशत से अधिक मूल्य के हिसाब से समुद्री मार्गों से होता है.
रसोई गैस से लेकर इंटरनेट केबल तक... सब समुद्र पर निर्भर
एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने कहा कि समुद्र के रास्ते केवल व्यापारिक सामान ही नहीं आता-जाता, बल्कि वाहनों के लिए ईंधन, रसोई गैस, रोजमर्रा की जरूरतों के सामान और यहां तक कि समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल भी समुद्री नेटवर्क पर निर्भर हैं. इसलिए समुद्र भारत की अर्थव्यवस्था और समृद्धि के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं.
कमजोर हो रही समुद्री व्यवस्था
एडमिरल स्वामीनाथन ने चेतावनी दी कि पिछले कुछ समय में देखने को मिला है कि समुद्री व्यवस्था कमजोर हुई है. उन्होंने कहा कि आज की परस्पर जुड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था में किसी संघर्ष से भौगोलिक दूरी देश को उसके प्रभावों से अलग नहीं कर सकती. दूर समुद्र में पैदा हुआ व्यवधान अंततः भारत के तटों, घरों, उद्योगों और अर्थव्यवस्था तक पहुंच सकता है.
AI बदल रहा समुद्री युद्ध का स्वरूप
नेवी चीफ ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम तकनीक, अंतरिक्ष तकनीक और स्वायत्त प्रणालियां भविष्य के नौसैनिक युद्ध के स्वरूप को तेजी से बदल रही हैं. इन तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल से समुद्री सुरक्षा की चुनौतियां भी अधिक जटिल हो रही हैं. नौसेना प्रमुख ने हिंद महासागर क्षेत्र को दुनिया के सबसे अधिक सैन्यीकृत समुद्री क्षेत्रों में से एक बताया. उन्होंने कहा कि अतिरिक्त-क्षेत्रीय नौसेनाओं के 40 से 50 युद्धपोत लगभग लगातार इस क्षेत्र में मौजूद रहते हैं.
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समुद्र में बढ़ रहा खतरा, रणनीतिक तैयारी को मजबूत करना जरूरी
नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने कहा कि क्षेत्र में खतरे का स्वरूप भी बदल चुका है. अब इसमें बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ-साथ मानव रहित टेक्नोलॉजी (Unmanned Systems) भी शामिल हैं. छोटे-छोटे गैर अधिकारिक समूहों तक भी यह तकनीक पहुंच रही है, जो खतरे की घंटी है. एडमिरल स्वामीनाथन के अनुसार, भारत की आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और डिजिटल कनेक्टिविटी समुद्र से गहराई से जुड़ी हुई है. ऐसे में बदलते समुद्री सुरक्षा वातावरण के बीच भारत के लिए अपनी समुद्री क्षमताओं और रणनीतिक तैयारी को मजबूत करना महत्वपूर्ण है.
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