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छोड़ी लाखों की जॉब छोड़ आतंक‍ियों से लड़े, कोबरा कमांडो के आर्मी अफसर बनने की कहानी

ब‍िहार के सॉफ्टवेयर इंजीनियर राघवेंद्र झा को गया ऑफिसर ट्रेनिंग अकादमी (ओटीए) में  कमीशन म‍िला है. इन्‍होंने जावा डेवलपर, सीआरपीएफ सब-इंस्पेक्टर से लेकर भारतीय सेना में अधिकारी बनने का प्रेरणादायक सफर तय क‍िया है.

छोड़ी लाखों की जॉब छोड़ आतंक‍ियों से लड़े, कोबरा कमांडो के आर्मी अफसर बनने की कहानी
बिहार के दरभंगा से ताल्लुक रखने वाले राघवेंद्र झा की यात्रा साहस, दृढ़ संकल्प और देश सेवा के प्रति अटूट समर्पण की मिसाल है.
@PROdefprayagraj
  • गया ऑफिसर ट्रेनिंग अकादमी में शॉर्ट सर्विस कमीशन के चौथे बैच की पासिंग आउट परेड में 253 युवा अफसर बने हैं
  • राघवेंद्र झा ने आईटी क्षेत्र से CRPF सब-इंस्पेक्टर और फिर भारतीय सेना के अफसर बनने तक का सफर तय किया है
  • राघवेंद्र झा ने नक्सल प्रभावित ओडिशा, जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में काउंटर-टेररिज्म अभियानों में भूमिका निभाई थी

ब‍िहार के गया स्थित ऑफिसर ट्रेनिंग अकादमी (ओटीए) 5 स‍ितंबर 2026 को शॉर्ट सर्विस कम‍ीशन (टेक्निकल एंट्री) के चौथे बैच की पास‍िंग आउड परेड हुई,  ज‍िसके जर‍िए देश को 253 युवा अफसर म‍िले हैं.  राघवेंद्र झा ने भारतीय सेना के ल‍िए पहले जावा डेवलपर और उसके बाद सीआरपीएफ की जॉब छोड़ दी. सॉफ्टवेयर इंजीनियर राघवेंद्र झा की सक्‍सेस स्‍टोरी पीआरओ डिफेंस प्रयागराज ने अपने सोशल मीड‍िया अकाउंट पर शेयर करते हुए बताया कि झा ने CoBRA बटालियन से OTA गया तक का शानदार सफ़र तय क‍िया है.

आईटी क्षेत्र से सैन्य सेवा तक का कदम

बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले राघवेंद्र झा की यात्रा साहस, दृढ़ संकल्प और देश सेवा के प्रति अटूट समर्पण की मिसाल है. कंप्यूटर साइंस में जावा डेवलपर के रूप में अपना करियर शुरू करने वाले राघवेंद्र ने बाद में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में सब-इंसपेक्टर के रूप में जॉइन किया. ओटीए गया में पास‍िंग पाउड परेड के बाद भारतीय सेना का ह‍िस्‍सा बनने वाले 253 कैडेट में से राघवेंद्र झा भी एक हैं. 

cobra commando to indian army officer raghvendra jha success story OTA Gaya

भारतीय सेना में अफसर बनने वालों कैडेट में ब‍िहार के दरभंगा का राघवेंद्र झा भी शाम‍िल है.            Photo Credit: @PROdefprayagraj

नक्सल मोर्चे और अनंतनाग में अदम्य साहस

भारतीय सेना में अफसर के रूप में नई पारी शुरू करने से पहले राघवेंद्र झा की तैनाती देश के बेहद चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में हुई. उन्होंने ओडिशा के नक्सल प्रभावित इलाकों और जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में काउंटर-इंसर्जेंसी/काउंटर-टेररिज्म (CI/CT) अभियानों में कोबरा बटालियन के साथ अदम्य साहस का परिचय दिया. उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें वर्ष 2025 में  डीजी कमेंडेशन कार्ड से सम्मानित किया गया.

ओटीए गया में नेतृत्व और भारतीय सेना में कमीशन

अर्धसैनिक बल में अपनी छाप छोड़ने के बाद, राघवेंद्र ने भारतीय सेना में शामिल होने का सपना पूरा किया. ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA) गया में प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने अकादमी की वॉलीबॉल टीम की कप्तानी की और अपनी नेतृत्व क्षमता, सत्यनिष्ठा व खेल भावना से सभी का दिल जीता.

जावा डेवलपर से सीआरपीएफ सब-इंसपेक्टर और फिर भारतीय सेना में अधिकारी बने राघवेंद्र झा की प्रेरणादायक कहानी. नक्सल विरोधी कोबरा बटालियन से लेकर ओटीए गया तक का उनका यह सफर अदम्य साहस, नेतृत्व और देश सेवा के प्रति अटूट समर्पण को दर्शाता है.

ओटीए चेन्‍नई में भी पास‍िंग आउड परेड

उधर, चेन्‍नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में भी पास‍िंग आउट परेड हुई है, ज‍िसमें 342 भारतीय कैडेट्स पास आउट होकर भारतीय सेना का हिस्सा बने. चीफ ऑफ द नेवल स्टाफ एडमि‍रल कृष्‍णा स्वामीनाथन ने परेड की समीक्षा कर परेड की सलामी ली और युवा सैन्य अधिकारियों को देश सेवा के लिए प्रेरित किया.  

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