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LBSNAA History: अंग्रेजों का होटल कैसे बना IAS-IPS की पाठशाला? 2 बार अचानक हो गया था तबाह

मसूरी स्थित लबासना ने 1 सितंबर 2026 को अपना 67वां स्थापना दिवस मनाया. जानिए अंग्रेजों के चार्लेविले होटल से लेकर देश की सबसे प्रमुख प्रशासनिक अकादमी बनने का दिलचस्प सफर, जो 1984 की भीषण आग और 1991 के विनाशकारी भूकंप के बावजूद अडिग खड़ा है.

LBSNAA History: अंग्रेजों का होटल कैसे बना IAS-IPS की पाठशाला? 2 बार अचानक हो गया था तबाह
LBSNAA का दिलचस्प इतिहास: मसूरी के होटल से देश की सबसे बड़ी 'प्रशासन की पाठशाला' बनने का सफर
  • लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी की स्थापना 1959 में हुई थी
  • अकादमी का नाम 1972 में बदलकर लाल बहादुर शास्त्री प्रशासन अकादमी रखा गया
  • मई 1984 में अकादमी की मुख्य इमारत आग की भयंकर घटना में पूरी तरह जलकर खाक हो गई थी

LBSNAA History: क्या आप जानते हैं कि भारत के आईएएस और आईपीएस जैसे अफसरों की पाठशाला लबासना (LBSNAA) कभी अंग्रेजों का एक होटल हुआ करता था, जिसका नाम दो सगे भाइयों चार्ली और बिली के नाम पर रखा गया था? उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों में स्थित देश का यह सबसे ताकतवर कैंपस इतिहास में दो बार पूरी तरह तबाह हो चुका है. लबासना 1 सितंबर 2026 को 67 साल का हुआ है. 3 सितंबर को LBSNAA ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इसके स्थापना दिवस की तस्वीरें शेयर की हैं. 

अपने 67वें स्थापना दिवस के अवसर पर लबासना ने सोशल मीडिया पर लिखा-"1959 में अपनी स्थापना के 67 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में, मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी ने 1 सितंबर 2026 को अकादमी दिवस मनाया. यह आयोजन सिविल सेवा प्रशिक्षण और लोक प्रशासन के क्षेत्र में अकादमी की गौरवशाली विरासत को याद करने के लिए किया गया था."

देश में संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा पास करने वालों की ट्रेनिंग जब दिल्ली के मेटकाफ हाउस से निकलकर मसूरी पहुंची, तब लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी अस्तित्व में आई. आइए जानते हैं अंग्रेजों के होटल से लेकर देश की सबसे बड़ी अकादमी बनने का लबासना का यह दिलचस्प सफर. 

राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी की स्थापना की घोषणा

LBSNAA की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, 15 अप्रैल 1958 को तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने लोकसभा में घोषणा की थी कि सरकार देश में एक राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी स्थापित करेगी. उस समय तक अफसरों को आईएएस प्रशिक्षण स्कूल दिल्ली और आईएएस स्टाफ कॉलेज शिमला में ट्रेनिंग दी जाती थी.

दिल्ली और शिमला से मसूरी का सफर

राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी की स्थापना के लिए सरकार ने आईएएस प्रशिक्षण विद्यालय (दिल्ली) और आईएएस स्टाफ कॉलेज (शिमला) का विलय कर दिया. इसके साथ ही सितंबर 1959 से राजधानी दिल्ली के सिविल लाइंस क्षेत्र में यमुना नदी के पास स्थित मेटकाफ हाउस में चल रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम को भी समाप्त कर दिया गया.

सिविल सेवाओं में चयन पाने वाले उम्मीदवारों की ट्रेनिंग के लिए नई जगह के रूप में उत्तराखंड के मसूरी में स्थित चार्लेविले एस्टेट को चुना गया. यह जगह अंग्रेजों के जमाने में एक आलीशान होटल हुआ करती थी. चार्लेविले होटल का निर्माण 1854 में जनरल विल्किंसन द्वारा करवाया गया था. मसूरी बैंक के सेवानिवृत्त प्रबंधक हॉब्सन ने इसे साल 1861 में खरीदा था. उन्होंने इस चार्लेविले होटल का नाम अपने दो बेटों चार्ली और बिली के नाम पर रखा था.

LBSNAA ने 1984 में देखा आग का तांडव

साल 1972 में राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी का नाम बदलकर लाल बहादुर शास्त्री प्रशासन अकादमी कर दिया गया था. इसके बाद साल 1973 में इसके नाम में राष्ट्रीय शब्द जोड़ा गया. साल 1984 में इस अकादमी ने अपनी पहली सबसे बड़ी आपदा झेली. मई 1984 में पूर्व चार्लेविले परिसर की मुख्य इमारत भीषण आग में जलकर राख हो गई थी. हालांकि, इसकी पुरानी वास्तुकला की झलक आज भी अकादमी के मुख्य परिसर के कुछ भवनों में देखने को मिलती है.

लबासना ने 1991 में झेली भूकंप की तबाही

साल 1991 में उत्तराखंड में भयानक भूकंप आया, जिसकी चपेट में आने से लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी भी नहीं बच पाई. उस उत्तरकाशी भूकंप के झटकों से अकादमी का महिला ब्लॉक और जी.बी. पंत ब्लॉक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे. बाद में इन दोनों के स्थान पर 'कालिंदी' और 'ध्रुवशिला' नाम से दो नए भवन बनाए गए. चार्लेविले होटल के ठीक निचले हिस्से में घुड़सवारी का मैदान, निशानेबाजी का क्षेत्र और स्पोर्ट्स क्लब स्थित है. यहाँ एक पहाड़ी को काटकर रेसकोर्स और पोलो ग्राउंड बनाया गया है.

लबासना में कैसे होती है ट्रेनिंग?

यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा पास करने वाले सभी उम्मीदवारों की शुरुआती ट्रेनिंग लबासना में ही होती है, जिसे सामान्य ट्रेनिंग या फाउंडेशन कोर्स कहा जाता है. तीन महीने की इस शुरुआती ट्रेनिंग के बाद आईपीएस अधिकारी हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी और अन्य सेवाओं के अधिकारी अपनी-अपनी निर्दिष्ट अकादमियों में चले जाते हैं. खास बात यह है कि लबासना में केवल भारत ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देशों जैसे बांग्लादेश, भूटान, मालदीव और म्यांमार आदि के सिविल सेवकों को भी प्रशिक्षण दिया जाता है.  

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